मायापुरी रेडिएशन मामले में दिल्ली पुलिस ने अहम खुलासा किया है। पुलिस जांच में पता चला है कि कोबाल्ट 60 दिल्ली यूनिवर्सिटी की केमिस्ट्री लेब से आया था। कोबाल्ट 60 को कबाड के तौर पर मायापुरी के एक स्क्रेप डीलर ने भारी मात्रा में कबाड के साथ ढेड लाख रूपये में खरीदा था।
मायापुरी में रेडिएशन से कहर बरपाने वाले कोबाल्ट 60 के सोर्स का आखिरकार पता चल ही गया। पुलिस जांच में पता चला है कि कोबाल्ट 60 दिल्ली यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ केमिस्ट्री की लैब से आया था। यूनिवर्सिटी ने साल 1970 में इसे गामा सेल के रूप मे ऑटोमिक एनर्जी कनाडा लिमिटेड से खरीदा था जिससे केमिस्ट्री के स्टूडेंट्स को गामा सैल और केमिकल के इफैक्ट के बारे में बताया जाता था। लेकिन साल 1985 में इसका प्रयोग बंद हुआ और गामा सैल को एक कमरे में बंद करके रख दिया गया। 0
26 फरवरी 2010 को इसे कबाड के साथ मायापुरी स्क्रेप मार्किट के स्क्रेप डीलर हरिचरण भोला ने ढेड लाख रूपये में खरीदा था। कबाड से आयरन अलग करने के बाद उसे गिरीराज गुप्ता को बेच दिया था। इस तरह से गामा सैल के रूप में कोबाल्ट 60 राजेन्द्र, दीपक जैन से होते हुए अमित जैन तक पहुंचा और लोग रेडिएशन का शिकार होते रहे। जांच में ये भी पता चला है कि गामा सैल ने राजेन्द्र के पास पहुंचने के बाद अपना असर दिखाना शुरू किया। गामा सैल सिलेंडर के आकार का था जिसका वजन 300 किलो था। जबकि उंचाई करीब तीन फीट। फिलहाल पुलिस ने संबंध में अलग से किसी के खिलाफ मामला दर्ज नही किया है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि गामा सैल बेचने की असल वजह क्या थी। इस केस में जितनी लापरवाही स्क्रेप डीलर की रही है जिसने मोटे मुनाफे के चक्कर में कई लोगों की जान को आफत में डाल दिया। वहीं डीयू प्रशासने की भी जिसने ये जानते हुए भी की कोबाल्ट 60 कितनी खतरनाक चीज है उसे कबाड में बेच दिया।
को
29 अप्रैल 2010
27 अप्रैल 2010
डकैती की कोशिश नाकाम-दिल्ली
दिल्ली पुलिस ने राजधानी में डकैती की एक बडी वारदात को नाकाम करते हुए तीन डकैतों को गिरफ्तार किया है। जबकि वारदात में शामिल दो बदमाश अभी फरार है। वारदात महेन्द्रा पार्क इलाके की है जहां पांच बदमाशों ने हिसार के व्यवसायी अशोक कुमार को लूटने की वारदात को अंजाम दे रहे थे। पुलिस को जानकारी मिली थी कि इलाके में बडी लूट की वारदात हो सकती है जिसके बाद पुलिस की कई टीमें लगाई गई थी। पुलिस ने गिरफ्तार बदमाशों के पास से तीन देसी कट्टे और एक पल्सर बाइक बरामद की है। फिलहाल पुलिस फरार बदमाशों की तलाश कर रही है।
सपने बडे बडे और उन्हें पूरा करने के लिए साजिश भी बडी...पुलिस गिरफ्त में आए इन तीनों ने डकैती की साजिश तो शातिराना रची थी लेकिन उसमें कामयाब ना हो सके...और ये बदमाश है अब पुलिस की गिरफ्त में...शैलेश पंडित...वेदपाल और अनिल...दरअसल सोमवार की सुबह करीब साढे दस बजे अशोक कुमार हिसार से हरियाणा रोडवेज की बस में दिल्ली आ रहे थे। अशोक के पास चार लाख पचास हजार रूपये थे...जैसे ही अशोक करनाल बाईपास पर बस से उतरे तीन बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और पिस्टल सटा दी...इससे पहले कि अशोक कुमार कुछ समझ पाते उससे पहले ही तीनों बैग छिनकर भागने लगे...लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने समझदारी दिखाते हुए बाइक को धक्का दे दिया जिससे दो बदमाश गिर गए...मौका देखकर भाग रहे शैलेश को भी पुलिस ने धरदबोचा...पुलिस के मुताबिक वारदात को अंजाम देने के मकसद से पांच बदमाश आए थे जिनमें तीन लोग मारूति 800 और दो पल्सर बाइक पर सवार थे...जांच में पता चला है कि तीनों शातिर अपराधी है...और वारदात में इस्तेमाल मारूति कार और बाइक को इन्होने वारदात को अंजाम देने से पहले आउटर दिल्ली से चुराई थी...शैलेश पर पहले भी 15 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज है।
पुलिस की माने तो व्यापारी अशोक हर 15 दिन में आजादपुर सब्जी मंडी आते है...और फल खरीदकर चले जाते है...लेकिन मंडी के व्यापारियों को पैसा वो 10 से 15 दिन में देते है...पुलिस के मुताबिक जिस तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया गया उससे ये साफ है कि इसमें किसी जानकार का ही हाथ है...क्योकि वारदात के वक्त बदमाश हिसार से ही अशोक का पीछा कर रहे थे...पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल तीन देसी कट्टे और पल्सर बाइक बरामद कर ली है। इसी के साथ पुलिस ने लुट की रकम के करीब साढे चार लाख रूपये भी बरामद किये है।
इन बदामाशों ने साजिश तो शातिराना रची थी लेकिन इनकी किस्मत ने साथ नही दिया...वारदात से पहले ही पुलिस को भनक लग गई...अब पुलिस इनके फरार साथियों की तलाश में जुटी है...दिल्ली पुलिस का दावा है कि फरार हुए दोनों बदमाशों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सपने बडे बडे और उन्हें पूरा करने के लिए साजिश भी बडी...पुलिस गिरफ्त में आए इन तीनों ने डकैती की साजिश तो शातिराना रची थी लेकिन उसमें कामयाब ना हो सके...और ये बदमाश है अब पुलिस की गिरफ्त में...शैलेश पंडित...वेदपाल और अनिल...दरअसल सोमवार की सुबह करीब साढे दस बजे अशोक कुमार हिसार से हरियाणा रोडवेज की बस में दिल्ली आ रहे थे। अशोक के पास चार लाख पचास हजार रूपये थे...जैसे ही अशोक करनाल बाईपास पर बस से उतरे तीन बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और पिस्टल सटा दी...इससे पहले कि अशोक कुमार कुछ समझ पाते उससे पहले ही तीनों बैग छिनकर भागने लगे...लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने समझदारी दिखाते हुए बाइक को धक्का दे दिया जिससे दो बदमाश गिर गए...मौका देखकर भाग रहे शैलेश को भी पुलिस ने धरदबोचा...पुलिस के मुताबिक वारदात को अंजाम देने के मकसद से पांच बदमाश आए थे जिनमें तीन लोग मारूति 800 और दो पल्सर बाइक पर सवार थे...जांच में पता चला है कि तीनों शातिर अपराधी है...और वारदात में इस्तेमाल मारूति कार और बाइक को इन्होने वारदात को अंजाम देने से पहले आउटर दिल्ली से चुराई थी...शैलेश पर पहले भी 15 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज है।
पुलिस की माने तो व्यापारी अशोक हर 15 दिन में आजादपुर सब्जी मंडी आते है...और फल खरीदकर चले जाते है...लेकिन मंडी के व्यापारियों को पैसा वो 10 से 15 दिन में देते है...पुलिस के मुताबिक जिस तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया गया उससे ये साफ है कि इसमें किसी जानकार का ही हाथ है...क्योकि वारदात के वक्त बदमाश हिसार से ही अशोक का पीछा कर रहे थे...पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल तीन देसी कट्टे और पल्सर बाइक बरामद कर ली है। इसी के साथ पुलिस ने लुट की रकम के करीब साढे चार लाख रूपये भी बरामद किये है।
