22 अक्टूबर 2009

लो तेंदुआ आ गया----

लो तेंदुआ आ गया----
बाहरी दिल्ली के जिंदपुर गांव में कुछ दिन पहले अचानक एक तेंदुआ दिखने से इलाके में हडकंप मच गया। जैसे ही लोगो को तेंदुए के मिलने का पता चला हर कोई जंगल के इलाके में दौड पडा। दरअसल अलीपुर इलाके के जिंदपुर गांव के एक फार्म हाउस दुआ दिखा तो फार्म हाउस के मालिक ने खुद ही उसकी वीडियों फिल्म बना ली और फिर मामले की जानकारी तुरंत पुलिस को भी दे दी। हमेशा लेट लतीफी का आरोप झेलने वाली दिल्ली पुलिस ने भी पूरे मामले को पूरी गंभीरता से लिया। सूचना मिलने के चंद मिनटों बाद ही पुलिस मौके पर पहुंच गई माने तेंदुए को चुटकियों में पकड कर उसे सलाखों के पीछे पहुंचा देगी। पुलिस के पहुंचने पर हालांकि फार्म हाउस के मालिक ने राहत की सांस ली। लेकिन फार्म हाउस में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर वो भी हैरान परेशान थे। चलो फिर क्या था हर कोई तेंदुए की वीडियों को देखने के लिए इतना बेताब मानो कभी तेंदुए को देखा ही नही हो। तेंदुए को देखने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक तो खुद पुलिस के जवान ही थे। वीडियों देखने के बाद साफ हो गया कि जिस जानवर पर इतना घमासान मचा है वो सही में तेंदुआ है इस बात की तस्दीक वाइलड लाईफ विभाग ने भी कर दी। लेकिन अब जितना अहम तेंदुए को गिरफ्तार करना था उतना ही ये पता लगाना भी की आखिर इस इलाके में तेंदुआ आया तो आया कैसे। चलिए इस पर बात करने से पहले उस घमासान पर बात कर लेते है जब तेंदुए को लेकर मारामारी रही। राजधानी में तेंदुआ आ जाए और मीडिया को खबर ना हो ऐसा कैसे हो सकता है चंद घंटो में ही तेंदुए के मिलने की खबर मीडिया जगत में भी जंगल की आग की तरह फैल गई। दरअसल उस दिन मुझे दोपहर की शिफ्ट में आफिस पहुंचना था लेकिन बाइक पंचर हो जाने की वजह से मैं आफिस लेट हो रहा था इस दौरान में मित्र का फोन भी आ गया कि अलीपुर के जिंदपुर इलाके में एक तेंदुए को देखा गया है मैं ये सुनकर हैरान रह गया फिर भी खबरी खबर कनफर्म कर रहा था तो मामले को हल्के में लेना सही भी नही था। मैंने खबर को आफिस में बताने के बाद खुद बाइक से ही मौके पर पहुंच गया। कुछ देर बाद ही आफिस से गाडी और कैमरामैन भी पहुंच गया। तबतक दिल्ली पुलिस के करीब 50 जवान हथियारों से लैस होकर फार्म हाउस पर पहुंच गए मानो तेंदुए को यूं पकडा। खैर वन विभाग का इन्तजार किया गया और इस तरह दिन के तीन बज चुके थे। फिर शुरू हुआ तेंदुए का तालाशी अभियान वन विभाग, वाइलड लाइफ और दिल्ली पुलिस तीखी नजरों से तेंदुए को तालाश रहे थे। कोई दूर से कोई पास से अचानक तालाश रूकी कुछ पंजों के निशान पर आकर। आखिरकार अंधेरा हो गया तो सर्च आपरेशन को भी रोकना पडा। अगले दिन दोबारा से तालाश शुरू हुई लेकिन पंजो के अलावा नतीजा कुछ नही निकला। अधिकारी तो तालाश में लगे थे ही उनसे कहीं ज्यादा मौके पर मौजूद पत्रकारों की नजरे तेंदुए को तालाश रही थी भला चौबीस घंटे से एक ही तो विजुअल पर चैनल खबर को ठोक बजाकर चला रहे थे। अब कुछ नया भी तो चाहिए था भई आफिस भी तेंदुआ पकडे जाने की बाट जोह रहा था। हर घंटे बाद एक ही सवाल तेंदुआ मिला क्या। लगातार 48 घंटे तक पुलिस प्रशासन के साथ साथ पत्रकार महोदय भी तेंदुए की तालाश करते रहे लेकिन आखिरकार हाथ कुछ नही लगा। तो पत्रकारों को भी अपना बोरिया बिस्तरा समेटना पडा। अब तेंदुआ जितना बिकना था बिक चुका। अधिकतर न्यूज चैनलस् ने लाल गोला लगाकार दर्शको को दिखा ही दिया की देख लो यही है तेंदुआ। आखिरकार 48 घंटे तक चला तेंदुए और प्रशासन का ड्रामा था खूब मजेदार।

