30 जून 2010

वारदात- ब्राजील की युवती से बलात्कार

राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई। जब एक विदेशी छात्रा ने अपने मकान मालिक पर बलात्कार का आरोप लगाया। छात्रा का आरोप है कि मकान मालिक ने कॉफी में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दो दिन तक बलात्कार किया। छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ दिन पहले भी दो विदेशी युवतियों ने गाइड पर बलात्कार का आरोप लगाया था। हेडर...विदेशी युवती के साथ रेप, नशीला पदार्थ मिला पिलाई कॉफी, दो दिन तक किया बलात्कार. आरोपी मकान मालिक गिरफ्तार
वीओ वन... फिर शर्मसार हुई दिल्ली... दिल्ली के दामन पर लगा बदनुमा दाग... विदेशी युवती को बनाया.. हवस का शिकार। 27 साल की इस युवती को दिल्ली से सटे नोएडा के इंस्टीट्यूट में एडमिशन लेना था, इसी मकसद से ये भारत आई थी और दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में 19 जून को एक कमरा किराए पर लिया। लेकिन अगले दो दिन यानी 20 जून और 21 जून को उसके साथ जिंदगी में वो हुआ जो उसने कभी नहीं सोचा था... छात्रा का आरोप है कि उसके मकान मालिक अमरजीत ने उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला... विदेशी मेहमान के साथ की गई ये हरकत शर्मसार करने वाली है। दो बार घिनौनी वारदात को अंजाम देने के बाद अमरजीत की हवस और बढ गई। 27 जून 2010 को जब एक बार फिर मकान मालिक ने उसे हवस का शिकार बनाना चाहा तो किसी तरह वो बचकर निकल गई और एक वकील की मदद से 29 जून 2010 को चितरंजन पार्क थाने में शिकायत दर्ज कराई। छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स होने में चंद रोज ही बचे है। ऐसे में विदेशी महिलाओं के साथ इस तरह की घटना दिल्ली पर बदनुमा दाग है। ऐसे में गेम्स के दौरान विदेशी किस कदर खुद को सुरक्षित महसुस करेगे.. यह बड़ा सवाल है।

वारदात- दिल्ली में बदमाशों का कहर

दिल्ली अब दिल वालों की नही खौफ की.. दहशत की राजधानी बन चुकी है। यहां डर लगता है.. मौत कब दस्तक दे... लुटेरे कब लूट ले और कब आपकी जिंदगी खत्म हो जाए कहा नही सजा सकता है। 24 घंटे में बदमाशों ने दहशत का ऐसा खेल खेला की दिल्ली थर्रा उठी। किसी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई तो किसी को लूट के इरादे से बदमाशों ने अपना शिकार बनाया।
दिल्ली.. जहां खौफ बसता है.. लोग दहशत में जीते है। चंद रूपयों की खातिर इनसान का कब लाश बना दिया जाए सोचकर डर लगता है। बाहर क्या लोगों को घर में भी कम खतरा नही है। घरों में लोग दहशत के साये में जी रहे है। बुधवार सुबह से ही बदमाशों ने दहशत का खेल खेलना शुरू किया.. सुबह करीब साढे छ बजे पुलिस को खबर मिली की नरेला के सेक्टर ए-5 में युवक को गोली मार दी गई है। पुलिस मौके पर पहुंच तो जगबीर नाम के पोपर्टी डीलर दम तोड चुका था। उसके शरीर में नौ गोली मारी गई थी। पुलिस को जांच में पता चला कि जगबीर मॉर्निंग वॉक के लिए आया था। उसी दौरान बाइक पर आए बदमाशों ने उसपर फायरिंग कर दी जिससे जगबीर की मौके पर ही मौत हो गई। जगबीर का पोपर्टी डीलिंग का काम था माना जा रहा है कि पोपर्टी विवाद में उसकी हत्या की गई है। हालांकि अभी तक पुलिस इस मामले में किसी को गिरफ्तार नही कर पाई है।
बदमाश का कहर नही थमा... नरेला के बाद बदमाशों ने दिल्ली के करोल बाग में मोबाइल शॉप पर काम करने वाले एक युवक को निशाना बनाया। पुलिस के मुताबिक सुनील नाम का कर्मचारी आईसीआईसीआई बैंक में रकम जमा कराने जा रहा था। सुनील रास्ते में एक मंदिर में रूका। पिछे कर रहे बाइक सवार बदमाशों ने सुनील से बैग छिनने की कोशिश की। सुनील ने इसका विरोध किया तो बदमाशों ने गोली चला दी। गोली की आवाज सुनकर आस-पास के लोग जमा होते देख.. बदमाश फरार हो गए। घायल सुनील को गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बदमाश रकम लूटने में नाकाम रहे। दिल्ली की हाईटेक पुलिस बदमाशों पर नकेल कसने के दावे करती है। लेकिन सरेराह.. सरेआम कत्ल और लूट की वारदात पुलिस के दावों की कलई खोल देती है। आखिर देश की राजधानी में आम आदमी खुद को कैसे महफूज महसुस करे।