इन बदामाशों ने साजिश तो शातिराना रची थी लेकिन इनकी किस्मत ने साथ नही दिया...वारदात से पहले ही पुलिस को भनक लग गई...अब पुलिस इनके फरार साथियों की तलाश में जुटी है...दिल्ली पुलिस का दावा है कि फरार हुए दोनों बदमाशों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
08 अप्रैल 2010
शहीद होने का शौक नही
एक रात की कहानी है मै अपने दोस्तों के साथ नदी किनारे बैठ कर दुनिया के विषय में अपने दिमाग की दादागीरी दिखा रहा था...मेरे दोस्त भी मेरा साथ दे रहे थे...हम यू हीं दुनिया दारी की बातों को लेकर कभी भावुक हो जाते तो कभी आक्रोश भी आता..समझ में नही आ रहा था कि आखिर हम चर्चा क्या कर रहे है...खैर जैसे-जैसे रात जवान हो रही थी वैसे वैसे कुछ सोच का नशा और कुछ हल्की मदिरा का भी नशा बढ़ रहा था...चर्चा ने एकाएक रुख कर लिया...राजनीति और रणनीति को जहां एक ओर देखें तो नक्सलियों ने सकार की तमाम रणनीति की औकात दिखा दी है...क्या सिस्टम से बड़ा या यू कहें कि लोकतंत्र से बड़ी राजनीति है..सिर्फ अपनी जान बचाने के लिए क्या देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा सकता है। भारत के गृहमंत्री नक्सलियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के पक्ष में शुरू से रहे.. मगर प्रधानमंत्री के सुर के आगे उनके सैन्य कार्रवाई की राग भैरवी एकाएक डिस्को में बदल गया। छत्तीसगढ़ में जो कुछ भी हुआ वो आप सब के सामने है। 76 सैनिकों की मौत चैनलों के लिए एक्सक्लूसिव ख़बर थी। यानी देश का सपूत शहीद हो गया और उसकी शहीदी को बेचने से पीछे नही हटे। यहां भी टीआरपी का दंश उनके दिमाग में अपनी मीनार खडी कर चुका था। कभी कभी सोचकर परेशान हो जाता हूं। कि ईश्वर ना करे... कभी इनके रिश्तेदारों के साथ अनहोनी हो जाए तो वहां टीआरपी को याद रखेंगें या भूल जाएंगे। खैर ये तो बहुत पहले ही बाहर को जिंदा रखने के लिए भीतर को मार चुके है। हम रास्ता भटक ना जाएं इसलिए फिर से बात नक्सलियों की। नक्सली जिस तरह से अपने पैर पसार चुके है। और मौत का तांडव करते है.. और सरकार को लगता है.. यहां बात मैं केन्द्र और राज्य दोनों की कर रहा हूं। चाहे जिसको जो लगे.. लेकिन जिस प्रकार का रवैया अपनाया जा रहा है। आने वाले समय में तालिबान जैसी हालत भारत में भी होगी। आप देखेंगें..कि पहले भी नक्सलियों से निपटेने के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई। फिर इसके लिए एक बजट भी बनाया गया लेकिन हुआ क्या ढाक के तीन पात कभी ये ट्रेन हाईजैक करते है... कभी जेल पर हमला करते है... ताजा मामला तो आपके सामने है और बाकि रोज पांच दस सुरक्षाकर्मियों का इनके हाथो मरना सरकार के लिए कोई बडी बात नही है। आखिर ये इसी देश के है ये अपने है... और अपने भी ऐसे जो अपने और देश के दुश्मन है। हां एक बात जरूर है सरकार के लिए बहुत बडा मुद्दा है। कश्मीर की समस्या.. पुर्वात्तर की समस्या और नक्सली जैसे मामले खत्म हो जाए। तो इनके लिए दिमागी कसरत