मुजफ्फरपुर के इस घर के अंदर... सुबह जब लोगों की नजर गई तो उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई....लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक ऐसा क्या हुआ जिसने विश्वविद्यालय के कर्मचारी कुमार परिवेश की भरी पूरी दुनिया ही उजाड़ दी.... ..कमरों में जहां तहां पड़े गोलियों के खोल, बिखरे खून और लाशों की ढेर देखकर लग रहा था कि अपराधियों ने यहां किस कदर मौत का खूनी खेल खेला था......कुमार परिवेश के पूरे परिवार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी....घर में सो रहे किसी भी शख्स को अपराधियों ने नही बख्शा... फिर चाहे वो बच्चे हो या फिर घर के ही नौकर..., पड़ोसी के मुताबिक रात के 3 बजे उन्होने इस घर से गोलियों की आवाज़ सुनी थी...लेकिन किसी ने इसे इतनी गंभीरता से नही लिया....
बाद में लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को भी दी....पुलिस मौके पर पहुंची और तफ्तीश में जुट गई,,,,पुलिस के मुताबिक घर में परिवार के चार सदस्यों के अलावा हत्यारों ने दो नौकरों को भी मौत के घाट उतार दिया....आखिर इस वारदात को अंजाम देने के पीछे हत्यारों का मकसद क्या था...इसकी जानकारी अभी तक नहीं हो पाई है...वहीं पुलिस..इस वारदात में किसी करीबी का हाथ होने से भी इंकार नही कर रही है...
शनिवार देऱ रात हुए इस हत्याकांड पर पुलिस के हाथ अभी तक खाली है...अपराधियों ने ऐसा कोई भी सुराग नहीं छोड़ा है जिसके जरिए उन तक पहुंचा जा सके....हालांकि पुलिस इसे रंजिशन हत्या के नजरिए से देखते हुए कुमार परिवेश के नजदीकी लोगों के पूछताछ शुरु कर दी है......वही इस वारदात के बाद से पूरे इलाके में दहशत का महौल है...लोग जल्द से जल्द मौक के दरिंदों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं
05 जुलाई 2010
ये कैसी मोहब्बत
किसी से प्यार करना जितना आसान है उसे मुकाम तक पहुंचाना और निभाना उतना ही मुश्किल। अमृतसर की एक लड़की को प्यार करने की सजा ऐसी सजा मिली.. जिसने उसकी जिंदगी तबाह कर दी। वो इंसाफ चाहती है.. उसे धोखा उस लड़के ने दिया जिसने जिदंगी भर साथ निभाने का वादा किया था। लेकिन अपनी हवस मिटाने के बाद उसने लड़की को दर-दर भटकनें के लिए छोड दिया।
इस कुंए से पुलिस को एक बच्चे को निकालना है।.. इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। पुलिस को तलाश है एक नवजात बच्चे की। लेकिन आपको हैरानी होगी ये जानकार की उसका ना कोई नाम है.. ना ही पहचान। उसकी तो उम्र ही चंद घंटे है। आखिर कुछ कुछ घंटे की जद्दोजहद के बाद पुलिस ने नवजात बच्चे को निकाल लिया लेकिन वो लाश में तब्दील हो चुका था। मासूम को मौत देने वाला कोई और नही बल्कि उसकी मां है। जिसने जन्म देने के बाद ही उसे मरने के लिए कुंए मे फेंक दिया। अस्पताल में भर्ती इसी लड़की ने मासूम को मौत दी है। रीता के पिता के मुताबिक सुबह उन्होनें घर के बाहर शोर सुना तो बाहर निकल कर देखा। पता चला की रीता बच्चे को कुएं में फेंक कर आ रही है। ऐसा उसने प्यार में मिले धोखे के बाद किया।
रीता की कहानी बेहद दर्दनाक है। रीता राहुल नाम के एक लडके से प्यार करती थी। उस लड़के ने शादी का वादा किया और रीता के साथ शारारिक संबंध बनाए। प्यार में मुकाम पाने के लिए रीता ने उसके सामने खुद को सौंप दिया। छ महीने बाद जब राहुल को इसके गर्भवती होने का पता चला तो शादी से इनकार कर दिया। ऐसे में रीता के पास कोई रास्ता नही था.. वो बच्चे को जन्म देना नहीं चाहती थी। बच्चे के जन्म के बाद लोक लिहाज और परिजनों की इज्जत की खातिर उसने उसे पैदा होते ही कुंए में फेंक दिया।
