29 जून 2010

हाथ लगा हथियार

अशोक विहार ऑनर किलिंग केस में अब कडियां जुडने लगी है। जांच के दौरान वारदात में इस्तेमाल हथियार पुलिस ने बरामद कर लिया है। पुलिस ने पिस्टल को ऋषिकेश से बरामद किया है। दो बहनों और बहनोई की हत्या मामले में तीन आरोपियों को गढमुक्तेश्वर से गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि हथियार को गंगा में फेंक दिया है। इस तिहरे हत्याकांड में पिस्टल पुलिस के लिए एक अहम सबूत है।
तीन घंटे, तीन कत्ल और तीन आरोपी। इस तिगड़ी ने दिल्ली पुलिस को पसीना पसीना कर दिया। लेकिन इस तिहरे हत्याकांड में अब दिल्ली पुलिस के हाथ अहम सुराग लग गये है। पुलिस ने मोनिका, कुलदीप और शोभा की हत्या में इस्तेमाल पिस्टल को ऋषिकेश से बरामद किया है। गढमुक्तेश्वर से गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपी मंदीप, अंकित और निक्कू को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया था। उसके बाद पुलिस आरोपी को लेकर देहरादून, और ऋषिकेश गई। दरअसल गाजियाबाद पुलिस को तीनों ने बताया था कि वारदात के बाद तीनों इन जगहों पर ठहरे थे।
गिऱफ्तारी के बाद तीनों ने बताया था कि वारदात में इस्तेमाल हथियार को गंगा नदी में फेंक दिया था। ऐसे में पुलिस के लिए हथियार बरामद कर पाना बेहद मुश्किल था लेकिन जिस तरह से पुलिस गिरफ्त में आने के बाद आरोपी अंकित ने खुद को कातिल साबित करने की चुनौती पुलिस को दी थी। उससे हथियार को लेकर पुलिस का शक गहराने लगा था। आखिरकार हथियार मिलने के बाद इस मामले में पुलिस पक्ष मजबुत दिख रहा है। फिलहाल पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अब पुलिस को साबित करना है कि इसी पिस्टल से मोनिका, कुलदीप और शोभा की हत्या की गई थी।
ऑनर किलिंग के तीनों आरोपियों को एक जुलाई को रोहिणी कोर्ट में पेश किया जाना है। ऐसे में पुलिस के हाथ पिस्टल तो लग गया है। लेकिन आरोपियों के कपडों और अन्य सबूतों की तलाश जारी है।

जिंदा हूं मैं

वो मरकर भी जिंदा है.. और जिंदा होकर भी मरा हुआ। परिवार भी उसका दाहसंस्कार कर चुका है। ये अजीबो गरीब दास्तां है पंजाब के एक शख्स की। जो दुनिया के नजरों में मर चुका है। लेकिन दिल्ली पुलिस ने मर चुके युवक का सारा खेल उसे जिंदा पकड कर बिगाड दिया
एक बार जिसे मौत ने अपना लिया.. वो फिर कभी वापिस नही लौटा.. लेकिन एक शख्स ऐसा भी है जिसने मौत को मात दी। वो मरकर भी लौट आया है। मौत को मात देकर भी से जिंदा होने वाला ये है कर्मा अग्रवाल.. जिसके पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मौत हो चुकी है। इसके परिवार ने बाकायदा अंतिम संस्कार भी कर दिया है। लेकिन जो खेल इस शातिर ने खेला उसे दिल्ली पुलिस ने बिगाड दिया है। पुलिस को जब 22 जून को भलस्वा डेरी नाले से युवक को शव मिला। शव की पहचान कर्मा अग्रवाल के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक कर्मा अग्रवाल ने अपने साथी सत्यपाल से साथ मिलकर किसी अनजान युवक की हत्या कर उसे अपने कपडे पहना दिये। और उसमें अपने फोटो और पहचान पत्र भी रख दिया। शव की कर्मा की पत्नी ने पहचान की।
कर्मा ने शातिराना जाल बुना था जिसमें ये खुद ही फंस गया। कर्मा अग्रवाल मुलरूप से पंजाब का रहने वाला है। और इसपर एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मुकदमे दर्ज है। बस इन्हें से बचने के लिए कर्मा ने ये साजिश रची थी। पुलिस के मुताबिक कर्मा ने अपने साथी के साथ मिलकर अनजान युवक की हत्या की। शव को जलाकर को भलस्वा डेरी नाले में फेंक दिया। पुलिस ने लाश बरामद होने और फिर उसकी पहचान हो जाने के बाद मामले में हत्यारे की तलाश शुरू की। लेकिन कोई सुराग हाथ नही लगा.. इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली की जिस कर्मा अग्रवाल की हत्या का मामला पुलिस ने दर्ज किया है वो जिंदा है और भलस्वा डेरी इलाके में ही रह रहा है। पुलिस ने टीम का गठन किया और भलस्वा से कर्मा को धर दबोचा।
खुद को आरोपो से बचाने के लिए कर्मा ने साजिश तो शातिराना चली थी। उसमें कामयाब भी हो गया लेकिन गुनाह के निशान मिटने नही और ये शातिर अपने साथी के साथ पुलिस गिरफ्त में आ गया। हालांकि अभी तक उस शव की पहचान नही हो सकी है जिसको कर्मा और उसके साथी ने मारा था।