न के बराबर रह जाएगी। जिस प्रकार से नक्सली वारदात को अंजाम देते है और सरकार जिस प्रकार का रैवया अपनाती है। हो सकता है आने वाले समय में कहें सलवा जुडुम की तरह कई और संगठनों का जन्म ना हो जाए। और फिर सरकार इन्हें भी अपना दुश्मन समझ ले। खैर ये दिमागी कसरत का काम राजनीति करने वाले और रणनीति बनाने वालों का है। मुझे शहीद बनने का कोई शौक नही। भाड़ में जाए नक्सली और भाड में जाए सरकार... माथा पच्ची की कोई आवश्यकता नही... रात की उम्र ढलने लगी है और मेरा सुरूर भी कम होने लगा है। पर मेरे दोस्तों की जुबान लडखडा रही है। इसलिए मैं सोचने की हालत में नही हूं।
लेखक....रविशंकर कुमार
लेखक....रविशंकर कुमार
07 अप्रैल 2010
शहादत पर भारी ग्लैमर
बडी विडम्बना है कि आज लिखते हुए.. ना दिल काम कर रहा है.. ना ही दिमाग। रात करीब एक बजे ऑफिस से घर पहुंचा। नींद आ नही रही थी सब एक ही सवाल खाए जा रहा था। आखिर ये हो क्या रहा है। ये जानकार बेहद दुख हुआ कि छत्तीसगढ़ के दंतेवाडा में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों को निशाना बनाया। रास्ते में माइन्स बिछा कर 75 जवानों की जिदंगी लील ली। ये घटना ना केवल न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों के लिए एक खबर थी। बल्कि देश के हर शख्स को झकझोर देने वाली घटना थी। मीडिया ने भी इसे पूरी गंभीरता से लिया। चैनलों पर बडी बडी ब्रेकिंग न्यूज दिखी। रिपोर्टर्स के लाईव दिखे। एक तरह से सभी न्यूज चैनल शहीद हुए जवानों के प्रति पूरी तरह सम्पर्ति थे। लेकिन इससे कहीं ज्यादा दुख इस बात का हुआ कि शाम ढलने से पहले ही ये घटना न्यूज चैनलों के लिए किसी काम की ना रही। ग्लैमर की चकाचौंध में सबकुछ बेमारी हो गया। दरअसल एक तरह नक्सली हमले में शहीद हुए 75 जवानों की घटना थी तो दुसरी तरफ शोएब सानिया की शादी को लेकर दिल्ली पहुंचे शोएब के जीजा इमरान जफर। 75 शहीद जवानों के सामने एक इमरान जफर भारी पड गए। शाम करीब पांच बजे के बाद शायद ही किसी न्यूज चैनल पर नक्सली हमले की खबर दिखी हो। क्योंकि सभी न्यूज चैनल के लिए इमरान साहब की तबज्जो 75 शहीद जवानों से कहीं ज्यादा जो थी। इमरान जफर के दिल्ली पहुंचने की तस्दीक तो शोएब के वकील एक दिन पहले ही कर चुके थे सो मीडिया वालों का जमावडा होना लाजमी था। एक न्यूज चैनल से कई कई पत्रकार महोदय मौजूद थे। कुल मिलाकर सभी न्यूज चैनलों ने इमरान जफर की प्रैसवार्ता को ओबी वेन लगार खूब कैश किया। सवाल ये है कि क्या चैनल के लिए टीआरपी ही सबकुछ है। क्या एक अरब से ज्यादा आबादी वाले इस देश में कोई शहीद जवानों के बारे में जानने को बेताब नही था जो सभी चैनलों ने इमरान को दर्शकों के सामने परोसा दिया। शायद ये वक्त की मार और मीडिया का एक नया रूप है जो वक्त के साथ सबके सामने आया है। जरूरत है इसे जानने, पहचानने और समझने की।
जयहिंद
जयहिंद
27 फ़रवरी 2010
कॉल के लिए कत्ल-गाजियाबाद
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में केटरिंग ठेकेदार की 16 तारीख को मिली लाश की गुत्थी आखिर पुलिस ने सुलझा ली है जितेन्द्र नाम के इस ठेकेदार की हत्या संदीप ने अपने घर बुला कर की थी दरअसल जितेन्द्र संदीप की पत्नी के फ़ोन पर अश्लील बाते और एस एम् एस करता था इस बात से गुस्साय संदीप ने जितेन्द्र की हत्या कर उसकी लाश मसूरी इलाके में फेक दी पुलिस इस लाश की गुत्थी को सुलझाने में लगी थी आखिरकार सेर्वेलांस के जरिये पुलिस संदीप को पकड़ने में कामयाब रही. संदीप ने भी आपना गुनाह कबूल लिया है
