27 फ़रवरी 2010

कॉल के लिए कत्ल-गाजियाबाद

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में केटरिंग ठेकेदार की 16 तारीख को मिली लाश की गुत्थी आखिर पुलिस ने सुलझा ली है जितेन्द्र नाम के इस ठेकेदार की हत्या संदीप ने अपने घर बुला कर की थी दरअसल जितेन्द्र संदीप की पत्नी के फ़ोन पर अश्लील बाते और एस एम् एस करता था इस बात से गुस्साय संदीप ने जितेन्द्र की हत्या कर उसकी लाश मसूरी इलाके में फेक दी पुलिस इस लाश की गुत्थी को सुलझाने में लगी थी आखिरकार सेर्वेलांस के जरिये पुलिस संदीप को पकड़ने में कामयाब रही. संदीप ने भी आपना गुनाह कबूल लिया है
ये तस्वीर है मरहूम जितेन्द्र की जिसकी लाश गाजिय़ाबाद के मसूरी इलाके में मिली थी। शुरूआती जांच में साफ था कि जितेन्द्र का कत्ल किया गया है। पुलिस उसी दिन से हत्या की गुत्थी सुलझाने में लगी थी। आखिर सात दिन बाद पुलिस कत्ल का मकसद और कातिल भी बेनकाब हो गया। पुलिस की मुताबिक जितेन्द्र की हत्या संदीप नाम के शख्स ने की थी। जितेन्द्र संदीप की पत्नी के मोबाइल पर अक्सर अश्लील बाते और मैसेज करता था संदीप ने जितेन्द्र को ऐसा करने से कई बार मना किया। लेकिन उसपर कोई असर नही हुआ। संदीप ने एक साजिश रची और आपनी पत्नी से फ़ोन कराकर जितेन्द्र को अपने घर बुलाया। और फिर घर में उसकी जमकर पिटाई की.. जिसकी वजह से जितेन्द्र की मौत हो गई.. खुद को बचाने के लिए संदीप ने लाश को ठिकाने लगाने के मकसद से मसूरी इलाके में फेंक दिया।
संदीप अब पुलिस कि गिरफ्त में है और उसने अपना गुनाह भी कुबूल कर लिया है। उस के मुताबिक बार बार समझाने के बाद भी जब जितेन्द्र नहीं माना तब उसे मज़बूरी में ये कदम उठाना पड़ा। लेकिन हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले वो भूल गया कि गुनाह कभी छुपता नही है। यही हुआ संदीप के साथ आखिरकार वो पुलिस गिरफ्त में आ ही गया।

पुलिस की अभी तक की जांच में पता चला है कि संदीप ने अकेले ही इस वारदात को अंजाम दिया था। हालांकि पुलि अब ये भी जानने में लगी है कि क्या जितेन्द्र के कत्ल की वजह फोन करना था या फिर कुछ और वजह भी तो नही थी।

फर्जी पुलिस वाला गिरफ्तार-मोगा

उसके तन पर पुलिस की वर्दी होती तो रोब खुद ब खुद आ जाता। इलाके में रोब खूब चलता और लोग उसको सल्यूट करना नही भूलते। जनाब पंजाब पुलिस में बतौर एएसआई तैनात जो थे। कई लोगों को वर्दी पहनाने का झांसा भी दिया। लेकिन जब असलियत सामने आई तो खुद की वर्दी ही उतर गई। चलिए आप भी मिल लिजिए पंजाब पुलिस के उस मुलाजिम से।
जरा पहचानिए दोनों में से पुलिसकर्मी कौन है।........ बिलकुल सही पहचाना.. भई जिसने पुलिस की वर्दी पहनी है वही तो पुलिसकर्मी है। लेकिन पुलिसकर्मी के साथ खडे ये जनाब भी कल तक किसी पुलिस वाले से कम नही थे। यकिन ना आए तो जरा इन साहब का ये आईकार्ड देख लिजिए। ये आई कार्ड पंजाब पुलिस का है और इसमे लगी तस्वीर है इन्ही साहब की है। साथ में औहदा भी लिखा है.. एएसआई। अब सवाल ये है कि कल तक पंजाब पुलिस की नौकरी बजाने का दावा करने वाला कुलविंदर पुलिस गिरफ्त में कैसे आ गया। इसकी कहानी भी बेहद अजीब है। दरअसल पंजाब पुलिस के मुताबिक ये फर्जी पुलिस कर्मी है। और पुलिस कर्मी बनकर लोगों को चूना लगाया करता था। पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर उनसे पैसा ऐंठ लेता और फिर रफूचक्कर हो जाता। लेकिन लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाला ये शातिर आ गया पुलिस की गिरफ्त में पुलिस ने इसके पास से फर्जी आई कार्ड भी बरामद कर लिया है।
पुलिस को जांच में पता चला की इसके साथ एक महिला भी शामिल है। जिसके पास भी बाकायदा पंजाब पुलिस का आई कार्ड है और उसपर सिपाही का पद लिखा हुआ है। पुलिस के मुताबिक कुलविंदर और अमरदीप कौर नाम की महिला लोगों को पंजाब पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर रूपये ठगते थे। यकिन दिलाने के लिए अपना आई कार्ड और तब भी यकिन ना हो तो रूपये के बदले कुछ दिन बाद का चेक दे देते थे। ताकि काम ना हो सके तो लोग अपना पैसा निकलवा ले। लेकिन जब चेक बैंक में डालते तो कुलविंदर के नाम से कोई अकाउंट ही नही होता। पुलिस की जांच में पता चला है कि कुलविंदर पर पहले भी कई मामले दर्ज है।
पुलिस के हाथ कुलविंदर के साथ मिलकर फर्जीवाडा करने वाली महिला का फोटो लग चुका है। हालांकि अभी तक पुलिस अमरदीप कौर तक नही पहुंच सकी है। पुलिस को तलाश अमरदीप की सरगर्मी से तलाश है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से इनके फर्जीवाडे के कुछ मामले खुल सकते है।

बहन का सौदा-गाजियाबाद

गाजियाबाद के उस शख्स ने लगाई है... रिश्तों की कीमत.. वो बेच रहा है खून के रिश्ते को... उसे जरूरत है खरीददार की। सुनने में ये भले ही अजीब लग रहा हो... लेकिन हम आपको बता दें कि ये सौ फिसदी सच है। गाजियाबाद के उस शख्स ने रिश्तों की कीमत लगाई है पचास हजार रूपये। जिस रिश्ते को उसने बेचा है... वो विश्वास का है... अपनेपन का अहसास कराता है। लेकिन चंद रूपयों के आगे वो इस कदर झुका की...रिश्तों के मायने ही भूल गया।
चंद रूपयों के लिए राजू नाम के इस शख्स के लिए रिश्तें बेमानी हो गए। जब पचास हजार रूपये की चमक दिखी तो भूल गया कि रिश्तों के मायने क्या होते है। राजू पर जो आरोप लगे है वो किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देंगें। राजू ने सौदा किया है रिश्तों का..सौदा उस लडकी का जो इसकी कलाई पर राखी बांधती.. इसे भाई कहती। लेकिन रक्षाबंधन पर दिए वचन को राजू चंद पलों में भूल गया। और इसने कर दिया अपनी ही बहन का पचास हजार रूपये में सौदा। पुलिस ने राजू और इसकी बहन के खरीददार चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जानकारी मिली थी कि गाजियाबाद के लोनी इलाके में लडकी की खरीद-फरोख्त की जा रही है। पुलिस ने इलाके के मकान पर छापा मारकर लडकी के भाई और चार खरीददारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को पता चला कि लडकी का सौदा पचास हजार रूपये में तय हुआ था।
राजू पर बेहद गंभीर आरोप लगे है.. हालांकि वो इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। राजू के मुताबिक वो तो अपनी बहन को शादी के लिए लाया था। और जिन चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है वो लडकी को देखने के लिए आए थे। वहीं गिरफ्तार किया गए बुजुर्ग के मुताबिक बेटे के अपाहिज होने की वजह से वो शादी के लिए आए थे। बेटे के अपाहिज होने की वजह से ही शायद लडकी को पचास हजार रूपये में खरीदने की बात हो रही थी।
इस मामले में दोनों ही पक्ष खरीद फरोख्त की बात से इनकार कर रहे है वहीं सच्चाई सबके सामने है। लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने एक और मामले में आठ साल की लडकी को आसाम लाकर गाजियाबाद में बेचने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को जांच में पता चला कि इम्तियाज और उसका साथी लडकी को आसाम से बहला फुसलाकर लाए थे और इलाहाबाद के एक युवक को बेचने की फिराक में थे। दोनों ही घटनाओं ने साफ कर दिया है कि पैसों की खातिर इनसान किस कदर रिश्तों के मायने भूल जाता है। हालांकि पुलिस लडकियों की खरीद फरोख्त के मामले में पुछताछ कर रही है। हो सकता है आने वाले वक्त मे कुछ और चेहरे बेनकाब हो जाएं।

बुजुर्ग दंपति की हत्या-जबलपुर

मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक बुजुर्ग दंपति की घर में घुसकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। दम्पति की लाश घर से बरामद की गई। जांच मे पता चला है कि दोनों के सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया है। हालांकि अभी तक हत्यारों का सुराग नही लग सका है।
जबलपुर के इस घर में हुए हैं... एक रात में दो कत्ल...सरोज सोनी और उनकी पत्नी केशरी सोनी की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। दरअसल सरोज और केसरी इस घर में अकेले रहते थे। सरोज की बेटी और बेटे अलग रहते है। जब सरोज का बेटा मिलने के लिए घर पहुंचा तो दरवाजा बंद था। कई बार खटखटाने के बाद भी जब दरवाजा नही खुला तो अनिल को शक हुआ... उसने घर के पिछले हिस्से से अंदर जाकर देखा। घर के अंदर केशरी और सरोज की खून सनी लाश पडी थी। अनिल ने मामले की जानकारी तुरंत पुलिस को दी गई।
घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पुलिस के आलाधिकारी भी पुहंच गए। पुलिस के मुताबिक मामला लुट का नही लग रहा है। क्योंकि घर का सारा सामान ठीक ठाक था। अभी तक की जांच मे पता चला है कि बुजुर्ग दंपति ने घर के उपर का कमरा दो छात्रों को किराए पर दे रखा था। हत्या से एक दिन पहले ही छात्रों ने मकान खाली कर दिया था। वहीं पता चला है कि बुजुर्ग दंपति ब्याज पर पैसा भी देता था। हत्या के बाद से घर में रखा बही खाता गायब है। हालांकि हत्या की वजह पूरी तरह से साफ नही हो पाई है। लेकिन माना जा रहा है कि हत्या को किसी जानकार ने ही अंजाम दिया है।
पुलिस अब किराए पर रहने वाले छात्रों का पता लगा रही है। उसे उम्मीद है कि उनसे पुछताछ में कुछ अहम जानकारी हाथ लग सकती है। वहीं घर से बही खाता गायब होने से हत्याकांड में किसी जानकार के शामिल होने की गुंजाइश बढती जा रही है। फिलहाल पुलिस मामले की तफ्तीश में लगी है लेकिन घर के अंदर हुए दोहरेकांड से इलाके के लोग सन्न है।