26 जून 2010

इज्जतदार कातिलों को पुलिस रिमांड

इज्जत के नाम पर बहनों को मौत देने वाले तीन भाईयों को रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। यूपी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गढमुक्तेशवर से गिरफ्तार किया था। आरोपी मंदीप, अंकित और निक्कू पर दो बहनों और बहनोई की हत्या का आरोप है।
इज्जत की दुहाई देकर बहनों को मौत देने वाले मंदीप, अंकित और निक्कू को रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने अदालत से तीनों को दस दिन के रिमांड की मांग की थी। लेकिन अदालत ने तीनों को पांच दिन की पुलिस रिमांड दी। पुलिस ने दलील दी कि पूछताछ कर वारदात से संबधित अहम सुराग जुटाने है। याद रहे कि अभी तक पुलिस के हाथ वारदात में इस्तेमाल किया गया पिस्टल भी नही लगा है। तीनों पर मोनिका, कुलदीप और शोभा की हत्या का आरोप है। 20 जून को दो बहनों और बहनोई की हत्या के बाद से तीनों फरार चल रहे थे। और यूपी पुलिस ने चैंकिंग के दौरान इन्हें गढमुक्तेश्वर से गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने शुक्रवार को रोहिणी कोर्ट से इन तीनों का प्रॉडक्शन वॉरंट जारी कराया। हालांकि, कानूनन दिल्ली पुलिस इन तीनों को गुरुवार रात में ही बगैर ट्रांजिट रिमांड या प्रॉडक्शन वॉरंट लिए भी दिल्ली ला सकती थी। सरकारी वकील ने दी कि पीड़ितों को ठिकाने लगाने के लिए गहरी साजिश रची गई जिन्होंने अपने परिवारों की इच्छा के विपरीत शादियां कीं। अभियुक्तों को उकसाने वाले और साजिशकर्ताओं के नामों का भी पता लगाया जाना है। वारदात में इस्तेमाल पिस्टर और आरोपियों के कपड़ों जैसी अन्य सामग्री अभी बरामद की जानी बाकी है और इस उद्देश्य के लिए पुलिस को उन्हें देहरादून तथा ऋषिकेश ले जाना होगा।
अब दिल्ली पुलिस के पास महज पांच दिन है। अभी तक पुलिस के हाथ परिस्थिजन्य साक्ष्य ही मौजूद है। पुलिस के पास अभी तक कोई चश्मदीद गवाह नही है जिसने हत्या होते हुए देखा हो। ऐसे में तीनों को मोनिका, कुलदीप और निक्कू का कातिल साबित पुलिस के लिए मश्किल भरा हो सकता है।

ममता और मोहब्बत

क्या कोई मां अपने जिगर के टुकडे को खुद से अलग कर सकती है। जवाब देना थोडा मुश्किल होगा। लेकिन लुधियाना में एक मां ऐसी भी है। जिसने आशिक के लिए अपने बच्चे को सड़क किनारे फेंक दिया। लेकिन अब वो बेरहम मां पुलिस गिरफ्त में है। इस मासूम की गुनाहगार इसकी मां है। जिसने जन्म दिया और फिर खुद से हमेशा के लिए जुदा करने की तैयारी कर ली। इस मासूम को इसी की मां ने यमुनानगर में सड़क किनारे फेंक दिया। वजह थी मोहब्बत... ममता मोहब्बत के सामने हार गई और इसकी मां वीना इसे छोडकर अपने आशिक के साथ फरार हो गई। सूरज के गायब होने की जानकारी उसके पिता शिवकुमार ने पुलिस को दी। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच की तो सूरज मिल गया। उसके बाद वीना भी घर लौट आई अब वो अपने बच्चे को पाने के लिए थाने के चक्कर काट रही है।
दरअसल वीना एक कंपनी में काम करती थी। वहीं काम करने वाले मनोज से उसको प्रेम हो गया। दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन ये मासूम दोनों के बीच दीवार बना हुआ था। बस इसी लिए वीना ने सूरज को सड़क किनारे फेंक दिया और मनोज के साथ भाग गई। लेकिन जब पुलिस ने मनोज के भाई से पूछताछ की तो सारा राज खुल गया और दोनों पुलिस गिरफ्त में आ गए।
अब वीना बच्चे को पाने के लिए नई दलीलें दे रही है। वहीं पुलिस ने मासूम सूरज को बालभवन में रखा है। लेकिन इस घटना ने ममता को शर्मसार कर दिया।