ये तस्वीर है मरहूम जितेन्द्र की जिसकी लाश गाजिय़ाबाद के मसूरी इलाके में मिली थी। शुरूआती जांच में साफ था कि जितेन्द्र का कत्ल किया गया है। पुलिस उसी दिन से हत्या की गुत्थी सुलझाने में लगी थी। आखिर सात दिन बाद पुलिस कत्ल का मकसद और कातिल भी बेनकाब हो गया। पुलिस की मुताबिक जितेन्द्र की हत्या संदीप नाम के शख्स ने की थी। जितेन्द्र संदीप की पत्नी के मोबाइल पर अक्सर अश्लील बाते और मैसेज करता था संदीप ने जितेन्द्र को ऐसा करने से कई बार मना किया। लेकिन उसपर कोई असर नही हुआ। संदीप ने एक साजिश रची और आपनी पत्नी से फ़ोन कराकर जितेन्द्र को अपने घर बुलाया। और फिर घर में उसकी जमकर पिटाई की.. जिसकी वजह से जितेन्द्र की मौत हो गई.. खुद को बचाने के लिए संदीप ने लाश को ठिकाने लगाने के मकसद से मसूरी इलाके में फेंक दिया।
संदीप अब पुलिस कि गिरफ्त में है और उसने अपना गुनाह भी कुबूल कर लिया है। उस के मुताबिक बार बार समझाने के बाद भी जब जितेन्द्र नहीं माना तब उसे मज़बूरी में ये कदम उठाना पड़ा। लेकिन हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले वो भूल गया कि गुनाह कभी छुपता नही है। यही हुआ संदीप के साथ आखिरकार वो पुलिस गिरफ्त में आ ही गया।
पुलिस की अभी तक की जांच में पता चला है कि संदीप ने अकेले ही इस वारदात को अंजाम दिया था। हालांकि पुलि अब ये भी जानने में लगी है कि क्या जितेन्द्र के कत्ल की वजह फोन करना था या फिर कुछ और वजह भी तो नही थी।
ये तस्वीर है मरहूम जितेन्द्र की जिसकी लाश गाजिय़ाबाद के मसूरी इलाके में मिली थी। शुरूआती जांच में साफ था कि जितेन्द्र का कत्ल किया गया है। पुलिस उसी दिन से हत्या की गुत्थी सुलझाने में लगी थी। आखिर सात दिन बाद पुलिस कत्ल का मकसद और कातिल भी बेनकाब हो गया। पुलिस की मुताबिक जितेन्द्र की हत्या संदीप नाम के शख्स ने की थी। जितेन्द्र संदीप की पत्नी के मोबाइल पर अक्सर अश्लील बाते और मैसेज करता था संदीप ने जितेन्द्र को ऐसा करने से कई बार मना किया। लेकिन उसपर कोई असर नही हुआ। संदीप ने एक साजिश रची और आपनी पत्नी से फ़ोन कराकर जितेन्द्र को अपने घर बुलाया। और फिर घर में उसकी जमकर पिटाई की.. जिसकी वजह से जितेन्द्र की मौत हो गई.. खुद को बचाने के लिए संदीप ने लाश को ठिकाने लगाने के मकसद से मसूरी इलाके में फेंक दिया।
संदीप अब पुलिस कि गिरफ्त में है और उसने अपना गुनाह भी कुबूल कर लिया है। उस के मुताबिक बार बार समझाने के बाद भी जब जितेन्द्र नहीं माना तब उसे मज़बूरी में ये कदम उठाना पड़ा। लेकिन हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले वो भूल गया कि गुनाह कभी छुपता नही है। यही हुआ संदीप के साथ आखिरकार वो पुलिस गिरफ्त में आ ही गया।
पुलिस की अभी तक की जांच में पता चला है कि संदीप ने अकेले ही इस वारदात को अंजाम दिया था। हालांकि पुलि अब ये भी जानने में लगी है कि क्या जितेन्द्र के कत्ल की वजह फोन करना था या फिर कुछ और वजह भी तो नही थी।
फर्जी पुलिस वाला गिरफ्तार-मोगा