पुलिस ने नवजात के शव को कुएं से निकाल कर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में जो भी कानून कार्रवाई होगी आरोपियों के खिलाफ की जाएगी। हालांकि राहुल की मां अपने बेटे पर लगे आरोपों को निराधार बता रही है। उसका कहना है कि उसका बेटा ऐसा नही कर सकता।
रिता ने राहुल के साथ अपने रिश्तों को प्यार समझा.. लेकिन राहुल की नजर में ये सिर्फ जिश्मानी रिश्तें के अलावा कुछ नही था। ऐसे में सवाल है कि उस मासूम की क्या गलती जिसे जन्म से पहले ही मौत दी गई।
इस कुंए से पुलिस को एक बच्चे को निकालना है।.. इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। पुलिस को तलाश है एक नवजात बच्चे की। लेकिन आपको हैरानी होगी ये जानकार की उसका ना कोई नाम है.. ना ही पहचान। उसकी तो उम्र ही चंद घंटे है। आखिर कुछ कुछ घंटे की जद्दोजहद के बाद पुलिस ने नवजात बच्चे को निकाल लिया लेकिन वो लाश में तब्दील हो चुका था। मासूम को मौत देने वाला कोई और नही बल्कि उसकी मां है। जिसने जन्म देने के बाद ही उसे मरने के लिए कुंए मे फेंक दिया। अस्पताल में भर्ती इसी लड़की ने मासूम को मौत दी है। रीता के पिता के मुताबिक सुबह उन्होनें घर के बाहर शोर सुना तो बाहर निकल कर देखा। पता चला की रीता बच्चे को कुएं में फेंक कर आ रही है। ऐसा उसने प्यार में मिले धोखे के बाद किया।
रीता की कहानी बेहद दर्दनाक है। रीता राहुल नाम के एक लडके से प्यार करती थी। उस लड़के ने शादी का वादा किया और रीता के साथ शारारिक संबंध बनाए। प्यार में मुकाम पाने के लिए रीता ने उसके सामने खुद को सौंप दिया। छ महीने बाद जब राहुल को इसके गर्भवती होने का पता चला तो शादी से इनकार कर दिया। ऐसे में रीता के पास कोई रास्ता नही था.. वो बच्चे को जन्म देना नहीं चाहती थी। बच्चे के जन्म के बाद लोक लिहाज और परिजनों की इज्जत की खातिर उसने उसे पैदा होते ही कुंए में फेंक दिया।
पुलिस ने नवजात के शव को कुएं से निकाल कर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में जो भी कानून कार्रवाई होगी आरोपियों के खिलाफ की जाएगी। हालांकि राहुल की मां अपने बेटे पर लगे आरोपों को निराधार बता रही है। उसका कहना है कि उसका बेटा ऐसा नही कर सकता।
रिता ने राहुल के साथ अपने रिश्तों को प्यार समझा.. लेकिन राहुल की नजर में ये सिर्फ जिश्मानी रिश्तें के अलावा कुछ नही था। ऐसे में सवाल है कि उस मासूम की क्या गलती जिसे जन्म से पहले ही मौत दी गई।
कत्ल में छुपा कत्ल का राज
बीवी का बेरहमी से कत्ल करने के बाद.. वो घर चैन से नही रह सका। उसे नींद नही आ रही थी..उसे अपने गुनाह का अहसास जो हो रहा था.. पछतावा हो रहा था बीवी के कत्ल का। बस इसलिए वो इबालिया जुर्म के लिए थाने पहुंच गया। पुलिस ने भी चंद घंटे में कातिल गिरफ्त में आ जाने के बाद राहत की सांस ली। लेकिन इस कत्ल में छुपी थी एक गहरी साजिश.. क्योंकि तो पिक्चर अभी बाकी थी।
कर्मबीर.. वो शख्स जिसने चंद मिनटों में ही दे दी पत्नी को मौत .. बेरहमी से कर दिया उसका कत्ल। पुलिस को कापसहेडा के भरथल गांव में हुई अंजु की हत्या की गुत्थी को सुलझाने में ज्यादा वक्त नही लगा। कत्ल के कुछ देर बाद ही कातिल पुलिस की गिरफ्त में था। अंजु का कत्ल कर्मबीर ने किया था। पत्नी की हत्या करने के बाद कर्मबीर ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी पुलिस गिरफ्त में था.. और कत्ल का मकसद भी साफ हो चुका था। लेकिन ठीक तेरह दिन बाद कत्ल की ये थ्योरी बदल गई। पुलिस को दिए ब्यान में कर्मबीर ने बताया कि उसने पत्नी से कहासुनी के बाद उसकी हत्या की है.. कातिल पुलिस गिरफ्त में था और मकसद साफ.. पुलिस ने भी केस को सुलझाने का दावा कर दिया।