वारदात-जेल के बाहर कत्ल की साजिश

जेल में बंद होकर भी साजिश रचते है। अपने मंसूबों को पूरा करने की नापाक साजिश रचते है वों। दुश्मन को मिटाने के लिए जेल में कत्ल से नही कतराते। मोगा पुलिस ने ऐसे दो शातिर बदमाश को गिरफ्तार किया है जो जेल के अंदर हत्या करने के मकसद से आए थे। जबकि उनका एक साथी भगाने में कामयाब हो गया। मोगा पुलिस की गिरफ्त में आए ये शातिर बदमाश है....जो अपने दुश्मनों को खत्म करने जेल में पहुंच गए...दोनों बदमाश हथियारों से लैस थे...इससे पहले की वारदात को अंजाम देते मोगा पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया। इनका एक साथी भागने में कामयाब रहा....पुलिस के मुताबिक तीन बदमाश मोगा की सब जेल में अपने साथियों के साथ मिलने आए हुए थे...और इनके पास बंदूक और तंमचे भी थे...इससे पुलिस को इन पर शक हुआ और इन्हे गिरफ्तार कर लिया,,,पुलिस ने जेल के बाहर खड़ी इन बदमाशों की गाड़ी को भी बरामद कर लिया है...पुलिस ने गाड़ी से भी हथियार बरामद किए है।
मोगा की इस जेल में दो गुटों के बीच खूनी जंग चल रही है...और इसी के चलते एक गुट ने दूसरे पर हमला करवाने के लिए इन दोनों बदमाशों को बुलाया था...पुलिस ने एहतियात के तौर पर जेल की जांच भी कराई थी। पिछले काफी दिनों से जेल में बंद गुटों के बीच जेल के बाहर गैंग वॉर जारी है.....और दोनों गुट अब जेल में बंद एक दूसरे के दुश्मनों को ठिकाने लगाने की साजिश रच रहे है
पुलिस इनके फरार तीसरे साथी की तलाश में जुट गई है....इसके अलावा जेल प्रशासन ने जेल में बंद चुंनिदा कैदियों को अलग-अलग जेलों में शिफ्ट कर दिया है। ताकि फिर से कोई ऐसी साजिश को रचने की कोशिश ना करे....प्रशासन ने कैदियों की सुरक्षा के लिए जेल में सुरक्षा इंतज़ामों को भी कड़ा किया है।

29 जून 2010

मौत का सौदा

मुजफ्फर नगर पुलिस ने अवैध हथियारों का जखीरा बरामद किया है। पुलिस ने एक फैक्ट्री पर छापा मारकर इन हथियारो को बरामद किया। हथियार एडवांस बुकिंग पर तैयार किए जा रहे थे और इनका चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया जाना था। इस सिलसिले में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है।
हथियारों का ये जखीरा मुजफ्फर नगर पुलिस ने गांव जोला में छापा मारकर बरामद किया है। हथियारों को तैयार कर बदमाशों को दिया जाता उससे पहले पुलिस ने भंडाफोड कर दिया। अब जरा इस युवक को देखिए.. यही इन हथियारों को तैयार करने वाला है। इसको किसी की जान से भला क्या लेना देना। इसके बनाए हथियार अब तक ना जाने कितने परिवारों को उजाड चुके है। लेकिन जान मोहम्मद को तो सिर्फ पैसों से मतलब है।.. हथियार को इस्तेमाल कौन.. किस मकसद के लिए कर रहा है इसके बारे मे ये एक बार भी नही सोचता।
इन हथियारों को आगामी ग्राम प्रधानी के चुनाव के लिए एडवांस बुकिंग पर तैयार किया जा रहा था। जिनका इस्तेमाल चुनाव में फायरिंग के लिए किया जाता। हथियार भले की अवैध तरीके से बनाए जा रहे हो लेकिन इन्हें बनाने वालों का दावा है कि ये पूरी तरह से कारगर है। 15 बोर का देशी तमंचा 1500 रूपये में बेचता था। जान मोहम्मद इस धंधे में लंबे अर्से से लगा है। हालांकि हथियार बनाने की वजह से पांच साल पहले भी जेल जा चुका है।
पुलिस भी मानती है कि मुजफ्फर नगर का गांव जोला में अवैध रूप से हथियार बनाने का काम होता है। पुलिस कार्रवाई को पुलिस अधिकारी बड़ी कामयाबी मान रहे है। लेकिन इसी गांव में अब भी कई ऐसी ही फैक्ट्रियां चल रही है। पुलिस उनपर कब तक लगाम लगाती है ये देखने वाली बात होगी।