एक तरफा प्यार

एंजब उस लडकी ने इजहारे मोहब्बत में इंकार किया तो वो शख्स हैवान बन गया। उसे ये कतई नागवार गुजरा की उस लडकी ने उस शख्स की मोहब्बत को ठुकरा दिया। इंकारे मोहब्बत में उस शख्स ने जो कुछ किया... उसने अहमदाबाद के हर शख्स को सन्न कर दिया।
मैं तुमसे प्यार करता हूं... तुमसे शादी करना चाहता हूं। ये एक लडके के अरमान थे.. और सवाल भी लेकिन जब इन सवालों के जवाब में उसे इंकार मिला तो वो बौखला गया। इस कदर बौखलाया कि उसने लडकी को ही मौत के घाट उतार दिया। दरअसल इस खूनी प्रेम कहानी की शुरूआत हुई थी मणिपुर की एक सुपरटेक लेबोरेट्री से। दर्शाना और आजम नाम का लडका एक साथ काम करते थे। आजम की जल्द ही दर्शाना से दोस्ती हो गई। लेकिन आजम इस दोस्ती को प्यार समझने लगा। उसने कभी अपने प्यार का इजहार नही किया। वैसे भी दर्शाना शादीशुदा थी। हालांकि कुछ वक्त पहले पति पत्नी दोनों अलग रहने लगे और दर्शाना ने अपने पति से तलाक ले लिया। आजम एक तरफा प्यार करता था। एक दिन उसे लगा कि अब प्यार का इजहार कर देना चाहिए। जब उसने दर्शाना के सामने प्यार का इजहार किया तो उसने आजम के प्यार को ठुकरा दिया। वो इस कदर बौखलाया कि लेबोरेट्री में ही दर्शाना की गला रेतकर हत्या कर दी।
दर्शाना की चीख पुकार सुनकर आस पास के लोग लेबोरेट्री मे आ पहुंचे। तबतक आजम फरार हो चुका था। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले की तफ्तीश की तो पांच घंटे बाद आजम पुलिस गिरफ्त मे आ गया। उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कुबूल कर लिया। उसने बताया कि दर्शाना से प्यार करता था लेकिन उसने इंकार किया तो गुस्से में आकर उसने दर्शाना की हत्या कर दी।
आजम ने दर्शाना के साथ अपने जज्बातों को प्यार समझ लिया। लेकिन उसने एक बार भी नही सोचा की एक तरफा प्यार में वो जो कुछ करने जा रहा है। वो उसे गुनाहगार बना देगा। और उसकी बाकी जिदंगी दर्शाना के प्यार में नही बल्कि जेल की सलाखों के पीछे होगी।

25 फ़रवरी 2010

शक में कत्ल

शक इंसान को कब हैवान बना दे पता नही चलता। ऐसा ही कुछ हुआ अलीगढ के रहने वाले उस शख्स के साथ भी। उसे शक था अपनी पत्नी के बदचलन होने का। इसी शक ने उस इंसान को हैवान बना दिया। गुस्से से तिलमिलाए पति ने पत्नी की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी। इतना ही नही वारदात को अंजाम देने के बाद उस सिरफिरे ने कत्ल की खौफनाक कहानी खुद पडोसियों के सामने बयां की।
सुना आपने.. क्या कह रहा है ये शख्स। ये एक कातिल का कुबूलनामा है। ये बात सौ फिसदी सच है कि इसने अपनी पत्नी का कत्ल किया है। कत्ल की वजह भी आपने सुन ली। क्या यही असल वजह थी कि शब्बीर अपनी पत्नी का कातिल बन गया। दरअसल अलीगढ के महफूज नगर के रहने वाले शब्बीर की शादी आठ साल पहले परवीन के साथ हुई थी। शब्बीर के पांच बच्चे है। शादी के बाद से ही अक्सर दोनों में आए दिन कहासुनी होती। कई बार तो नौबत मारपीट तक आ जाती। हालांकि पडोसियों ने दोनों को समझाने की कई बार कोशिश की लेकिन कोई फायदा नही हुआ। पत्नी पत्नी के बीच कहासुनी किसी के लिए कोई नई बात नही थी लेकिन शब्बीर को शक होने लगा की उसके पत्नी के किसी और मर्द के साथ अवैध संबंध है। इस बात को लेकर वो तिलमिला उठा। ऐसे में उसने परवीन पर तेज धार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद शब्बीर ने खुद ही बाहर आकर पडोसियों को वारदात की जानकारी दी। पडोसियों ने शब्बीर को पकड लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने हत्या मामला दर्ज कर लिया है।
शब्बीर और परवीन के पांच मासूम बच्चे है जिन्हें ये भी नही मालूम की इनका कसूर क्या है। मां रही नही पिता है कि जेल की सलाखों के पीछे चला गया। शक के दंश ने पूरे परिवार को तबाह कर दिया।

पुलिस वाले का मर्डर

मुर्दा इंसान को पुलिस कैसे जिंदा करती है ये कोई इलाहाबाद पुलिस से सीखे। इलाहाबाद के घूरपुर थाने में हिरासत में लिए गए 4 आरोपियों को इतना पीटा गया कि उनमें से दो की वहीं मौत हो गई। बाकी दो की हालत भी खासी गंभीर है। और जब जवाब देने की बारी आई तो पुलिसवालों ने मरे हुए दोनों लोगों को जिंदा बताने की कोशिश की।
जब खुद की गर्दन फंस रही हो तो इंसान क्या कुछ नहीं करता। लेकिन अपनी गर्दन बचाने के लिए इलाहाबाद पुलिस ने जो कुछ किया उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। इलाहाबाद के घूरपुर पुलिस थाने के नौ पुलिसकर्मियों ने दो मुर्दा इंसानों को जिंदा तक कर दिया। जी हां ये सौ फीसदी सच है। खुद को बचाने के लिए पुलिस वालों ने दोनों मुर्दों को सरकारी अस्पताल में ज़िंदा बता कर.... इलाज के नाम पर भर्ती कराने की कोशिश की। इस काम में नाकाम रहने के बाद भी घूरपुर के थानेदार अफसरों और मीडिया को गुमराह करने की कोशिश करते रहे। उनके मुताबिक़ एक दो नहीं, बल्कि चारों आरोपी शराब पिए हुए थे और शराब की वजह से ही दो की मौत हुई ...जबकि तीसरा अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। हालांकि अफसरों के पहुंचने पर पोल खुलती देख थाने के सारे लोग अस्पताल से फरार हो गए। थाने के 9 पुलिस वालों के खिलाफ ह्त्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है। और मामले की सीबीसीआईडी जांच की सिफारिश भी कर दी गई है।
मृतको के परिजनों की मानें तो थानेदार से लेकर दरोगा और सिपाहियों ने मिल कर चार लोगों को पेड़ों में बांध कर कई घंटे बुरी तरह पीटा। पिटाई से संजय निषाद और अशोक की थाने में ही मौत हो गई जबकि मुकेश की हालत बेहद नाजुक है। चौथे घायल देवानंद की चीख-पुकार और उसके चेहरे पर बैठे डर को देख कर ही सारी कहानी समझी जा सकती है।
घूरपुर पुलिस पर आरोप ये भी है कि उसने जिस मामले में इन चारों को गिरफ्तार किया, उससे इनका कोई लेना-देना ही नहीं है। जिस बियर शॉप के पास थाने के एक सिपाही कमलेश पांडे पर फायर किया गया ... वहां ये लोग सिर्फ मौजूद भर थे। जबकि पुलिस इन लोगों को पीट कर इनसे जुर्म कबूल कराना चाहती थी। चाहे जो हो... लेकिन हिरासत में लेकर इस कदर पीटने का हक पुलिस को किसने दिया की किसी की मौत हो जाए।

बीवी का कातिल

जब उस शख्स के अपनी साली से रिश्ते हुए तो पत्नी को उसने दरकिनार कर दिया। पहले तो उसने अपनी पत्नी से दूरी बनाई और फिर जब बात नही बनी तो उसने अपनी पत्नी का ही कत्ल कर दिया। मामला पंजाब के मोगा का है जहां एक व्यक्ति ने अपनी साली के साथ नाजायज संबधों को बनाए रखने के लिए अपनी ही पत्नी को मौत के घाट उतार दिया।
ये तस्वीर एक कातिल की है... कातिल पति की। सुरेंद्र सिहं नाम के इस शख्स ने अपनी पत्नी का बेरहमी से कत्ल कर दिया। पत्नी की हत्या से पहले सुरेंद्र ने एक बार भी नहीं सोचा। सुरेंद्र की शादी 15 साल पहले लुधियाना की रहने वाली मंजिंद्र कौर से हुई थी। लेकिन दो बच्चों का पिता होने के बावजुद भी सुरेंद्र का दिल अपनी साली पर आ गया। शादी करीब 15 साल पहले लुधियाना की रहने वाली मंजीन्द्र कौर के साथ हुई थी। सुरेंद्र मोंगा की एक फैक्ट्री में सुपरवाईजर की नौकरी करता था। जीजा साली के बीच पनपे एक नए रिश्ते के बीच दीवार बनी सुरेंद्र की पत्नी। मंजिन्द्र कौर को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने के लिए सुरेंद्र ने उसकी हत्या कर दी।
सुरेंद्र सिंह ने कंपनी के कुछ कर्मचारियों से कहा की मासी की टीबी होने के कारण मौत हो गई है..और वह इस वक्त शमशान घाट पर है। ये सुनकर कंपनी के कुछ कर्मचारी भी श्मशान घाट पहुंच गए। वहां एक गठरी में बंद महिला की लाश बंधी थी। उनकी मदद से शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहां खड़े उसके दोस्तों को क्या पता था की जिसके अंतिम संसकार में शामिल होने आए है वो कोई और नहीं बल्कि सुरेंद्र की पत्नी है। सुरेंद्र ने किसी को मृतका का मुंह तक नहीं देखने दिया और शमशान घाट के रजिस्टर में झूठा नाम कुलवंत कौर उमर साठ साल की एंट्री दर्ज करवा दी। बाद में पुलिस स्टेशन में अपनी पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी लुधियाना में रह रहे अपने सालो को भी सूचित कर दिया की उसकी पत्नी कही अपने भाई के पास तो नहीं आई लेकिन सुरेंद्र सिंह का ये प्लान कामयाब नही हो सका...मृतका के भाईयों ने मोंगा पहुंच कर जब छानबीन की तो पता चला की उनकी बहन की मौत हो चुकी है। मृतका के भाईयों ने श्मशान घाट जाकर उसकी अस्थियां ली और पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच की तो मामले से पर्दा उठ गया। जब पुलिस ने केस से जुड़े लोगों को पकड़ कर उनसे पुछताछ की तो पता चला की सुरेंद्र ने अपने दो भांजो और अपनी मां के साथ मिलकर कत्ल को अंजाम दिया है।
सुरेंद्र ने सोची समझी साजिश के तहत कत्ल की इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया लेकिन उसका गुनाह जल्द बेपर्दा हो गया। सुरेंद्र अपनी साली के साथ वारदात के बाद से फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। लेकिन इस घटना ने पति पत्नी के रिश्ते को शर्मसार कर दिया है।