लेकिन ये कहानी का एक हिस्सा भर थी.. क्योंकि पूरी पिक्चर तो अभी बाकी थी। पुलिस के मुताबिक कर्मबीर की पत्नी के कई लोगों से अवैध संबंध थे। इसके बारे में कर्मबीर को कुछ दिन पहले ही पता चला था और वो परेशान रहने लगा। उसे पत्नी की बेवफाई बर्दाश्त नही हुई। अंजू के पडोसी के ड्राईवर नवीन और द्वारका के रहने वाले उत्तम कुमार से नाजायज रिश्तें थे। अंजू का कत्ल बाइस जून की रात किया गया था.. लेकिन सत्ताईस जून को सरोजनी नगर थाने में उत्तम कुमार के भाई केशव ने भाई के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की तफ्तीश की तो ना केवल उत्तम के बारे मे पता चला बल्कि अंजू के कत्ल की अलग ही थ्योरी सामने आई।
जांच में पता चला कि उत्तम का कर्मबीर के घर आना जाना होता था.. उन्नीस जून की रात उत्तम अंजू से मिलने उसके घर आया था.. उस वक्त कर्मबीर काम से बाहर गया हुआ था। उत्तम को घर में दाखिल होते हुए नवीन ने देख लिया था जिसके बाद नवीन ने कर्मबीर, अंजू के भाई और अपने चचेरे भाईयों को बुला लिया। अंजू और उत्तम कुमार को आपत्तिजनक स्थिति में पाकर सभी ने उत्तम को बूरी तरह से पीटना शुरू कर दिया। हत्या करने के बाद शव को रेवाडी के पास पचास फीट गहरे कुएं में फेंक दिया ताकि किसी को वारदात के बारे में पता ना चले। लेकिन ये सब अंजू के सामने हुआ था जब दो दिन बाद अंजू ने कर्मबीर को कत्ल का राज खोल देने की धमकी दी को कर्मबीर ने उसे भी रास्ते से हटा दिया।
पुलिस ने उत्तम के शव को बरामद कर लिया.. तो कत्ल का राज फाश हो गया। पुलिस ने उत्तम की हत्या में शामिल मनोज, शौकिन, जगफूल, अंजू के भाई ऋषि को गिरफ्तार कर लिया। पांचो आरोपी उत्तम के शव को ठिकाने लगाने के बाद बेफ्रिक थे.. शायद इन्हें अहसास था की कानून के शिकंजे से बच जाएंगे लेकिन ऐसा हो ना सका।
कर्मबीर.. वो शख्स जिसने चंद मिनटों में ही दे दी पत्नी को मौत .. बेरहमी से कर दिया उसका कत्ल। पुलिस को कापसहेडा के भरथल गांव में हुई अंजु की हत्या की गुत्थी को सुलझाने में ज्यादा वक्त नही लगा। कत्ल के कुछ देर बाद ही कातिल पुलिस की गिरफ्त में था। अंजु का कत्ल कर्मबीर ने किया था। पत्नी की हत्या करने के बाद कर्मबीर ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी पुलिस गिरफ्त में था.. और कत्ल का मकसद भी साफ हो चुका था। लेकिन ठीक तेरह दिन बाद कत्ल की ये थ्योरी बदल गई। पुलिस को दिए ब्यान में कर्मबीर ने बताया कि उसने पत्नी से कहासुनी के बाद उसकी हत्या की है.. कातिल पुलिस गिरफ्त में था और मकसद साफ.. पुलिस ने भी केस को सुलझाने का दावा कर दिया।
लेकिन ये कहानी का एक हिस्सा भर थी.. क्योंकि पूरी पिक्चर तो अभी बाकी थी। पुलिस के मुताबिक कर्मबीर की पत्नी के कई लोगों से अवैध संबंध थे। इसके बारे में कर्मबीर को कुछ दिन पहले ही पता चला था और वो परेशान रहने लगा। उसे पत्नी की बेवफाई बर्दाश्त नही हुई। अंजू के पडोसी के ड्राईवर नवीन और द्वारका के रहने वाले उत्तम कुमार से नाजायज रिश्तें थे। अंजू का कत्ल बाइस जून की रात किया गया था.. लेकिन सत्ताईस जून को सरोजनी नगर थाने में उत्तम कुमार के भाई केशव ने भाई के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की तफ्तीश की तो ना केवल उत्तम के बारे मे पता चला बल्कि अंजू के कत्ल की अलग ही थ्योरी सामने आई।