हाथ लगा हथियार

अशोक विहार ऑनर किलिंग केस में अब कडियां जुडने लगी है। जांच के दौरान वारदात में इस्तेमाल हथियार पुलिस ने बरामद कर लिया है। पुलिस ने पिस्टल को ऋषिकेश से बरामद किया है। दो बहनों और बहनोई की हत्या मामले में तीन आरोपियों को गढमुक्तेश्वर से गिरफ्तार किया गया था। जिसके बाद आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि हथियार को गंगा में फेंक दिया है। इस तिहरे हत्याकांड में पिस्टल पुलिस के लिए एक अहम सबूत है।
तीन घंटे, तीन कत्ल और तीन आरोपी। इस तिगड़ी ने दिल्ली पुलिस को पसीना पसीना कर दिया। लेकिन इस तिहरे हत्याकांड में अब दिल्ली पुलिस के हाथ अहम सुराग लग गये है। पुलिस ने मोनिका, कुलदीप और शोभा की हत्या में इस्तेमाल पिस्टल को ऋषिकेश से बरामद किया है। गढमुक्तेश्वर से गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपी मंदीप, अंकित और निक्कू को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर लिया था। उसके बाद पुलिस आरोपी को लेकर देहरादून, और ऋषिकेश गई। दरअसल गाजियाबाद पुलिस को तीनों ने बताया था कि वारदात के बाद तीनों इन जगहों पर ठहरे थे।
गिऱफ्तारी के बाद तीनों ने बताया था कि वारदात में इस्तेमाल हथियार को गंगा नदी में फेंक दिया था। ऐसे में पुलिस के लिए हथियार बरामद कर पाना बेहद मुश्किल था लेकिन जिस तरह से पुलिस गिरफ्त में आने के बाद आरोपी अंकित ने खुद को कातिल साबित करने की चुनौती पुलिस को दी थी। उससे हथियार को लेकर पुलिस का शक गहराने लगा था। आखिरकार हथियार मिलने के बाद इस मामले में पुलिस पक्ष मजबुत दिख रहा है। फिलहाल पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। अब पुलिस को साबित करना है कि इसी पिस्टल से मोनिका, कुलदीप और शोभा की हत्या की गई थी।
ऑनर किलिंग के तीनों आरोपियों को एक जुलाई को रोहिणी कोर्ट में पेश किया जाना है। ऐसे में पुलिस के हाथ पिस्टल तो लग गया है। लेकिन आरोपियों के कपडों और अन्य सबूतों की तलाश जारी है।