मासूम का मर्डर-गाजियाबाद

किराए के पैसों को लेकर हुई कहासुनी एक मासूम बच्चे के कत्ल तक पहुंच गई। नोएडा पुलिस ने रोहन नाम के शख्स को 6 साल के एक बच्चे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस बच्चे का एक फरवरी को अपहरण कर लिया गया था.... कुछ दिन बाद उसकी लाश के टुकड़े बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक यह वारदात बदले की भावना का नतीजा थी।
6 साल के मासूम राहुल की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी... फिर भी उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। राहुल की लाश बिहार जाने वाली एक ट्रेन से बरामद हुई। हत्या के बाद उसकी लाश के कई टुकड़े किए गए जिन्हें एक बैग में भर कर ट्रेन में छोड़ दिया गया था। राहुल का अपरहण एक फरवरी को उसके घर के बाहर हुआ था। परिजनों ने राहुल की काफी तलाश की ...लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। उसके अपरहण की रिपोर्ट नोएडा सेक्टर-39 थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने बाकायदा इसकी जांच के लिए एक टीम गठित की... और जब एक बच्चे की लाश के टुकड़े मिलने की खबर मिली तो पता चला की ये लाश राहुल की है।राहुल की लाश मिलने के बाद पुलिस ने कातिल की तलाश शुरू की तो रोहन नाम का एक शख्स पुलिस के शिकंजे में आ गया। रोहन कुछ दिन पहले राहुल के यहां किराएदार के तौर पर रहता था। पुलिस के मुताबिक रोहन और उसका दोस्त श्रवण दोनों एक साथ किरायेदार थे। पैसों को लेकर राहुल के पिता शुशांक के साथ उनकी कहासुनी हुई और फिर शुशांक ने दोनों को अपने घर से निकाल दिया। रोहन को ये बात नागवार गुज़री और उसने श्रवण के साथ मिल कर साजिश रची। बदला लेने के लिए उन्होंने मकान मालिक के बेटे राहुल का अपरहण कर लिया और फिर गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी। इतने पर भी जब उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने लाश के टुकड़े कर एक बैग में भरे और बैग को बिहार जाने वाली विशाल एक्सप्रेस में रख दिया। इसके बाद रोहन खुद भी बिहार अपने घर चला गया।
पुलिस ने रोहन को तो गिरफ्तार कर लिया है जबकि उसका साथी श्रवण अभी फरार है.... उसकी तलाश जारी है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल हुआ हथियार भी बरामद कर लिया है। लेकिन मासूम बच्चे के कत्ल की इस वारदात ने हर किसी को सन्न कर दिया है।

कारोबारी का मर्डर-रोहिणी

दिल्ली में देर रात दो लोगों की हत्या कर दी गई। पहली वारदा रोहिणी इलाके में हुई जहां एक व्यापारी की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। वारदात को व्यापारी के जानकारों ने ही अंजाम दिया है। वारदात के वक्त घर पर व्यापारी देवेन्द्र की मां ही मौजूद थी। वहीं दूसरी वारदात कड़कड़डूमा कोर्ट के पास हुई जहॉ एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। हत्या का मकसद लूटपाट था जिसका विरोध करने पर युवक की हत्या कर दी गई।
दिल्ली के रोहिणी इलाके में रहने वाली पिंकी को अब भी यकीन नहीं कि उसके पापा अब इस दुनिया में नहीं है। पत्नी, बेटी समेत पूरा परिवार इस समय सदमे में है। दरअसल दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 16 इलाके में देर शाम हुई एक व्यापारी की हत्या ने आसपास के लोगों में खौफ पैदा कर दिया है। शाम करीब 8 बजे देवेंदर अरोड़ा की 4 लोगों ने उन्हीं के घर में घुसकर गोली मार कर हत्या कर दी। देवेंद्र की पत्नी बच्चों के साथ रिश्तेदार के घर गई हुई थी। घर पर देवेंद्र और उसकी मां ही मौजूद थी। चार लोग देवेंद्र से मिलने के लिए आए थे। सभी बाते कर रहे थे कि देवेंद्र की मां खाना लाने के लिए बाहर चली गई जब वो वापस आई तो देवेंद्र की खून सनी लाश फर्श पर पडी थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। देवेंद्र के सीने में कई गोलियां लगी थी। तफ्तीश में पता चला है कि गोली काफी नजदीक से मारी गई थी। पुलिस के मुताबिक हत्यारे देवेंदर के जानकार थे और मामला आपसी रंजिश का लग रहा है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर हत्यारों की तलाश शुरु कर दी है।
अभी इस मामले की तफ्तीश चल ही रही थी कि रात 10 बजे के करीब दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के पास से भी हत्या की खबर आई। यहां एक 22 साल के युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक इमरान की हत्या लूट पाट के मकसद से की गई। हत्यारे इमरान के पास से उसका मोबाइल और पैसे भी लेकर भाग गए।
पुलिस ने मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरु कर दी है। लेकिन इन वारदातों से एक बात साफ है राजधानी में अपराधियो के हौसले बुलंद है और पुलिस उन्हें पकडने में नाकाम साबित हो रही है।







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गांव को लूटा

एक ऐसा गैंग जिसके लिए इंसान की जान की कीमत महज एक रूपया थी। इस गैग के बदमाश सिर्फ और सिर्फ एक रूपये के लिए कत्ल करने से परहेज नही करते थे। इस गैंग के सात लोगो को गाज़ियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसी के साथ गाजियाबाद के हाफिजपुर इलाके के दो गांवों में हुई डकैती की वारदात को भी पुलिस ने सुलझा लिया है।
नकाब के पीछे छिपे ये चेहरे खतरनाक ही नही खौफनाक भी है। इन नकाब की पीछे के इन हैवानों ने ना जाने कितने घरों को लूटा है। कितनी महिलाओं की अस्मत को तार तार किया है। आखिरकार खौफ का अंत हो गया। गाजियाबाद पुलिस ने इस गैंग के सात लोगों को गिरफ्तार किया है जो महज एक रूपये के लिए भी कत्ल करने से चुकते नही थे। इसी गैंग ने शनिवार को गाज़ियाबाद के हाफिजपुर इलाके में दो गाँव में दर्जन भर घरों में डकैती को अंजाम दिया गया। बदमाश गांव में घुसे और फिर हर घर में अपना कहर बरपाया। जब रामपुर गाँव के बुजुर्ग रघुवीर ने इनका विरोध किया तो इन्होंने उसे मौत के घाट उतार दिया।
पुलिस के मुताबिक ये पहली वारदात नहीं जब इन्होने किसी गाँव को लूटा हो बल्कि तीन साल से ये गैंग इसी तरीके से गांवों में डकैती की वारदात को अंजाम दे रहा था। इतना ही नही घर में मौजूद महिलाओं के अस्मत पर हाथ डालने से भी गैंग के बदमाश नही चुकते थे। तीन साल की मशक्कत के बाद आखिरकार पुलिस ने अब इन्हें गिरफ्तार किया है
इस गैंग का सरगना है मुर्स्लिम नाम का शख्स है। पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार किया है। इनके पास से पुलिस ने भारी मात्रा में लूट का माल बरामद किया है। जिसमें महिलाओं की पाजेब से लेकर कपड़ो तक को लूटने से इन डाकुओ को कोई परहेज नहीं था। घर में रखे बर्तन और अनाज को भी ये लोग लूट लेते थे। इनके कब्ज़े से तमंचे और चाकू भी बरामद किए गए है।
देर से ही सही आखिरकार इंसान की जान से कहीं ज्यादा पैसा की कीमत समझने वाले इस गैंग का पुलिस ने खात्मा कर ही दिया। हालांकि गैंग का सरगना पुलिस गिरफ्त में आ गया है लेकिन अभी कुछ और बदमाश फरार है जिसकी पुलिस को सरगर्मी से तलाश है।