जांच में पता चला कि उत्तम का कर्मबीर के घर आना जाना होता था.. उन्नीस जून की रात उत्तम अंजू से मिलने उसके घर आया था.. उस वक्त कर्मबीर काम से बाहर गया हुआ था। उत्तम को घर में दाखिल होते हुए नवीन ने देख लिया था जिसके बाद नवीन ने कर्मबीर, अंजू के भाई और अपने चचेरे भाईयों को बुला लिया। अंजू और उत्तम कुमार को आपत्तिजनक स्थिति में पाकर सभी ने उत्तम को बूरी तरह से पीटना शुरू कर दिया। हत्या करने के बाद शव को रेवाडी के पास पचास फीट गहरे कुएं में फेंक दिया ताकि किसी को वारदात के बारे में पता ना चले। लेकिन ये सब अंजू के सामने हुआ था जब दो दिन बाद अंजू ने कर्मबीर को कत्ल का राज खोल देने की धमकी दी को कर्मबीर ने उसे भी रास्ते से हटा दिया।
पुलिस ने उत्तम के शव को बरामद कर लिया.. तो कत्ल का राज फाश हो गया। पुलिस ने उत्तम की हत्या में शामिल मनोज, शौकिन, जगफूल, अंजू के भाई ऋषि को गिरफ्तार कर लिया। पांचो आरोपी उत्तम के शव को ठिकाने लगाने के बाद बेफ्रिक थे.. शायद इन्हें अहसास था की कानून के शिकंजे से बच जाएंगे लेकिन ऐसा हो ना सका।
03 जुलाई 2010
नौकरानी नहीं चोरनी
दिल्ली के उस परिवार ने एक महिला की मजबुरी देख उसे काम दिया। महिला ने भी मेहनत करने में कोई कोर कसर नही छोडी। उसने दिल लगाकर काम क्या किया कि पूरे पिरवार का ही विश्वास जीत लिया। अब वो परिवार की नौकरानी कम बल्कि सदस्य बन गई। ऐसे में उसने ऐसा विश्वासघात किया कि सुनने वाला हर शख्स सन्न रहा गया।
किसी का विश्वास हासिल करने के लिए एक दो नही बल्कि साल गुजर जाते है। खोने में जरा सा वक्त लगता है। पुलिस गिरफ्त में आई सुनीता यादव के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। इसने राजेन्द्र नगर में रहने वाले विनोद गौरी के परिवार का विश्वासतो पा लिया। लेकिन इसकी एक हरकत से ना केवल परिवार का भरोसा टूटा बल्कि ये अपने साथी के साथ पुलिस गिरफ्त में आ गई। पुलिस के मुताबिक तीन जून को विनोद गौरी के घर हुई चोरी की वारदात को सुनीता ने ही अंजाम दिया था। वारदात के वक्त विनोद का परिवार समारोह में शामिल के लिए गया हुआ था। इसी का फायदा उठाकर सुनीता ने घर से करीब ग्यारह लाख रूपये की ज्वैलरी और डायमंड चुरा लिए और चंपत हो गई।
पुलिस के मुताबिक सुनीता को प्लेमेंट एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। पुलिस ने एजेंसी से इसका पता लिया तो ये वहां नही मिली। जिसके बाद पुलिस तफ्तीश में पता चला कि सुनीता मूलरूप से छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की रहने वाली है। पुलिस ने सुनीता को नारायण पुर से गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही इसकी मदद करने वाले विभाष बरमन को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके पास से चोरी की ज्वैलरी और डायमंड बरामद कर लिए है।
सुनीता के लालच ने उसे जेल का रास्ता तो दिखा दिया..साथ ही भरोसे को तोडकर जता दिया कि परिवार ने उस पर विश्वास कर गलती की थी। ऐसे मे जरूरत है कि आप सावधान रहे कहीं ऐसा ना हो कि कोई और सुनीता आपके घर पर हाथ साफ कर जाए।