उसके तन पर पुलिस की वर्दी होती तो रोब खुद ब खुद आ जाता। इलाके में रोब खूब चलता और लोग उसको सल्यूट करना नही भूलते। जनाब पंजाब पुलिस में बतौर एएसआई तैनात जो थे। कई लोगों को वर्दी पहनाने का झांसा भी दिया। लेकिन जब असलियत सामने आई तो खुद की वर्दी ही उतर गई। चलिए आप भी मिल लिजिए पंजाब पुलिस के उस मुलाजिम से।
जरा पहचानिए दोनों में से पुलिसकर्मी कौन है।........ बिलकुल सही पहचाना.. भई जिसने पुलिस की वर्दी पहनी है वही तो पुलिसकर्मी है। लेकिन पुलिसकर्मी के साथ खडे ये जनाब भी कल तक किसी पुलिस वाले से कम नही थे। यकिन ना आए तो जरा इन साहब का ये आईकार्ड देख लिजिए। ये आई कार्ड पंजाब पुलिस का है और इसमे लगी तस्वीर है इन्ही साहब की है। साथ में औहदा भी लिखा है.. एएसआई। अब सवाल ये है कि कल तक पंजाब पुलिस की नौकरी बजाने का दावा करने वाला कुलविंदर पुलिस गिरफ्त में कैसे आ गया। इसकी कहानी भी बेहद अजीब है। दरअसल पंजाब पुलिस के मुताबिक ये फर्जी पुलिस कर्मी है। और पुलिस कर्मी बनकर लोगों को चूना लगाया करता था। पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर उनसे पैसा ऐंठ लेता और फिर रफूचक्कर हो जाता। लेकिन लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाला ये शातिर आ गया पुलिस की गिरफ्त में पुलिस ने इसके पास से फर्जी आई कार्ड भी बरामद कर लिया है।
पुलिस को जांच में पता चला की इसके साथ एक महिला भी शामिल है। जिसके पास भी बाकायदा पंजाब पुलिस का आई कार्ड है और उसपर सिपाही का पद लिखा हुआ है। पुलिस के मुताबिक कुलविंदर और अमरदीप कौर नाम की महिला लोगों को पंजाब पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर रूपये ठगते थे। यकिन दिलाने के लिए अपना आई कार्ड और तब भी यकिन ना हो तो रूपये के बदले कुछ दिन बाद का चेक दे देते थे। ताकि काम ना हो सके तो लोग अपना पैसा निकलवा ले। लेकिन जब चेक बैंक में डालते तो कुलविंदर के नाम से कोई अकाउंट ही नही होता। पुलिस की जांच में पता चला है कि कुलविंदर पर पहले भी कई मामले दर्ज है।
पुलिस के हाथ कुलविंदर के साथ मिलकर फर्जीवाडा करने वाली महिला का फोटो लग चुका है। हालांकि अभी तक पुलिस अमरदीप कौर तक नही पहुंच सकी है। पुलिस को तलाश अमरदीप की सरगर्मी से तलाश है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से इनके फर्जीवाडे के कुछ मामले खुल सकते है।
जरा पहचानिए दोनों में से पुलिसकर्मी कौन है।........ बिलकुल सही पहचाना.. भई जिसने पुलिस की वर्दी पहनी है वही तो पुलिसकर्मी है। लेकिन पुलिसकर्मी के साथ खडे ये जनाब भी कल तक किसी पुलिस वाले से कम नही थे। यकिन ना आए तो जरा इन साहब का ये आईकार्ड देख लिजिए। ये आई कार्ड पंजाब पुलिस का है और इसमे लगी तस्वीर है इन्ही साहब की है। साथ में औहदा भी लिखा है.. एएसआई। अब सवाल ये है कि कल तक पंजाब पुलिस की नौकरी बजाने का दावा करने वाला कुलविंदर पुलिस गिरफ्त में कैसे आ गया। इसकी कहानी भी बेहद अजीब है। दरअसल पंजाब पुलिस के मुताबिक ये फर्जी पुलिस कर्मी है। और पुलिस कर्मी बनकर लोगों को चूना लगाया करता था। पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर उनसे पैसा ऐंठ लेता और फिर रफूचक्कर हो जाता। लेकिन लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाला ये शातिर आ गया पुलिस की गिरफ्त में पुलिस ने इसके पास से फर्जी आई कार्ड भी बरामद कर लिया है।