शादी में फायरिंग

एक जमाना था कि शादी-ब्याह में लोग पटाखे छोडते थे। लेकिन अब शादी में फायरिंग करना स्टेटस सिम्बल बन गया है। खुशी में की गई फायरिंग के दौरान जरा सी चूक होने पर पल भर में खुशियां मातम में बदल जाती हैं। पुलिस प्रशासन खुशी में की जाने वाली फायरिंग पर रोक नहीं लगा पा रहा है। यही वजह है कि एक बार फिर दो अलग अलग मामलों में शादी के दौरान गोली चलने से दो लोगों की मौत हो गई।
इस बैक्वेंट हाल मे शादी का जश्न चंद लम्हों में ही मातम में बदल गया.. वजह बनी टशन दिखाने के लिए की गई फायरिग जिससे एक शख्स की जान चल गई ..दरअसल इस बैक्वेट हाल मे मेरठ से एक बारात आई थी ..शादी का जश्न चल ही रहा था कि अचानक एक शख्स ने फायरिग शुरू कर दी ...बन्दुक से निकली गोली फूल कुमार नाम के इस शख्स के सिर पर जा लगी ..उसे आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
.घटना की सूचना पुलिस को दी गई .. घटना की सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस के मुताबिक गोली चलाने वाला शख्स का नाम विकास डागर है। जिसने नशे मे घुत्त होकर इस घटना को अंजाम दिया और उसके बाद फरार हो गया..पुलिस ने विकास के घर पर भी छापा मारा लेकिन वो नही मिला ..बहरहाल पुलिस ने विकास के भाई को हिरासत मे ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है ..पुलिस का कहना है कि गोली चलाने वाले शख्स का पुराना अपराधिक रिकॉर्ड भी है ..यही वजह है कि पुलिस ने इस मामले मे धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया है।
शादी में गोली चलने की ये कोई पहली वारदात नही है बल्कि एक दिन पहले ही गुडगांव में भी शादी समारोह में चलाई गई गोली से एक लाइट मैन की मौत हो गई थी। घटना उस समय हुई, जब दूल्हे का जीजा अपनी बंदूक को लोड कर रहा था। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि शव को पोस्टमॉर्टम के बाद लड़के के परिजनों के हवाले कर दिया गया। इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस के मुताबिक झज्जर के गांव लुहारी से एक बरात गांव घामडोज में आई थी। गांव में ओमपाल की बेटी की शादी थी। बारात निकलते समय खुशी का माहौल एकाएक उस समय गमगीन हो गया, जब गोली चल गई। बारात में आए दूल्हे के जीजा सोनू और पवन एक बग्घी में चढ़ गए और एक लाइसेंसी बंदूक में कारतूस लोड करके चलाने लगे तो गोली ऊपर जाने की जगह बग्गी के साथ लाइट लेकर चल रहे अलीगढ़ के रहने वाले धर्मेन्द्र को लग गई। गोली उसकी छाती में लगी और वह मौके पर लड़खड़ा कर गिर पड़ा। उसे पास के प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
शादी के दौरान हुई दोनों की वारदात में पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है लेकिन किसी भी मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नही हो सकी है।

दहेज का दंश

वो लडकी सारे दुख हंसकर सहती रही... जब भी उसपर जुल्म किए गए.. उसने उफ तक नही की। जानते है ऐसा क्यों किया उस लडकी ने। वो लडकी नही चाहती थी कि उसके मां-बाप को उसके दुख का जरा भी अहसास हो। बेटी के गम को देखकर उसके मां-बाप की आंख में आंसू आ जाए। बस यही सोचकर वो लडकी सारे दुख सारे गम हंसकर सहती चली गई। जब भी वो परेशान होती अपने दुख को वो कागज के पन्नों पर उकेर देती।
ये एक मां के अल्फाज है.. ये एक मां का दर्द है। उस मां का दर्द जिसने अपनी बेटी को लाल जोडे में घर से विदा तो किया लेकिन अब वो दुनिया को ही अलविदा कह चुकी। ये दर्दनाक कहानी गाजियाबाद की रहने वाली प्रशंसा की है। प्रशंसा की मौत हो चुकी है। दरअसल प्रशंसा और मिथुन सक्सेना की शादी ढाई साल पहले हुई थी। सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था। प्रशंसा ने एक बेटे को भी जन्म दिया तो घर में खुशी का ठिकाना ना रहा। लेकिन सात दिसम्बर 2009 के दिन प्रशंसा के परिवार में मातम छा गया। दरअसल प्रशंसा के परिवार वालो को उसके ससुराल से फोन आया की प्रशंसा की तबीयत ठीक नही है। ये सुनकर मायके वाले तुरंत ससुराल पहुंच गए। पता चला की प्रशंसा अपने कमरे में पंखे से लटकी हुई है। और उसकी मौत हो चुकी है। ये देखकर मायके वालों की आंखो में आंसूओं का सैलाब बह निकला। अब एक दुसरे को दिलासा देने के अलावा कुछ नही बचा था। मायके वालों को यकीन नही हो रहा था कि हमेशा खुश रहने वाली प्रशंसा ने ऐसा क्यों किया. क्यों उसने मौत को गले लगा लिया।
प्रशंसा के ससुराल वालों ने उसके मायके वालो को बताया की उसने फांसी लगाकर खुदकुशी की है। हालांकि इस बात को किसी का दिल नही मान रहा था लेकिन जब लाश सामने लटकी हो तो यकीन खुद ब खुद हो रहा था। प्रंशसा के मायके वालो ने उसकी मौत को अपनी किस्मत मान लिया। लेकिन दिल अब भी मानने को तैयार नही था कि उसने ऐसा क्यों किया।
प्रंशसा के मायके वाले इसी बात को लेकर परेशान थे कि उसने ऐसा खौफनाक कदम क्यों उठाया। उन्हे इसका जवाब भी मिला। जब प्रंशसा के मौत का राज खुला तो हर कोई सन्न रह गया। ढाई साल का दर्द प्रंशसा ने चंद कागज के टुकडो पर उकेर दिया था। जो वो कागज के खत सामने आए तो सामने आई एक खौफनाक कहानी।
मुझे उम्मीद है कि आप सब खुश होगें। लेकिन मुझे नही मालूम की मेरी जिदंगी में आगे क्या होने वाला है.. मेरी गृहस्थी दोराहे पर खडी है कब क्या हो जाए मुझे नही मालूम। मेरी दोनों ननदें प्रग्नेंसी के समय मेरे साथ दुर्वयवहार करती थी। अब भी उनके बर्ताव में कोई फर्क नही आया है। पिताजी है कि कोई लिहाज नही करते जब भी मैं अकेली होती हूं अचानक आ जाते है।वो लिहाज़ नहीं करते। कई बार मिथुन को भी कह चुकी हूं लेकिन उन्होने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। उलटा मुझे ही डांटने लगते है.. मेरे साथ मारपीट करते है। हालात ये है कि सब मिलकर मुझे मार देना चाहते है। मम्मी मेरी जिदंगी कभी भी खत्म हो सकती है। मुझे ये भी नही मालूम की ये खत आपको मिलेगा भी या नही। हां मेरे बेटे साथर्क की जान भी खतरे में है।
तुम्हारी बेटी
प्रंशसा
खत लिखते हुए जब प्रशंसा की कलम रूकी तो, इसी के साथ उसकी सांसे भी थम गई। जो दर्द वो अपनी मां को ढाई साल में ना बता सकी, वो उसने इस खत में लिख दिया। ये खत प्रंशसा की मौत के ठीक ढाई महिने बाद मिला। और जब ये खत सामने आया तो उसकी मौत के राज से भी पर्दा उठ गया। दरअसल शादी के बाद से ही प्रशंसा को परेशान किया जा रहा था। उसके साथ मारपीट होती थी। लेकिन उसने ये बाते कभी अपने मायके वालो को नही बताई। मायके वालों के मुताबिक शादी के बाद से ही प्रशंसा को परेशान किया जाने लगा था। यहां तक की गाडी की मांग भी की गई थी।
प्रशंसा के खत मिलने के बाद मायके वालो की शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने दहेज हत्या का मामला दर्ज कर प्रशंसा की सास, ससुर और पति मिथुन को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि उसकी दोनों ननदें अभी फरार है और उन्हीं के पास प्रशंसा का बेटा साथर्क है हालांकि पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश भी दी लेकिन कोई सुराग हाथ नही लग सका है।
डेढ़ साल के सार्थक के अभी तक न मिलने से प्रशंसा की मां अंजू को चिंता सता रही है। वही पुलिस दो आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार करने का भरोसा दे रही है। फिलहाल मिथुन के घर पर ताला लटका है। लेकिन एक बार फिर दहेज की आग ने. एक परिवार को तबाह कर दिया है।

22 फ़रवरी 2010

हंसराज कॉलेज में कत्ल

दिल्ली यूनिवर्सिटी में हंसराज कॉलेज के हॉस्टल में एक छात्र की हत्या कर दी गई। देर शाम छात्र की लाश पंखे से लटकी हुई मिली। मुकेश नाम का छात्र नेत्रहीन था और उसके हाथ बंधे हुए थे। घटना के बाद डीयू में भी तनाव का माहौल है। पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है।
हंसराज कॉलेज के इसी हॉस्टल में मुकेश बघेल की लाश पंखे से लटकी मिली... मुकेश कमरा न. 143 में अकेला रहता था। मुकेश के हाथ रस्सी से बंधे हुए थे। शाम करीब आठ बजे जब मुकेश डिनर के लिए नही पहुंचा तो उसके साथी ने उसे फोन किया.. फोन रिसीव ना किए जाने पर.. एक साथी कमरे में बुलाने के लिए गया। लेकिन मुकेश का कोई पता नही चला... दोस्तो ने गार्ड को मुकेश का पता लगाने के लिए कहा, जब गार्ड मुकेश के कमरे में पहुंचा तो उसकी लाश पंखे से लटकी हुई थी। पुलिस के मुताबिक आगरा का रहने वाला मुकेश कुमार बी.ए. सेकंड इयर की पढ़ाई कर रहा था। वह हिंदी ऑनर्स का स्टूडेंट था और हंसराज कॉलेज के हॉस्टल में ही रहता था। शुरूआती जांच में ये साफ हो गया है कि मुकेश की हत्या की गई है। डॉग स्क्वॉड की मदद से आसपास के इलाके की तलाशी ली गई। मौके से सुराग जुटाने के लिए फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट्स और फरेंसिक एक्सपर्ट की टीम को भी बुलाया गया। लाश के पास से कोई स्यूसाइड नोट नहीं मिला है।
मुकेश के दोस्तों की माने तो उसकी किसी से दुश्मनी नही थी.. वो तो अपने काम से मतलब रखता था। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि मुकेश नेत्रहीन था फिर ऐसे मे किसने और क्यों उसकी हत्या की। पुलिस को उम्मीद है को वो जल्द ही कातिल को गिरफ्तार कर लगी।