किसी का विश्वास हासिल करने के लिए एक दो नही बल्कि साल गुजर जाते है। खोने में जरा सा वक्त लगता है। पुलिस गिरफ्त में आई सुनीता यादव के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। इसने राजेन्द्र नगर में रहने वाले विनोद गौरी के परिवार का विश्वासतो पा लिया। लेकिन इसकी एक हरकत से ना केवल परिवार का भरोसा टूटा बल्कि ये अपने साथी के साथ पुलिस गिरफ्त में आ गई। पुलिस के मुताबिक तीन जून को विनोद गौरी के घर हुई चोरी की वारदात को सुनीता ने ही अंजाम दिया था। वारदात के वक्त विनोद का परिवार समारोह में शामिल के लिए गया हुआ था। इसी का फायदा उठाकर सुनीता ने घर से करीब ग्यारह लाख रूपये की ज्वैलरी और डायमंड चुरा लिए और चंपत हो गई।
पुलिस के मुताबिक सुनीता को प्लेमेंट एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। पुलिस ने एजेंसी से इसका पता लिया तो ये वहां नही मिली। जिसके बाद पुलिस तफ्तीश में पता चला कि सुनीता मूलरूप से छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की रहने वाली है। पुलिस ने सुनीता को नारायण पुर से गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही इसकी मदद करने वाले विभाष बरमन को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके पास से चोरी की ज्वैलरी और डायमंड बरामद कर लिए है।
सुनीता के लालच ने उसे जेल का रास्ता तो दिखा दिया..साथ ही भरोसे को तोडकर जता दिया कि परिवार ने उस पर विश्वास कर गलती की थी। ऐसे मे जरूरत है कि आप सावधान रहे कहीं ऐसा ना हो कि कोई और सुनीता आपके घर पर हाथ साफ कर जाए।
कार्ड की क्लोनिंग कर ठगी
अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं तो जरा सावधान हो जाएं. हो सकता है कि कहीं आपके क्रेडिट से लाखों की खरीदारी हो जाए और आपको इसकी भनक तक ना लगे। दिल्ली पुलिस ने एक ऐसी ही तिकड़ी को गिरफ्तार किया है जो क्रेडिट और डेबिट कार्ड की क्लोनिंग कर लाखों रुपए की खरीदारी की थी।
एटीएम, डेबिट या क्रेडिट कार्ड...ये सब कुछ आपकी जेब में ही पड़ा है...लेकिन आपके अकाउंट से पैसे निकलते जा रहे हैं। मोबाइल पर मैसेज आ रहा है कि आपके खाते से कितनी रकम निकल गई, लेकिन आप कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो समझ जाइए कि आपका ठगे जा चुके हैं। अगर ऐसा नही हुआ है तो आप खुशकिस्मत है। क्योंकि आपके अकाउंट पर डांका डालने वाले तीन शातिरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्त में आए ये हैं.रविन्द्र.. अनिल और संजीव कुमार झा। लोगों के अकाउंट खाली करने का इनका तरीका इतना शातिराना था कि किसी को भनक तक नही लगती और उसका अकाउंट खाली हो जाता। पुलिस के मुताबिक कई मल्टीनेशनल बैंको से शिकायत मिल रही थी कि उनके ग्राहकों के अकाउंट से पैसा निकाला जा रहा है...जबकि ग्राहक कार्ड का इस्तेमाल ही नही कर रहा। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की तो ये तीन शातिर उसके हत्थे चढ़ गए।
पूछताछ के दौरान तीनों ने खुलासा किया कि ये लोग क्रेडिट, डेबिट कार्ड की क्लोनिंग कर अकाउंट से पैसे निकालते थे। इनमें से एक संजीव कुमार झा टीवीएस के सर्विस सेन्टर में बतौर टेक्निशियन काम करता था। जहां ईडीसी यानी इलैक्ट्रोनिक डाटा कैप्चर मशीन रिपेयर का काम होता था। यहीं से इसके खुराफाती दिमाग में ठगी का आइडिया आया। जिसके बाद इसने अपने साथ कुरियर कंपनी में काम करने वाले अनिल को मिला लिया। अनिल बैंक ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड कुरियर करने का काम करता था। बीच में ये कार्ड को निकाल लेते और फिर उसकी क्लोनिंग कर सर्विस करते। इनके ठगी के इस खेल में साथ दिया रविन्द्र