पुलिस को जांच में पता चला की इसके साथ एक महिला भी शामिल है। जिसके पास भी बाकायदा पंजाब पुलिस का आई कार्ड है और उसपर सिपाही का पद लिखा हुआ है। पुलिस के मुताबिक कुलविंदर और अमरदीप कौर नाम की महिला लोगों को पंजाब पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देकर रूपये ठगते थे। यकिन दिलाने के लिए अपना आई कार्ड और तब भी यकिन ना हो तो रूपये के बदले कुछ दिन बाद का चेक दे देते थे। ताकि काम ना हो सके तो लोग अपना पैसा निकलवा ले। लेकिन जब चेक बैंक में डालते तो कुलविंदर के नाम से कोई अकाउंट ही नही होता। पुलिस की जांच में पता चला है कि कुलविंदर पर पहले भी कई मामले दर्ज है।
पुलिस के हाथ कुलविंदर के साथ मिलकर फर्जीवाडा करने वाली महिला का फोटो लग चुका है। हालांकि अभी तक पुलिस अमरदीप कौर तक नही पहुंच सकी है। पुलिस को तलाश अमरदीप की सरगर्मी से तलाश है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी से इनके फर्जीवाडे के कुछ मामले खुल सकते है।
बहन का सौदा-गाजियाबाद
गाजियाबाद के उस शख्स ने लगाई है... रिश्तों की कीमत.. वो बेच रहा है खून के रिश्ते को... उसे जरूरत है खरीददार की। सुनने में ये भले ही अजीब लग रहा हो... लेकिन हम आपको बता दें कि ये सौ फिसदी सच है। गाजियाबाद के उस शख्स ने रिश्तों की कीमत लगाई है पचास हजार रूपये। जिस रिश्ते को उसने बेचा है... वो विश्वास का है... अपनेपन का अहसास कराता है। लेकिन चंद रूपयों के आगे वो इस कदर झुका की...रिश्तों के मायने ही भूल गया।
चंद रूपयों के लिए राजू नाम के इस शख्स के लिए रिश्तें बेमानी हो गए। जब पचास हजार रूपये की चमक दिखी तो भूल गया कि रिश्तों के मायने क्या होते है। राजू पर जो आरोप लगे है वो किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देंगें। राजू ने सौदा किया है रिश्तों का..सौदा उस लडकी का जो इसकी कलाई पर राखी बांधती.. इसे भाई कहती। लेकिन रक्षाबंधन पर दिए वचन को राजू चंद पलों में भूल गया। और इसने कर दिया अपनी ही बहन का पचास हजार रूपये में सौदा। पुलिस ने राजू और इसकी बहन के खरीददार चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जानकारी मिली थी कि गाजियाबाद के लोनी इलाके में लडकी की खरीद-फरोख्त की जा रही है। पुलिस ने इलाके के मकान पर छापा मारकर लडकी के भाई और चार खरीददारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को पता चला कि लडकी का सौदा पचास हजार रूपये में तय हुआ था।
राजू पर बेहद गंभीर आरोप लगे है.. हालांकि वो इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। राजू के मुताबिक वो तो अपनी बहन को शादी के लिए लाया था। और जिन चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है वो लडकी को देखने के लिए आए थे। वहीं गिरफ्तार किया गए बुजुर्ग के मुताबिक बेटे के अपाहिज होने की वजह से वो शादी के लिए आए थे। बेटे के अपाहिज होने की वजह से ही शायद लडकी को पचास हजार रूपये में खरीदने की बात हो रही थी।