जिंदा हूं मैं

वो मरकर भी जिंदा है.. और जिंदा होकर भी मरा हुआ। परिवार भी उसका दाहसंस्कार कर चुका है। ये अजीबो गरीब दास्तां है पंजाब के एक शख्स की। जो दुनिया के नजरों में मर चुका है। लेकिन दिल्ली पुलिस ने मर चुके युवक का सारा खेल उसे जिंदा पकड कर बिगाड दिया
एक बार जिसे मौत ने अपना लिया.. वो फिर कभी वापिस नही लौटा.. लेकिन एक शख्स ऐसा भी है जिसने मौत को मात दी। वो मरकर भी लौट आया है। मौत को मात देकर भी से जिंदा होने वाला ये है कर्मा अग्रवाल.. जिसके पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक मौत हो चुकी है। इसके परिवार ने बाकायदा अंतिम संस्कार भी कर दिया है। लेकिन जो खेल इस शातिर ने खेला उसे दिल्ली पुलिस ने बिगाड दिया है। पुलिस को जब 22 जून को भलस्वा डेरी नाले से युवक को शव मिला। शव की पहचान कर्मा अग्रवाल के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक कर्मा अग्रवाल ने अपने साथी सत्यपाल से साथ मिलकर किसी अनजान युवक की हत्या कर उसे अपने कपडे पहना दिये। और उसमें अपने फोटो और पहचान पत्र भी रख दिया। शव की कर्मा की पत्नी ने पहचान की।
कर्मा ने शातिराना जाल बुना था जिसमें ये खुद ही फंस गया। कर्मा अग्रवाल मुलरूप से पंजाब का रहने वाला है। और इसपर एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मुकदमे दर्ज है। बस इन्हें से बचने के लिए कर्मा ने ये साजिश रची थी। पुलिस के मुताबिक कर्मा ने अपने साथी के साथ मिलकर अनजान युवक की हत्या की। शव को जलाकर को भलस्वा डेरी नाले में फेंक दिया। पुलिस ने लाश बरामद होने और फिर उसकी पहचान हो जाने के बाद मामले में हत्यारे की तलाश शुरू की। लेकिन कोई सुराग हाथ नही लगा.. इसी दौरान पुलिस को जानकारी मिली की जिस कर्मा अग्रवाल की हत्या का मामला पुलिस ने दर्ज किया है वो जिंदा है और भलस्वा डेरी इलाके में ही रह रहा है। पुलिस ने टीम का गठन किया और भलस्वा से कर्मा को धर दबोचा।
खुद को आरोपो से बचाने के लिए कर्मा ने साजिश तो शातिराना चली थी। उसमें कामयाब भी हो गया लेकिन गुनाह के निशान मिटने नही और ये शातिर अपने साथी के साथ पुलिस गिरफ्त में आ गया। हालांकि अभी तक उस शव की पहचान नही हो सकी है जिसको कर्मा और उसके साथी ने मारा था।

26 जून 2010

इज्जतदार कातिलों को पुलिस रिमांड

इज्जत के नाम पर बहनों को मौत देने वाले तीन भाईयों को रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। यूपी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गढमुक्तेशवर से गिरफ्तार किया था। आरोपी मंदीप, अंकित और निक्कू पर दो बहनों और बहनोई की हत्या का आरोप है।
इज्जत की दुहाई देकर बहनों को मौत देने वाले मंदीप, अंकित और निक्कू को रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने अदालत से तीनों को दस दिन के रिमांड की मांग की थी। लेकिन अदालत ने तीनों को पांच दिन की पुलिस रिमांड दी। पुलिस ने दलील दी कि पूछताछ कर वारदात से संबधित अहम सुराग जुटाने है। याद रहे कि अभी तक पुलिस के हाथ वारदात में इस्तेमाल किया गया पिस्टल भी नही लगा है। तीनों पर मोनिका, कुलदीप और शोभा की हत्या का आरोप है। 20 जून को दो बहनों और बहनोई की हत्या के बाद से तीनों फरार चल रहे थे। और यूपी पुलिस ने चैंकिंग के दौरान इन्हें गढमुक्तेश्वर से गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने शुक्रवार को रोहिणी कोर्ट से इन तीनों का प्रॉडक्शन वॉरंट जारी कराया। हालांकि, कानूनन दिल्ली पुलिस इन तीनों को गुरुवार रात में ही बगैर ट्रांजिट रिमांड या प्रॉडक्शन वॉरंट लिए भी दिल्ली ला सकती थी। सरकारी वकील ने दी कि पीड़ितों को ठिकाने लगाने के लिए गहरी साजिश रची गई जिन्होंने अपने परिवारों की इच्छा के विपरीत शादियां कीं। अभियुक्तों को उकसाने वाले और साजिशकर्ताओं के नामों का भी पता लगाया जाना है। वारदात में इस्तेमाल पिस्टर और आरोपियों के कपड़ों जैसी अन्य सामग्री अभी बरामद की जानी बाकी है और इस उद्देश्य के लिए पुलिस को उन्हें देहरादून तथा ऋषिकेश ले जाना होगा।
अब दिल्ली पुलिस के पास महज पांच दिन है। अभी तक पुलिस के हाथ परिस्थिजन्य साक्ष्य ही मौजूद है। पुलिस के पास अभी तक कोई चश्मदीद गवाह नही है जिसने हत्या होते हुए देखा हो। ऐसे में तीनों को मोनिका, कुलदीप और निक्कू का कातिल साबित पुलिस के लिए मश्किल भरा हो सकता है।