कुरूक्षेत्र में लूट

कुरूक्षेत्र पुलिस ने शातिर बाप बेटे को गिरफ्तार किया है। दोनों मिलकर लूट की वारदात को अंजाम दिया करते थे। दोनो को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वारदात को अंजाम देने आए थे। इसी दौरान बदमाशों की बाइक फिसल गई और दोनो पुलिस के हत्थे चढ गए।
पिहोवा पुलिस ने ऐसे बाप बेटे को गिरफ्तार किया है जो देते थे लूट की वारदात को अंजाम... कैसे हम बताते हैं आपको शातिर बाप बेटे की कहानी...कैथल का एक कारोबारी देसराज बंसल बिजनेस के सिलसिले में देर शाम पिहोवा आया था...यहां उसे दुकानदारों से पेमेंट लेकर वापस कैथल लौट जाना था। देसराज एक दुकानदार के पास रुपये लेने पहुंचा था...जैसे ही वो नोटों से भरा बैग लेकर दुकान से बाहर निकला तभी बाइक सवार दो बदमाश वहां आ धमके। दोनो नकाबपोश बदमाशों ने देसराज पर बंदूक तान दी। बंदूक का खौफ दिखा कर दोनो बदमशों ने देसराज से रुपयों से भरा बैग छिन लिया। तब तक आस पास के दुकानदार सारा माजरा समझ चुके थे... दुकानदारों को इकट्ठा होते देख दोनो बदमाश अपनी बाइक से भागने लगे। लेकिन बदमाश थोड़ी ही दूर निकले थे कि उनकी बाइक स्लिप कर गई । ये देख दुकानदार उन बदमाशों को पकड़ने भागे। लोगों को अपनी ओर आते देख बदमाशों ने उन पर गोली चला दी... गनीमत रही कि गोली किसी को लगी नही... इतने में लोगों ने दोनों को धर दबोचा और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।
पूछताछ में लूटेरों ने अपने नाम सतनाम और करण सिंह बताया । इन दोनो ये भी बताया कि वे दोनों रिश्ते में बाप-बेटे हैं औऱ हमेशा मिलकर ही किसी लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। पुलिस ने इनके पास से तीन कारतूस औऱ एक देसी कट्टा के साथ एक मोटर साइकिल बरामद की है। इनके पास से एक ड्राइविंग लाइसेंस भी मिला है जो हरदीप सिंह के नाम से अंबाला से बना हुआ है।
पुलिस ने दोनों बदमाशों को कोर्ट में पेश की जहां से अदालत ने दोनों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब इनसे पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये लोग अब तक कितनी वारदात कर चुके है।

फर्जी आइपीएस

कुरूक्षेत्र पुलिस ने एक ऐसे शातिर को गिरफ्तार किया है जो खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों को ठगी का शिकार बनाता था। कमल ने के इस शख्स को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वो एक होटल मालिक से साठ हजार रूपये ऐंठकर भाग रहा था।
ये शख्स चेहरा छुपा रहा है... ये नही चाहता कि इसका असली चेहरा सबके सामने आए। जनाब कोई आम आदमी नही बल्कि आईपीएस अधिकारी है... हां ये बात और है कि पिहोवा पुलिस इन्हें फर्जी बता रही है। जी हां कुछ देर पहले तक ये जनाब खुद को आईपीएस अधिकारी ही बता रहा था इतना ही नही जब होटल कर्मचारियों से कहासुनी हुई तो होटल ही बन्द कराने की धमकी दे डाली। लेकिन साहब का रूतबा ज्यादा देर तक ना चल सका। साहब ने पिहोवा के होटल रोबिन डिलक्स में कमरा एक महिने के लिए किराए पर लिया था। इनका कहना था कि इन्हें इलाके में सर्वे कराना है जिसकी वजह से इन्हें एक महिने के लिए होटल मे ही ठहरना होगा। 500 रूपये प्रतिदिन से शुरू हुआ सौदा आखिरकार 275 रूपये पर आकर तय हो गया। अगले दिन जब होटल कर्मचारियों ने आईडी कार्ड की मांग की तो साहब गुस्सा गए। फिर तो खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर होटल को ही बन्द कराने की धमकी दे डाली। इसके बाद धमकी देकर साठ हजार रूपये एंठकर चलते बने। उसके जाने के बाद होटल संचालक ने सारी घटना अपने भाई को बतायी।तब उन्हे दाल में कुछ काला लगा तो इस शातिर को बस अड्डे के पास से पकड लिया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस की गिरफ्त मे आने के बाद इन फर्जी आईपीएस साहब की मानो सारी हेकडी निकल गई। पुलिस को पता चला की ये कोई आईपीएस अधिकारी नही है बल्कि फर्जी अधिकारी बनकर धन उगाही का काम करता था। पुलिस को जांच में पता चला की पहले भी कमल नाम का ये शातिर कई लोगों को इसी तरह ठगी का शिकार बना चुका है। पुलिस ने कमल के पास से होटल मालिक से वसूले गए 60 हजार रूपये भी इसके पास से बरामद कर लिए है अब पुलिस ये पता लगाने में लगी है कि इसने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

20 फ़रवरी 2010

तुम ना मत कहना

तुम मेरी ना हो सकी तो किसी की नही .. उस सिरफिरे आशिक ने उस लडकी को ये फरमान काफी पहले सुना दिया था। लेकिन जब बात इजहार-ए- मोहब्बत की आई तो वो इंसान नही हैवान बन गया। उसे ये नागवार गुजरा की उस लड़की ने उसकी मोहब्बत को ठुकरा दिया। वो इस कदर बौखलाया की उस लडकी को अपने दिल से ही नही दुनिया से रूख्सत करने की साजिश रच डाली। अब उस लडकी को मिली है मोहब्बत ना करने की खौफनाक सजा।
ये लड़की जिदंगी के लिए मौत से लड़ रही है... ये जीना चाहती है... मौत को हरा देना चाहती है। इस लडकी को इस हालात में पहुंचाने वाला है एक सिरफिरा शख्स.. जिसने इसकी जिदंगी को नासूर बना दिया है। ये सब हुआ इंकारे मोहब्बत में। जब इसने एक सिरफिरे आशिक की मोहब्बत को कुबूल नही किया तो वो हैवान बन गया। सबीना नाम की इस लडकी को जिंदा जलाने की कोशिश की गई... सबीना अस्सी फीसदी तक जल चुकी है। दरअसल सबीना अपने परिवार के साथ गाजियाबाद के हाफिज पुर में रहती थी... सबीना के पडोस में ही जमाल नाम का लडका रहता। जमाल ने सबीना को देखा तो उसकी चाहत में दीवाना हो गया। वो जब भी घर से निकलती जमाल की निगाहें उसी पर टिक जाती। जमाल सबीना को दिलो दिल चाहने लगा... जब भी जमाल सबीना को देखता उसके चेहरे पर मुस्कान खुद ब खुद आ जाती। लेकिन काफी वक्त बीत जाने पर भी अपनी मोहब्बत का इजहार ना कर सका। उसे तो बस इंतजार था ऐसे वक्त का जब अपनी मोहब्बत का इजहार कर सके। सबीना जब कभी जमाल की तरफ देखती जमाल को लगता वो भी उसे पसंद करती है। दिन बीतते गए... और फिर वो तारीख भी आ गई जिसका उसे बेसब्री से इंतजार था। वो तारीख थी सात फरवरी... यानि रोज डे। अपने प्यार का इजहार करने के लिए जमाल हाथ में गुलाब का फूल लेकर सबीना के घर पहुंचा।
जैसे ही जमाल सबीना के घर के अन्दर दाखिल हुआ उसके दिल की धडकने तेज होने लगी... आज तो वो दिन था जिसका जमाल को इंतजार था भला जमाल पीछे कैसे हट सकता था। उसके कदम आगे बढते गए... उसके हाथ में गुलाब था और दिल में प्यार कुबूल होने की ख्वाहिश। कुछ ही देर में सबीना उसके सामने आ गई। सबीना अपने घर में जमाल को देखकर चौंक गई। वो कुछ सोचती उससे पहले ही जमाल ने अपना हाथ आगे बढा दिया। और अपने दिल की बात आखिरकार बोल ही दी। सबीना मैं तुमसे प्यार करता हूं। कुछ देर तो सबीना जमाल को देखती रही... उसके बाद जो जवाब आया उसने जमाल को मानो पागल कर दिया हो। सबीना ने जमाल से कहा कि ये प्यार व्यार कुछ नही है बस पागलपन है तुम अपने काम पर ध्यान दो। मैं तुमसे मोहब्बत नही करती... अगर तुम मुझसे प्यार करते हो तो मैं क्या कर सकती हूं। तुम पागल हो चुके हो। ये सुनकर जमाल मानों सच मे पागल हो गया। उसने तैश में आकर पास रखे मिट्टी के तेल को उसपर उडेल दिया और आग लगा दी। सबीना को आग के हवाले करने के बाद जमाल मौके से फरार हो गया।
सबीना के पडोसियों ने जब उसकी चीख सुनी तो उसकी तरफ दौड पडे। सबीना बूरी तरह से झुलस चुकी थी। 80 फीसदी जली हालत में सबीना को अस्पताल मे भर्ती कराया गया जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों के मुताबिक जमाल पिछले तीन महीने से सबीना को परेशान कर रहा था। उन्होंने उसे समझाया भी लेकिन उसपर कोई फर्क नही पडा।
पुलिस को दिए बयान में सबीना ने साफ कहा है कि जमाल की मोहब्बत को ठुकराने की वजह से उसके साथ ऐसा किया गया है। सबीना के ब्यान और परिवार की शिकायत के बाद पुलिस ने जमाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस सरगर्मी से फरार जमाल की तलाश कर रही है।
सबीना मौत से लड रही है... लेकिन सिरफिरे की मोहब्बत को इनकार करने का इतना भयानक अंजाम होगा... उसने सोचा भी नही होगा। एकतरफा प्यार में जमाल ने ये खौफनाक कदम उठाने से पहले एक बार भी सोच लिया होता तो सबीना इस हालात में ना होती। हो सकता था सबीना आज नही तो कल जमाल की मोहब्बत को कुबूल भी कर लेती। लेकिन जमाल की इस हरकत से तो प्यार कम बल्कि हैवानियत ज्यादा दिखती है।