इस मामले में दोनों ही पक्ष खरीद फरोख्त की बात से इनकार कर रहे है वहीं सच्चाई सबके सामने है। लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने एक और मामले में आठ साल की लडकी को आसाम लाकर गाजियाबाद में बेचने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को जांच में पता चला कि इम्तियाज और उसका साथी लडकी को आसाम से बहला फुसलाकर लाए थे और इलाहाबाद के एक युवक को बेचने की फिराक में थे। दोनों ही घटनाओं ने साफ कर दिया है कि पैसों की खातिर इनसान किस कदर रिश्तों के मायने भूल जाता है। हालांकि पुलिस लडकियों की खरीद फरोख्त के मामले में पुछताछ कर रही है। हो सकता है आने वाले वक्त मे कुछ और चेहरे बेनकाब हो जाएं।
चंद रूपयों के लिए राजू नाम के इस शख्स के लिए रिश्तें बेमानी हो गए। जब पचास हजार रूपये की चमक दिखी तो भूल गया कि रिश्तों के मायने क्या होते है। राजू पर जो आरोप लगे है वो किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देंगें। राजू ने सौदा किया है रिश्तों का..सौदा उस लडकी का जो इसकी कलाई पर राखी बांधती.. इसे भाई कहती। लेकिन रक्षाबंधन पर दिए वचन को राजू चंद पलों में भूल गया। और इसने कर दिया अपनी ही बहन का पचास हजार रूपये में सौदा। पुलिस ने राजू और इसकी बहन के खरीददार चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को जानकारी मिली थी कि गाजियाबाद के लोनी इलाके में लडकी की खरीद-फरोख्त की जा रही है। पुलिस ने इलाके के मकान पर छापा मारकर लडकी के भाई और चार खरीददारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को पता चला कि लडकी का सौदा पचास हजार रूपये में तय हुआ था।
राजू पर बेहद गंभीर आरोप लगे है.. हालांकि वो इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। राजू के मुताबिक वो तो अपनी बहन को शादी के लिए लाया था। और जिन चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है वो लडकी को देखने के लिए आए थे। वहीं गिरफ्तार किया गए बुजुर्ग के मुताबिक बेटे के अपाहिज होने की वजह से वो शादी के लिए आए थे। बेटे के अपाहिज होने की वजह से ही शायद लडकी को पचास हजार रूपये में खरीदने की बात हो रही थी।
इस मामले में दोनों ही पक्ष खरीद फरोख्त की बात से इनकार कर रहे है वहीं सच्चाई सबके सामने है। लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने एक और मामले में आठ साल की लडकी को आसाम लाकर गाजियाबाद में बेचने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को जांच में पता चला कि इम्तियाज और उसका साथी लडकी को आसाम से बहला फुसलाकर लाए थे और इलाहाबाद के एक युवक को बेचने की फिराक में थे। दोनों ही घटनाओं ने साफ कर दिया है कि पैसों की खातिर इनसान किस कदर रिश्तों के मायने भूल जाता है। हालांकि पुलिस लडकियों की खरीद फरोख्त के मामले में पुछताछ कर रही है। हो सकता है आने वाले वक्त मे कुछ और चेहरे बेनकाब हो जाएं।
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आशियाने को आबादी का इन्तजार एक ओर २७ साल से २५ हज़ार लोगों को आशियाने का इंतजार दूसरी ओर हजारों आशियानों को आबादी का इंतजार----रोहिणी आवासी...
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नरेला ।। दिल्ली के नरेला इलाके में एक युवक की बेरहमी से सिर कुचलकर हत्या कर दी गई, युवक का शव रामदेव चौक के पास एक खाली पड़े प्लाट से बराम...