सुलेखा ने। रविन्द्र की ट्रेवल एजेंसी है और ये शातिर अनिल और संजीव को एमआईडी यानी मर्चेंट आईडी मुहैया कराता था। जिसके बाद इनका धंधा शुरू होता। अब तक ये शातिर कई लोगों को अपना शिकार बना चुके है। पुलिस ने इनके पास से ग्यारह क्रेडिट कार्ड, एक ईडीसी मशीन, 54 क्रेडिट कार्ड नम्बर की लिस्ट और तकरीब बीस से पच्चीस लाख रूपये खरीददारी की स्लिप बरामद की है। लगातार एक के बाद एक सामने आते इन मामलों से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में इन शातिरों का जाल कितनी तेजी से फैल रहा है। ऐसे मामलों में आपकी सावधानी जरुरी है, क्योंकि ये अपराधी हर वक्त एक नए शिकार की ताक में रहते हैं।
एटीएम, डेबिट या क्रेडिट कार्ड...ये सब कुछ आपकी जेब में ही पड़ा है...लेकिन आपके अकाउंट से पैसे निकलते जा रहे हैं। मोबाइल पर मैसेज आ रहा है कि आपके खाते से कितनी रकम निकल गई, लेकिन आप कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो समझ जाइए कि आपका ठगे जा चुके हैं। अगर ऐसा नही हुआ है तो आप खुशकिस्मत है। क्योंकि आपके अकाउंट पर डांका डालने वाले तीन शातिरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्त में आए ये हैं.रविन्द्र.. अनिल और संजीव कुमार झा। लोगों के अकाउंट खाली करने का इनका तरीका इतना शातिराना था कि किसी को भनक तक नही लगती और उसका अकाउंट खाली हो जाता। पुलिस के मुताबिक कई मल्टीनेशनल बैंको से शिकायत मिल रही थी कि उनके ग्राहकों के अकाउंट से पैसा निकाला जा रहा है...जबकि ग्राहक कार्ड का इस्तेमाल ही नही कर रहा। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की तो ये तीन शातिर उसके हत्थे चढ़ गए।
पूछताछ के दौरान तीनों ने खुलासा किया कि ये लोग क्रेडिट, डेबिट कार्ड की क्लोनिंग कर अकाउंट से पैसे निकालते थे। इनमें से एक संजीव कुमार झा टीवीएस के सर्विस सेन्टर में बतौर टेक्निशियन काम करता था। जहां ईडीसी यानी इलैक्ट्रोनिक डाटा कैप्चर मशीन रिपेयर का काम होता था। यहीं से इसके खुराफाती दिमाग में ठगी का आइडिया आया। जिसके बाद इसने अपने साथ कुरियर कंपनी में काम करने वाले अनिल को मिला लिया। अनिल बैंक ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड कुरियर करने का काम करता था। बीच में ये कार्ड को निकाल लेते और फिर उसकी क्लोनिंग कर सर्विस करते। इनके ठगी के इस खेल में साथ दिया रविन्द्र सुलेखा ने। रविन्द्र की ट्रेवल एजेंसी है और ये शातिर अनिल और संजीव को एमआईडी यानी मर्चेंट आईडी मुहैया कराता था। जिसके बाद इनका धंधा शुरू होता। अब तक ये शातिर कई लोगों को अपना शिकार बना चुके है। पुलिस ने इनके पास से ग्यारह क्रेडिट कार्ड, एक ईडीसी मशीन, 54 क्रेडिट कार्ड नम्बर की लिस्ट और तकरीब बीस से पच्चीस लाख रूपये खरीददारी की स्लिप बरामद की है। लगातार एक के बाद एक सामने आते इन मामलों से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में इन शातिरों का जाल कितनी तेजी से फैल रहा है। ऐसे मामलों में आपकी सावधानी जरुरी है, क्योंकि ये अपराधी हर वक्त एक नए शिकार की ताक में रहते हैं।
01 जुलाई 2010
नौकरी के नाम पर रेप
.. जब उस लड़की की मुलाकात लडके से हुई तो उसे अपनेपन का अहसास हुआ। यहां तक की उसने अपनी मजबुरी उसके सामने बयां कर दी। उसे जरूरत थी नौकरी की। नौकरी दिलाने का भरोसा भी मिला। लेकिन नौकरी की जिंदगी ही बर्बाद कर दी। नौकरी के नाम पर उसकी अस्मत को लूट लिया गया।