फरेबी हसीना

अहमदाबाद के एक शख्स को अपनी गाडी में लिफ्ट देना महंगा पड गया। उसने मदद के तौर पर एक लडकी को गाडी में लिफ्ट तो दी लेकिन वही लडकी उसके लिए मुसीबत का सबब बन गई। दरअसल वो लडकी मुसीबत में नही बल्कि वो ब्लैकमेलर थी। पुलिस ने उस फरेबी हसीना को गिरफ्तार कर लिया है, पुलिस को जांच में पता चला है कि इससे पहले भी वो कई लोगों को ब्लैकमेल कर चुकी है।
वो आपसे लिफ्ट मांगेगी
वो आपसे मदद की गुहार लगाएगी
आपसे मिठी बाते करेगी
अपनेपन का अहसास जताएगी
और फिर फांस लेगी
अपने हुस्न के जाल में
क्योंकि वो है....
फरेबी हसीना
जी हां कुछ यही फितरत है पुलिस गिरफ्त में आई इस हसीना की। ये आदमी को अपने हुस्न के जाल में कुछ इस कदर फंसाती है कि फिर निकलना आसान नही होता। ये ऐसा जाल फेंकती है कि शिकार खुद ब खुद उसमें फंस जाता है। और फिर बचने का एक ही रास्ता होता है... सौदा। सौदा ये हसीना खुद तय करती है... .ये अपने हिसाब से रकम वसूल करती है। .ये रकम होती है अपने जाल से आजाद से करने की।
अब ना जाने इसने कितनों को अपने हुस्न की जादूगरी में फांसकर चूना लगाया है। लेकिन इस बार इसे गांधीनगर के रहने वाले प्रहलाद नाम के शख्स को अपना शिकार बनाना महंगा पड गया। दरअसल प्रहलाद अपने कार से अहमदाबाद से गांधीनगर अपने घर जा रहे थे कि हाइवे पर इसने प्रहलाद से लिफ्ट मांगी । प्रहलाद ने इसे अकेला देखकर कार रोक ली। तब इसने उससे मदद के लिए कहा और बताया की आज वो लेट हो गई है। अगर प्रहलाद उसे लिफ्ट दे तो वो उसकी शुक्रगुजार होगी। प्रहलाद मदद के लिए तैयार हो गया.....गाडी अभी कुछ ही दूर पहुंची थी कि इसने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। पुलिस के मुताबिक इसने प्रहलाद से कहा कि इसे पचास हजार रूपये दे दे, वरना बलात्कार के आरोप में फंसा देगी।
लडकी के मुहं से ये सुनकर प्रहलाद परेशान हो गए। उसने पैसे देने के लिए हां भर दी। और सुभाष ब्रिज पर मिलने के लिए कहा। इसी दौरान प्रहलाद ने मामले की शिकायत पुलिस मे कर दी। अगले दिन तय जगह पर प्रहलाद लडकी से मिलने लिए पहुंचा उसके साथ पुलिस भी मौजूद थी। जब इसने प्रहलाद से पैसों की मांग की तो पुलिस ने इस शातिर को धर दबोचा
पुलिस को पुछताछ में पता चला है कि इसके साथ तीन लोग और मौके पर मौजूद थे जोकि पुलिस के आने की खबर मिलने के बाद मौके से फरार हो गए। पुलिस अब लिफ्ट लेकर लोगों को ब्लैकमेल करने वाली इस हसीना को तो गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को अब इसके साथियों की तलाश है।

विदेशी ठग

विदेश जाने के लिए वीजा दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का अहमदाबाद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के एजेंट विक्रम को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि गिरोह का सरगना एक एनआरआई है। पुलिस के मुताबिक गिरोह अभी तक अस्सी लाख की ठगी कर चुका है। गिरोह का कंसलटेंट मनीष पटेल नाम का शख्स अभी फरार है।
अहमदाबाद के असारवा इलाके का रहने वाला प्रत्युष विदेश में पढाई और नौकरी करना चाहता था। लेकिन उसकी ये ख्वाहिश अधुरी ही रह गई.. इतना ही नही अपनी ख्वाहिश पूरी करने के चक्कर में प्रत्युष ठगी का शिकार हो गया। प्रत्युष अपने बॉस के काम से रोजना सीजी.रोड पर ऑफिस में जाता था। जहाँ पर उसकी मुलाकात दीगीश नाम के शख्स से हुई। बातो बातो में दिगीश ने बताया की उसका साला विक्रम वीजा कंसल्टंसी का काम करता है प्रत्युष को विदेश जाकर पढ़ने और अच्छी नौकरी का सपना सच होता दिखने लगा। दीगीश की इस बातको ध्यान में रखते हुए प्रत्युष ने विक्रम से मिलाने की बात कही,और सितम्बर महीने में दिगीश ने दोनों की मुलाकात करा दी विक्रम ने अपनी पहली मुलाक़ात में प्रत्युष को प्रभावित करने के लिए बड़ी बड़ी बातें की और आसानी से उसे वीजा दिलाने का भरोसा दिलाया। प्रत्युष और उसके जीजाजी वल्लभ से 20 -20 हजार रुपये फाईल तैयार करवाने के नाम पर ले लिए इसके बाद विक्रम ने इनकी मुलाकात एक NRI मनीष पटेल से करवाई जो की इस वीसा कंसल्टंसी फर्म का मालिक था। मनीष ने प्रत्युष को बाते की उसे वीसा मिलाने से पहले पांच लाख रुपये देने होंगे , लेकिन प्रत्युष इसके लिए तैयार नहीं था। आखिर में विक्रम ने भरोसा दिलाने पर प्रत्युष और उसके जीजाजी ने दो-दो लाख रुपये मनीष को दे दिए
पैसे मिलने के बाद मनीष ने दोनों को अहमदाबाद के एक होटल में बुलाया और ऐम्बसी के अधिकारी मिस्टर ...दें... से उनकी मुलाकात करायी । उस समय दें ने इनसे अंग्रेजी में कुछ सवाल किये ,जिससे इनको भरोसा आ गया की मनीष उनका वीजा तैयार करा देगा इस मीटिंग के कुछ दिनों बाद इन्हें बडौदा बुलाया गया और वहां से दिल्ली भेजा जा गया। उस समय उन्हें पता चला की उनके जैसे और भी कई लोग है जिनको मनीष वीजा दिलवाने वाला है इस बात से मनीष पर उनका भरोसा बढ़ गया। लेकिन इन सभी को एम्बसी ऑफिस में इंटरव्यू करवाने के बहाने तीन दिनों तक रोका गया और उसके बाद इंटरव्यू नहीं होने पर उन्हें फिर से आने का लालच देकर वापिस भेज दिया गया दोनों को एक बार फिर से इंटरव्यू के लिए दिल्ली बुलाया गया लेकिन पहले की ही तरह इस बार भी कुछ नही हुआ। अब प्रत्युष को शक हुआ तो उसने पैसे वापिस करने के लिए कहा। लेकिन मनीष ने मना कर दिया। प्रत्युष और उसके जीजा ने इसकी शिकायत पुलिस को कर दी। पुलिस ने तफ्तीश की तो ठगी का पता चला। पुलिस ने जब इनके आफिस पर छापा मारा तो विक्रम पुलिस के शिकंजे में आ गया जबकि मनीष मौका पाकर फरार हो गया। जांच मे पता चला कि फार्म पर इन लोगों ने आफिस को जो पता दिया हुआ है वो फर्जी है। ठगी खुलासा होने के बाद से मनीष फरार है उसके मोबाइल फोन भी बन्द आ रहा है। चौंकाने वाली बात सामने आई है कि गिरोह का सरगना एनआरआई है जिसकी पुलिस अब तलाश कर रही है। प्रत्युष की विदेश जाकर पढने की ख्वाहिश तो पूरी ना हो सकी.. लेकिन उसकी शिकायत पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश जरूर हो गया है। पुलिस के मुताबिक इस गिरोह ने और भी कई लोगों को अपना शिकार बनाया है लेकिन वो अभी सामने नही आ रहे है। अब इस मामले में पुलिस गिरोह के फरार लोगों की तलाश कर रही है।

इनामी बदमाश ढेर

इंदौर पुलिस ने दस हजार के इनामी बदमाश मनोज सिंह को मुठभेड में मार गिराया। पुलिस को सूचना मिली थी कि मनोज अपने एक साथी के साथ होटल में छुपा हुआ है। पुलिस देखकर भागने की फिराक में रहे मनोज की एकांउटर में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक ढेड महीना पहले मनोज पेशी के दौरान चकमा देकर फरार हो गया था। पुलिस ने मनोज के पास से एक देसी कट्टा और एक पिस्टल बरामद की है।
हो गया दहशत का खात्मा... मारा गया बदमाश.. इंदौर पुलिस ने दस हजार के इनामी बदमाश मनोज सिंह को मुठभेड में मार गिराया। दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि मनोज अपने एक साथी के साथ इंदौर के एक होटल में मौजूद है। पुलिस ने टीम का गठन कर होटल की घेराबंदी की। इतने में मनोज को पुलिस आने की खबर लग गई। पुलिस से बचने के लिए उसने होटल से भागना ही बेहतर समझा। मनोज मोटर साइकिल से भाग निकला.. पीछा कर रही पुलिस पर भागते हुए फायरिंग कर दी। जवाबी फायरिंग में पुलिस ने आसा राम बापू चौक के पास पुलिस ने मनोज को अपना निशाना बना ही लिया। जिसमें उसकी मौत हो गई। जबकि उसका एक साथी फरार हो गया।
मनोज की पुलिस को सरगर्मी से तलाश थी उसपर छ डकैतियों समेत और भी कई आपराधिक मामले दर्ज है। पुलिस ने मनोज के पास से 3.2 एमएम की पिस्टल और एक देसी कट्टा बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक करीब ढेड महीने पहले पकडे जाने के बाद अदालत में पेशी के दौरान मनोज पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। तभी से मनोज की तलाश तेज कर दी गई थी।
देर से ही सही आखिरकार इंदौर मे दहशत का दुसरा नाम बन चुके मनोज सिंह का खात्मा हो ही गया। अब पुलिस को मनोज के फरार साथी की तलाश है। जो एकांउटर के बाद मौका पाकर फरार हो चुका है।