24 जून 2010

गिरफ्त में जालिम भाई

दिल्ली ऑनर किलिंग मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। दो बहन और बहनोई को मौत के घाट उतारने वाले अंकित, मंदीप और निक्कू को यूपी पुलिस ने गढमुक्तेश्वर से गिरफ्तार कर लिया। तीनों को वाहन चैकिंग के दौरान गिरफ्तार हुई। पुलिस ने उस आई टेन कार को भी बरामद कर लिया है जिसमें तीनों फरार हुए थे।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि 20 जून को सबसे पहले मंदीप की बहन शोभा को शाम करीब साढे छह बजे अशोक विहार फेज एक में बुलाया था। जिसके बाद उसकी कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसके बाद मोनिका के पति कुलदीप को वारदात वाली जगह फोन करके बुलाया गया। वहीं पर कुलदीप की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। दो कत्ल करने के बाद तीनों मोनिका के घर पहुंचे और वहां पर मोनिका की भी गोली मारकर हत्या कर दी।
तीन दिन मे हुई तीन हत्याओं से परेशान दिल्ली पुलिस ने जांच की तो पता चला कि अंकित, मंदीप और निक्कू लापता है। पुलिस ने तीनों की सरगर्मी से तलाश शुरू की। पुलिस ने तीनों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया। पूछताछ में इन्होंने बताया कि गांव में बदनामी की वजह से इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। लेकिन पुलिस गिरफ्त में आने के बाद ये खुद को बेकसूर बता रहे है। खुद सुन लिजिए क्या कहना है जल्लाद भाईयों का।
मोहब्बत के ये कातिल अब भी अकड में है। यहां तक की पुलिस को खुद को कातिल साबित करने की चुनौती दे डाली। पुलिस को अभी तक वारदात में इस्तेमाल पिस्टल नहीं मिली है।

20 जून 2010

डिमोलेशन का डर

दिल्ली में अवैध कॉलोनियों में निर्माण कार्य को ढहाने के लिए सरकार सख्त हो गई है। आए दिन कहीं ना कहीं डिमोलेशन किया जा रहा है। डिमोलेशन का डर लोगों को इतना सताने लगा है कि वो खुदकुशी करने को मजबूर हो गए है। ऐसा है सनसनीखेज मामला सामने आया है बाहरी दिल्ली के नरेला इलाके में जहां एक शख्स ने घर टूटने के डर से आत्मदाह कर लिया। परिजनों के मुताबिक कल मंगलवार को गौतम कॉलोनी में तोडफोड होने वाली थी जिसके डर से सोमपाल ने ये कदम उठाया। सोमपाल की पत्नी के मुताबिक कुछ दिन पहले भी तोडफोड दस्ता पहुंचा था लेकिन किसी तरह हाथ पैर जोडकर उन्होंने घर को बचा लिया। लेकिन मंगलवार को होने वाले डिमोलेशन को लेकर सोमपाल टेंशन में था। कई साल पहले मेहनत मजदूरी करने वाले सोमपाल ने पचास गज का प्लाट खरीदा था और उसके टूटने के डर से उसने खुद को आग लगा ली। सत्तर फीसदी झुलसी हालत में सोमपाल को राजा हरिशचन्द्र अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसने दम तोड दिया। अब पूर्ण देवी को चिता है कि उसके चार बच्चों का क्या होगा।

17 जून 2010

अस्पताल में मिले हथियार

एंकर... दिल्ली के नामी अस्पताल संजय गांधी ममोरियल अस्पताल में अवैध हथियार मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ये हथियार गार्ड ऑफिस के लॉकर से बरामद हुए है। जिनमें चार पिस्टल, दो चाकू और 75 जिंदा कारतूस है। पुलिस ने इस सिलसिले में राकेश, दीपक और सत्यरंजन नाम के तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि दो लोगों की तलाश कर रही है। इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ जब पुलिस मंगोलपुरी में चार दिन पहले हुए ओमप्रकाश नामक युवक की हत्या की तफ्तीश कर रही थी। जब जांच के सिलसिले में पुलिस अस्पताल के गार्ड ऑफिस में पहुंची तो तलाशी के दौरान हथियार बरामद हुए। हथियार मिलने के बाद अस्पताल में हडकंप मचा हुआ है।