पुलिस की गिरफ्त में खड़े इस युवक ने अपनी ही दोस्त के साथ विश्वासघात किया। उसकी मजबुरी का फायदा उठा कर उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। पुलिस के मुताबिक पीड़ित युवती को मनोज नाम का ये युवक 6 महीने से नौकरी दिलाने का झांसा दे रहा था। एक दिन नौकरी दिलाने के बहाने लड़की को गुड़गांव में अपने एक दोस्त के पास ले गया। जहां इसने युवती के साथ बलात्कार किया....पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। पुलिस ने लड़की की मेडिकल जांच कराई... जिसमें दुष्कर्म की पुष्टी हो गई। लड़की की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी मनोज को गिरफ्तार कर लिया। मनोज दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में दवा कंपनी बतौर मेडिकल रि-प्रेजेंटेटिव काम करता है। कुछ महीनों पहले उसकी मुलाकात दिल्ली के पंजाबी बाग में रहने वाली एक लड़की से हुई थी। लड़की को नौकरी की तलाश थी.. ऐसे में मनोज ने उसे भरोसा दिलाया की वो किसी अच्छी कंपनी में उसको नौकरी दिला देगा। इसी आड़ में उसने हवस का गंदा खेल खेलकर लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी। मनोज खुद को पाक-साफ बता रहा है उसका तो कहना है कि सोची समझी साजिश के तहत उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है। ऐसा पहली बार नही है जब किसी लड़की को नौकरी का झांसा देकर हवस का शिकार बनाया गया हो। लेकिन जरूरत कानून सख्त करने के साथ लड़कियों को भी जागरूक होने की है। ताकि इस तरह के धोखेबाजों के चंगुल में फंसकर उनकी जिंदगी बर्बाद ना हो।
पुलिस की गिरफ्त में खड़े इस युवक ने अपनी ही दोस्त के साथ विश्वासघात किया। उसकी मजबुरी का फायदा उठा कर उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। पुलिस के मुताबिक पीड़ित युवती को मनोज नाम का ये युवक 6 महीने से नौकरी दिलाने का झांसा दे रहा था। एक दिन नौकरी दिलाने के बहाने लड़की को गुड़गांव में अपने एक दोस्त के पास ले गया। जहां इसने युवती के साथ बलात्कार किया....पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। पुलिस ने लड़की की मेडिकल जांच कराई... जिसमें दुष्कर्म की पुष्टी हो गई। लड़की की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी मनोज को गिरफ्तार कर लिया। मनोज दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में दवा कंपनी बतौर मेडिकल रि-प्रेजेंटेटिव काम करता है। कुछ महीनों पहले उसकी मुलाकात दिल्ली के पंजाबी बाग में रहने वाली एक लड़की से हुई थी। लड़की को नौकरी की तलाश थी.. ऐसे में मनोज ने उसे भरोसा दिलाया की वो किसी अच्छी कंपनी में उसको नौकरी दिला देगा। इसी आड़ में उसने हवस का गंदा खेल खेलकर लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी। मनोज खुद को पाक-साफ बता रहा है उसका तो कहना है कि सोची समझी साजिश के तहत उसे इस मामले में फंसाया जा रहा है। ऐसा पहली बार नही है जब किसी लड़की को नौकरी का झांसा देकर हवस का शिकार बनाया गया हो। लेकिन जरूरत कानून सख्त करने के साथ लड़कियों को भी जागरूक होने की है। ताकि इस तरह के धोखेबाजों के चंगुल में फंसकर उनकी जिंदगी बर्बाद ना हो।
30 जून 2010
वारदात- ब्राजील की युवती से बलात्कार
राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई। जब एक विदेशी छात्रा ने अपने मकान मालिक पर बलात्कार का आरोप लगाया। छात्रा का आरोप है कि मकान मालिक ने कॉफी में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दो दिन तक बलात्कार किया। छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ दिन पहले भी दो विदेशी युवतियों ने गाइड पर बलात्कार का आरोप लगाया था। हेडर...विदेशी युवती के साथ रेप, नशीला पदार्थ मिला पिलाई कॉफी, दो दिन तक किया बलात्कार. आरोपी मकान मालिक गिरफ्तार
वीओ वन... फिर शर्मसार हुई दिल्ली... दिल्ली के दामन पर लगा बदनुमा दाग... विदेशी युवती को बनाया.. हवस का शिकार। 27 साल की इस युवती को दिल्ली से सटे नोएडा के इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेना था, इसी मकसद से ये भारत आई थी और दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में 19 जून को एक कमरा किराए पर लिया। लेकिन अगले दो दिन यानी 20 जून और 21 जून को उसके साथ जिंदगी में वो हुआ जो उसने कभी नहीं सोचा था... छात्रा का आरोप है कि उसके मकान मालिक अमरजीत ने उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला... विदेशी मेहमान के साथ की गई ये हरकत शर्मसार करने वाली है। दो बार घिनौनी वारदात को अंजाम देने के बाद अमरजीत की हवस और बढ गई। 27 जून 2010 को जब एक बार फिर मकान मालिक ने उसे हवस का शिकार बनाना चाहा तो किसी तरह वो बचकर निकल गई और एक वकील की मदद से 29 जून 2010 को चितरंजन पार्क थाने में शिकायत दर्ज कराई। छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स होने में चंद रोज ही बचे है। ऐसे में विदेशी महिलाओं के साथ इस तरह की घटना दिल्ली पर बदनुमा दाग है। ऐसे में गेम्स के दौरान विदेशी किस कदर खुद को सुरक्षित महसुस करेगे.. यह बड़ा सवाल है।
वीओ वन... फिर शर्मसार हुई दिल्ली... दिल्ली के दामन पर लगा बदनुमा दाग... विदेशी युवती को बनाया.. हवस का शिकार। 27 साल की इस युवती को दिल्ली से सटे नोएडा के इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेना था, इसी मकसद से ये भारत आई थी और दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में 19 जून को एक कमरा किराए पर लिया। लेकिन अगले दो दिन यानी 20 जून और 21 जून को उसके साथ जिंदगी में वो हुआ जो उसने कभी नहीं सोचा था... छात्रा का आरोप है कि उसके मकान मालिक अमरजीत ने उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला... विदेशी मेहमान के साथ की गई ये हरकत शर्मसार करने वाली है। दो बार घिनौनी वारदात को अंजाम देने के बाद अमरजीत की हवस और बढ गई। 27 जून 2010 को जब एक बार फिर मकान मालिक ने उसे हवस का शिकार बनाना चाहा तो किसी तरह वो बचकर निकल गई और एक वकील की मदद से 29 जून 2010 को चितरंजन पार्क थाने में शिकायत दर्ज कराई। छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स होने में चंद रोज ही बचे है। ऐसे में विदेशी महिलाओं के साथ इस तरह की घटना दिल्ली पर बदनुमा दाग है। ऐसे में गेम्स के दौरान विदेशी किस कदर खुद को सुरक्षित महसुस करेगे.. यह बड़ा सवाल है।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
-
यू-ट्यूब पर रोमांच से भरी हॉरर वेब सीरीज की शुरुआत होने जा रही है। यू ट्यूब पर मौजूद ब्लू फैक्टर्स नाम के चैनल पर इसके एपिसोड अगले कुछ दिन...
-
आशियाने को आबादी का इन्तजार एक ओर २७ साल से २५ हज़ार लोगों को आशियाने का इंतजार दूसरी ओर हजारों आशियानों को आबादी का इंतजार----रोहिणी आवासी...
-
नरेला ।। दिल्ली के नरेला इलाके में एक युवक की बेरहमी से सिर कुचलकर हत्या कर दी गई, युवक का शव रामदेव चौक के पास एक खाली पड़े प्लाट से बराम...