फोन पर अश्लील बातें करने पर की थी हत्या

मुझे दोबारा फोन मत करना... कुछ यही हिदायत थी एक कातिल की। लेकिन उसने फोन करना बन्द नही किया। अगर उसने ऐसा किया होता तो उसके कत्ल की खौफनाक दास्तां ना लिखी जाती। उसकी इसी गलती ने उस शख्स से जिदंगी छिन ली। उसका बार बार फोन करना ही उसके मौत की वजह बन गया।
तुम मुझे फोन क्यों करते हो.. अबकी बार फोन मत करना... तुम्हे समझ नही आता क्या.. तुम चाहते क्या हो.. ये बातें बार बार कहकर वो महिला परेशान हो चुकी थी.... इतनी परेशान की उसने अपने पति को सारी बता दी। महिला का पति ये बात सुनकर बोखला जाता है.. वो फिर वो रचता है कत्ल की खौफनाक साजिश ..
कत्ल की दिल दहला देने वाली ये दास्तां है अमृसर के रहने वाले हरबंस सिंह की। और इसकी इबारत लिखी है.. मनजिंदर नाम के शख्स ने। इस खौफनाक वारदात में इसका साथ दिया मनजिंदर की पत्नी गुरप्रीत कौर और उसके दोस्त बलविंदर ने। आरोप है कि तीनों ने मिलकर हरबंस सिंह का बेरहमी से कत्ल कर दिया। 3 नवम्बर 2009.... अमृतसर के कत्थूनंगल इलाके में खेतों से एक युवक की लाश बरामद हुई। उसके शरीर पर तेज धार हथियार से कई वार किये गए थे। पुलिस को शुरूआती जांच में पता चल गया कि मामला हत्या का है.. और लाश को ठकाने लगाने के मकसद से खेतों में फेंका गया है। लेकिन मरने वाला शख्स कौन है... ये बात जल्द ही लाश के पास मिले कुछ कागजात से साफ हो गई। पता चला कि लाश अमृतसर के रहने वाले हरबंस सिंह की है। लेकिन किसने किया हरबंस का खून। क्यों मारा गया हरबंस इन सवालों को लेकर पुलिस भी पशोपेश में थी। उस वक्त पुलिस ने लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। और इस बारे में हरबंस के परिजनों को जानकारी दी।
पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार था... रिपोर्ट आई तो पता चला कि हरबंस के शरीर पर तेज धार हथियार से कई वार किए गए थे। चोट के निशान से साफ था कि कातिल ने तैश में आकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस बारे में हरबंस के घरवालों से पुछताछ की... पुलिस को पता चला कि हरबंस की किसी से कोई दुश्मनी नही थी। फिर किसने और क्यों किया उसका कत्ल। पुलिस अब ऐसे मोड पर थी जहां से उसके पास सवाल के बदले सवाल ही लौटकर आ रहे थे। पुलिस कत्ल के इस सनसनीखेज मामले को सुलझाने के लिए हर सम्भव कोशिश कर रही थी। इसी दौरान पुलिस ने हरबंस सिंह के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाई। हरबंस सिंह के फोन की कॉल डिटेल देखकर पुलिस का माथा ठनका । वजह थी एक ही नंबर पर सैकंडों बार किए गए फोन कॉल... भला ऐसा कौन शख्स है जिसके नंबर पर हरबंस दिन में कई बार फोन करता था। अब पुलिस को तलाश थी उसी शख्स की। यहीं से पुलिस को कत्ल का मकसद और कातिल का सुराग मिलने की उम्मीद जगी। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि जिस नंबर पर हरबंस फोन करता है वो नंबर अमृतसर की ही रहने वाली एक महिला का है। महिला का नाम था गुरप्रीत कौर। पुलिस ने परिजनों से बात की तो उनकी जानकारी में गुरप्रीत नाम की कोई भी महिला हरबंस की जानकार नही थी। पुलिस के सामने बडा सवाल था कि महिला अगर हरबंस की जानकार नही है तो फिर क्यों हरबंस बार बार उसके नंबर पर फोन करता था... बस यहीं से पुलिस के हाथ कत्ल के सुराग लगना शुरू हो गया। पुलिस पुछताछ के मकसद से जब गुरूप्रीत के पास पहुंची तो उसने बताया कि हरबंस उसके पास अक्सर फोन करता था। वो उसे ऐसा करने से इंकार करती थी कई बार मना करने के बाद भी हरबंस नही माना। और फिर अचानक फोन आना बन्द हो गया।
गुरूप्रीत के बयान से पुलिस को दाल में कुछ काला दिखने लगा... जब गुरूप्रीत से कडाई से पुछताछ की गई तो वो टूट गई। और फिर सामने आई एक दिल दहला देने वाला खौफनाक दास्तां......
गुरूप्रीत ने जो कुछ पुलिस को बताया वो हैरतअंगेज था । गुरूप्रीत ने बताया की हरबंस का कत्ल एक सोची समझी साजिश से किया गया है। इस साजिश की वो अकेली किरदार नही है बल्कि इस खूनी खेल में दो और लोग शामिल है।
अमृतसर पुलिस हत्या के मामले को सुलझाने के बेहद करीब थी। बस कत्ल का मकसद साफ होना बाकि था। जब हकीकत सामने आई तो कत्ल की इस खौफनाक दास्तां ने हर किसी को सन्न कर दिया। गुरूप्रीत ने पुलिस को बताया कि वो अमृतसर की एक दुकान पर काम करती थी और वहीं पर बेटी की शादी के लिए सामान खरीदने के लिए हरबंस आया था। यही से दोनो में बातचीत हो गई। हरबंस और गुरूप्रीत में दोस्ती हो गई। बस फिर क्या था हरबंस रोज गुरूप्रीत को फोन करता उससे कई घंटो तक बात करता। लेकिन कुछ दिनों बाद गुरूप्रीत ने उसका फोन उठाना बंद कर दिया। ये देखकर हरबंस परेशान हो गया। ऐसे में जब भी गुरूप्रीत उसका फोन रिसीव करती वो उसके साथ अश्लील बातें करने लगता। गुरूप्रीत को ये बस पसन्द नही था। उसने कई बार हरबंस को मना भी किया। लेकिन वो भला कहां मानने वाला था। रोज रोज की परेशानी से तंग आकर गुरूप्रीत ने सारी बात अपने पति मनजिंदर को बता दी।
पत्नी की परेशानी सुनकर मनजिंदर बौखला गया... ऐसे में उसने रची एक खौफनाक साजिश। मनजिंदर ने अपनी पत्नी से कहा कि वो किसी तरह से हरबंस को घर बुला ले। 2 नवम्बर 2009 की दोपहर गुरूप्रीत ने हरबंस से मिलने की बात कही... गुरूप्रीत की ये बाते सुनकर हरबंस तुरंत उसके घर का पता लेकर मिलने के लिए आ गया। उसे नही मालूम था कि वो साजिश के तहत फंसने वाला है। घर पहुंचने के बाद गुरप्रीत ने उसे बैठने के लिए कहा... इतने में गुरप्रीत का पति भी घर आ गया.. उसके साथ एक दोस्त बलविंदर भी था। साजिश के तहत की तीनों हरबंस के साथ पहले तो कहासुनी हुई और फिर तीनों ने मिलकर तेज धार हथियार से वार कर हरबंस की हत्या कर दी। मनजिंदर उसपर तब तक वार करता रहा जब तक उसे हरबंस के मरने का यकीन ना हो गया। हरबंस के मरने के बाद तीनों ने लाश को ठिकाने लगाने के मकसद से खेतों में फेंक दिया।
.पुलिस ने हरबंस के कत्ल के इल्जाम में गुरूप्रीत उसके पति मनजिदंर और बलविंदर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक तीनों ने मिलकर हरबंस की हत्या की है। कत्ल की वजह थी हरबंस का गुरूप्रीत को फोन कर अश्लील बातें करना।
तीनों ने हरबंस के कत्ल की साजिश तो बेहद शातिराना रची थी लेकिन कहते है गुनाहगार कितना भी शातिर क्यों ना हो आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही जाता है। और वही इन तीनों के साथ भी हुआ..

बदमाश गिरफ्तार

भोपाल पुलिस ने शातिर गिरोह के सात बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बदमाशों को उस वक्त गिरफ्तार किया जब ये लोग डकैती की योजना बना रहे थे। पुलिस ने बदमाशों के पास से भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए है।
भोपाल पुलिस ने इन सात शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर एक बडी वारदात को होने से पहले नाकाम कर दिया। दरअसल ये बदमाश भोपाल में डकैती की वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। पुलिस को मुखबिर से मिली थी कि छह से सात संदिग्ध लोग इंडिका कार में घूम रहे है। पुलिस ने जानकारी मिलने के बाद एक टीम का गठन किया। टीम ने मौके पर पहुंच कर सभी सात लोगों को धर दबोचा। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में अवैध हथियार बरामद किए है। वारदात को अंजाम देने के लिए ये लोग कुल्हाडी से लेकर पिस्टल तक का इस्तेमाल करते थे। सभी बदमाश उत्तर प्रदेश के रहने वाले है।
पुलिस को पूछताछ में पता चला कि ये लोग एटीएम लूटने की फिराक में थे। गिरोह अपने पास नशीली दवाएं भी रखता था जिसका इस्तेमाल वारदात से पहले गार्ड को बेहोश करने के लिए किया जाता था। गिरोह का सरगना पवन नाम का शख्स है उसी ने सभी को अपने साथ शामिल किया था। हालांकि गिरोह के पुराने रिकॉर्ड के बारे में पुलिस फिलहाल तफ्तीश कर रही है। जांच में पता चला है कि राहुल नाम के एक बदमाश पर मथुरा में चांदी तस्करी का मामला दर्ज है।
गिरोह का सरगना पवन भोपाल की एक कीटनाशक कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटीव था। दिन में नौकरी करता और रात में डकैती, लूट की वारदात को अंजाम देता। हालांकि गिरोह का ये खेल ज्यादा दिन ही चल सका और बदमाश पुलिस के शिकंजे में आ गए।

जानलेवा फायरिंग


शादी में फायरिंग करना एक बार फिर जानलेवा बन गया। नोएडा में शादी के दौरान चलाई गई गोली से दुल्हे की मौत हो गई। फायरिंग दुल्हे के फूफा ने की थी। पुलिस ने आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया है।
चंद पलो में ही नोएडा के इस घर में मातम छा गया। खिलखिलाते चेहरों पर आंसू का सैलाब बहने लगा। थम गई शहनाई की गुंज। यहां हुई है एक शख्स की मौत। दरअसल इस घर में रेशमा की शादी थी... चारों तरफ खुश का माहौल था। पंकज अलीगढ के खुर्जा से शादी करने के लिए आया था। फेरों की रशम पूरी हो जाने के बाद विदाई की तैयारी चल रही थी। की अचानक किसी ने गोली चला दी। विदाई से पहले पैर छुने के लिए आ रहे पंकज को जा लगी। गोली पंकज के फूफा राजकुमार ने अपनी दुनाली बंदूक से चलाई थी।
गोली पंकज के सिर में लगी थी उसे गंभीर हालत में नोएडा के मैट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां कुछ देर बाद पंकज की मौत हो गई। डॉक्टर के मुताबिक सिर में गोली लगने की वजह से काफी खून बह चुका था और पंकज को बचाया नही जा सका। रेशमा के हाथों में मेहंदी का रंग अभी पूरी तरह से चढा भी नही था और उसके साथ इतना बडा हादसा हो गया। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी राजकुमार को गिरफ्तार कर लिया।
पूरे घर में मातम पसरा है दुल्हन बनी रेशमा गुमसुम है। ऐसा पहली बार नही हुआ है लेकिन शादी में फायरिंग कर अपना रूतबा दिखाने के लिए लोग किसी की जान की परवाह नही करते।

शराब और दौलत का सुरूर

जितना नशा शराब में होता है उससे कहीं ज्यादा नशा पैसे में होता है। जब नशा दोनों का हो तो फिर इंसान इंसान नही रहता व हैवान बन जाता है। उन छ रईसजादों पर दौलत का नशा तो पहले से था ही जब शराब का सुरूर चढा तो वो हैवान बन गए। उनकी गाडी रोकने की एक दरोगा ने गुस्ताखी क्या की... दरोगा को ही रौंद डाला। ऐसा एक बार नही बल्कि दरोगा को खत्म करने के लिए तीन बार गाडी चढाई गई।
जान पिटर जिदंगी के लिए मौत से लड रहे है। इनकी इस हालत के लिए जिम्मेदार है ये लडके। दरअसल रात वक्त चेकिंग के दौरान नशे में धुत इन रईसजादों ने एसआई पर मारुति कार चढ़ा दी। एसआई को जान से मारने की नीयत से तीन बार टक्कर मारी गई। जान पीटर को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। उसके दोनों पैरों और एक हाथ की हड्डी टूट गई है और कई जगह गंभीर चोटें आई हैं।
दरअसल फरीदाबाद के तिगांव में रहने वाले परवीन, संजीव, कपिल, योगेश, बुधराम और प्रमोद बरात में जाने के लिए एक रिश्तेदार के घर ठहरे थे। आरोप है कि बुधवार शाम इन सभी ने जमकर शराब पी और हंगामा करने लगे। सूचना मिलने पर पुलिस उन्हें पकड़कर कासना कोतवाली ले आई। बाद में इन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। ये सभी तीन गाड़ियों में सवार होकर कोतवाली से निकले। कोतवाली से निकलते ही अथॉरिटी गोलचक्कर पर चेकिंग कर रही पुलिस ने इन्हें रोक लिया। एसआई जॉन पीटर ने इनसे गाड़ी की आरसी दिखाने को कहा। आरोपियों ने बताया कि वे कोतवाली से छूटकर आए हैं और एक शादी में शरीक होने जा रहे हैं। इसके बाद भी जब जॉन पीटर नहीं माना तो आरोपी हॉकी और रॉड लेकर गाड़ी से बाहर आ गए और गाली-गलौज करने लगे। बात बढ़ने पर एक आरोपी ने मारुति कार स्टार्ट की और एसआई की बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। आरोप है कि एसआई को जान से मारने की नीयत से आरोपी ने उस पर तीन बार कार चढ़ाई।
वारदात को अंजाम देने के बाद सभी मौके से फरार हो गए। वारदात को अंजाम देने वाले आठ लोग थे जिनमें से पुलिस ने छ को गिरफ्तार कर लिया है। दो लोग अभी फरार है पुलिस उनकी भी तलाश कर रही है। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है। ऐसा पहली बार नही हुआ है कुछ दिनों पहले ही दिल्ली में एक शख्स ने ट्रेफिक पुलिस के हेड कांस्टेबल को अपनी कार से रौंद डाला था। इन घटनाओं से साफ है कि नशे में इंसान किस कदर हैवान बन जाता है कि उसे इंसानी जान की कोई कीमत नही दिखती।

सुपारी किलर गिरफ्तार

उनके लिए इंसानों की जान की कोई कीमत नही होती थी। कुछ रूपयों की खातिर किसी का भी कत्ल करने में वो पीछे नही हटते थे। लेकिन अब वो सुपारी किलर पुलिस गिरफ्त मे आ चुके है। अभी तक की जांच में पता चला है कि ये लोग अब तक चार हत्या कर चुके है। एक कत्ल के लिए एक से ढेड लाख रूपये वसूल करते थे।
नकाब के पीछे छिपे ये वो खौफनाक चेहरे हैं...जिनके लिए इंसानी जान की कीमत महज चंद रुपये है। पैसो की खातिर किसी का कत्ल करने में ये लोग पल भर भी नही लगाते थे। लेकिन अब ये पुलिस गिरफ्त में आ चुके है। दोनों ने पुलिस के सामने कई दिल दहला देने वाले खुलासे किये है। दिनेश कुमार तिवारी औऱ रवि प्रकाश गुप्ता... इनके अपराध की कहानी सुनेंगे तो आपके पैरों तले जमीन ही खिसक जाएगी। दिनेश और रवि ये दोनों सुपारी किलर हैं....पैसे लेकर लोगों की हत्या करना इनका पेशा है...या फिर यूं कहे कि इनके सामने इंसानी जान की कीमत कुछ भी नहीं। जौनपुर एसओजी की टीम इनकी तलाश कर रही थी। गाडियों की चैकिंग के दौरान ये लोग पुलिस के शिकंजे में आ गए। पुलिस ने इनके पास से वारदात में इस्तेमाल पिस्टल और जिंदा कारतूस भी बरामद किए है।
दोनों ने पुलिस के सामने चौंकाने वाले खुलासे किए है। दरअसल ये लोग कुछ रसूखदार लोगों के इशारे पर हत्या की वारदात को अंजाम देते थे। किसी की हत्या करने के एवज में ये लोग एक से ढेड लाख रूपये लेते थे। इन लोगों ने पहली बार साल 2003 में हत्या की वारदात को अंजाम दिया था उसके बाद ये लोग अब कर चार लोगों की हत्या कर चुके है। जिनमें तीन राजस्थान और एक वारदात को लखनऊ में अंजाम दिया गया। दोनों कॉलेज के वक्त से ही इस धंधे में आ गए थे।
इन लोगों ने एक बार गुनाह की दुनिया में आने के बाद दोबारा पीछे मुडकर नही देखा। पैसो की खातिर ये लोग वारदात को अंजाम देते रहे। हालांकि हत्या की वारदात में इनके कुछ साथी भी शामिल रहे है। जिनकी पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है।

मासूम का दर्द

जबलपुर में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। खुद को मासूम बच्ची का मौसा कहने वाले एक शख्स ने बच्ची पर खूब जुल्म किए। पडोसियों को जब इसकी भनक लगी तो मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने मासूम बच्ची को छुडा लिया है और इस मामले में आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया है।
इमोशनल म्यूजिक से शुरू करें(दस सैकेंड के लिए)... तीन साल की इस मासूम को ठीक से रिश्तों के मायने भी नही मालूम.. इसे तो प्यार और दुलार की जरूरत है। छोटी सी उम्र में इसने अपनों के जुल्मों को सहा है। इस मासूम पर हुए जुल्मों की कहानी चोट के ये निशान खुद ब खुद गवाही दे रहे है। इसका जब रिश्तों की कडवी हकीकत से सामना हुआ तो इंसानियत भी शर्मसार हो गई। इस पर जुल्म किए है रिश्तें में मौसा लगने वाले इस शख्स ने जो इसे दो साल पहले अपने साथ लाया था। इस मासूम का नाम है तमन्ना.. तमन्ना की कहानी जितनी दर्दनाक है उतनी ही खौफनाक भी। दो साल तक इस मासूम ने जो दर्द सहा है उसे सुनकर कोई भी सिहर उठे।
तमन्ना की ये दर्दनाक कहानी आज से दो साल पहले शुरू हुई थी। तमन्ना अपने मां और पिता के साथ झांसी में रहती थी। लेकिन एक हादसे में किस्मत ने इससे मां-बाप का प्यार हमेशा के लिए छिन लिया। तमन्ना अकेली थी उस वक्त इसे नही मालूम था कि कौन अपना और कौन पराया है। जिसने इसके सिर पर पल भर के लिए हाथ रखा उसे को इसने अपना समझ लिया। इसके लिए तो उस वक्त रिश्तों का कोई मतलब नही था। बस जरूरत थी एक गोद की.. एक सहारे की.. एक अंगुली की जिसे पकडकर ये चलना चाहती थी। तमन्ना को सहारा दिया दूर के रिश्तें में मौसा लगने वाले शख्स मो. कदीर ने। कदीर तमन्ना को जबलपुर ले आया। और फिर इस मासूम के साथ शुरू हुआ प्यार जगह जुल्म का सिलसिला। ये तमन्ना की किस्मत है कि वो बोल नही सकती। शायद ये बोल सकती तो अपने उपर हुए जल्मों की खौफनाक दास्तां ये खुद बयां करती। तमन्ना के साथ कदीर आए दिन मारपीट करने लगा। वक्त पर उसे खाना तक नही दिया जाता। हद उस वक्त हो गई जब दो दिन तक तमन्ना भूखी रही और जब उसने खाना मांगा तो मुंह में चुना भर दिया गया। तमन्ना चीखती चिल्लाती लेकिन सुनने वाला कोई नही होता.. उसकी खामोश आवाज दिवारों से टकराकर कमरे में कैद हो जाती। कहते है सब दिन एक जैसे नही होते... ऐसा ही कुछ तमन्ना के साथ भी हुआ.. उसके साथ मारपीट का सिलसिला बददस्तूर जारी था। एक दिन पडोसी ने कदीर को तमन्ना के साथ मारपीट करते हुए देख लिया तो मामले की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने बच्ची को छुडाया तो सामने आई रिश्तों की खौफनाक दास्तां। हालांकि अपने उपर लग रहे आरोपो को कदीर और उसकी पत्नी इंकार कर रहे है। उनके मुताबिक बच्ची की ये हालत सडक हादसे में हुई। लेकिन हकीकत सामने हो तो फिर मुहं नही फेरा जाता। तमन्ना के शरीर पर चोट के निशान उसकी साथ हुई ज्यादती के गवाही खुद ब खुद दे रहें है।
पुलिस के मुताबिक जब बच्ची को छुडाया गया उसके शरीर पर चोट के निशान थे.. जिन्हे देखकर लगता है कि बच्ची को जलाया गया था। तमन्ना के मुंह में चुना भी भरा हुआ था। क्या ये सब कम है किसी मासूम पर हुए जुल्मों की तस्दीक करने के लिए। फिलहाल पुलिस ने कदीर और उसकी पत्नी के खिलाफ मासूम को प्रताडित करने का मामला दर्ज कर लिया है।
तमन्ना पर हुए जुल्मों की इस दर्दनाक दास्तां ने इंसानी रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। तमन्ना रिश्तों के मायने ना समझते हुए भी जिस कदीर में अपनापन तलाशती रही वहीं उसकी जिदंगी का नासूर बन गया। खैर गुनाह का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है। जो कुछ कदीर और उसकी पत्नी ने तमन्ना के साथ किया उसके सजा अब कानून देगा।