12 सितंबर 2009

बम धमाके और आंसू




एक साल बीत गया-- आंखो के आंसू सूख गए-- फिर भी ना जाने क्यू जवां बेटे की याद नही जाती। ना जाने हर बार क्यूं जिंदा होती है उसकी यादें ये हाल उस बुजुर्ग का है जिसने 13 सिंतम्बर सन 2008 की उस खौफनाक शाम को अपने जवान बेटे को गंवा दिया। दिन शानिवार. समय शाम के 5.30 मिनट ,और 24 मिनट में दिल्ली में पांच धमाके ।थर्रा गई दिल्ली,.... रुक गई सासें,....थम गया आसमा।27लोग हमेशा के लिए –हमेशा के लिए मौत के आगोश में चले गए। 127 घायल हुए.....इन धमाकों में किसी के सिर से बड़ो का साया हटा ....तो किसी के भाई की कलाई सूनी हुई.......किसी को कोख उजड़ी......हादसे के एक साल बीत जाने के बाद भी लोग उस काले दिन को याद कर आज सिहर उठते है।......जिस दिन उनकी दुनिया उजड़ी थी।पहला धमाका करोलबाग की गफ्फार मार्किट में हुआ। यहां बम एक आटों में रखा था। जिसमे एक के बाद एक दो धमाके हुए।दूसरा धमाका दिल्ली का दिल कहे जाने वाले क्नॉट प्लेस में बाराखम्बा मैट्रों स्टेशन के बाहर रखे कूड़ेदान में हुआ।और तीसरा धमाका दिल्ली सबसे पाश इलाका कहे जाने वाले ग्रैटर कैलाश की मार्किट में हुआ। यहां पर बम एक साइकिल के हैंडल में लटके लंच बाक्स में रखा था। दहशत गर्दों ने धमाका करने से पहले मीड़िया को एक मेल भी किया था। जिसमे धमाका करने की बात कि गई थी। लेकिन जब तक पुलिस उस मेल को समझ पाती । तब तक नापाक इरादे लिए आए आतकियों ने वारदात को अंजाम दे दिया था। देखते देखते चारों और काला धुआ....सिर्फ चीख पुकार सुनाई पड़ी रही थी।लोगों अपनी जान बचा कर भाग रहे थे।कुछ लोगों की आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई ...और जो इस धमाके में बच गये ....उन्हें मानों नई जिदंगी मिल गई।इस बम धमाके की जिम्मेदारी इड़ियन मुजाहिद्दीन ने ली।धमाकों की साजिश सरहद पार रची गई थी। साजिश रचने वालों में रियाज बट्टल,...आमिर रजा खान.......अबू अलकामा जैसे आतंकी शामिल थे। इनके 16 साथी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।हालाकि पुलिस ने इनको पकड़ने के लिए रखे इनाम को एक लाख से पांच लाख कर दिया है।पुलिस इन को पकड़ने के लिए छापेमारी करती रही। लेकिन उसके हाथ कुछ नही लगा।पुलिस को 19 सितम्बर सन 2008 को.............खुफिया जानकारी मिली की दिल्ली के जामिया इलाके के एक घर में कुछ आतकंवादी छिपे हुए है।मौके पर पहुची पुलिस से उनकी मुठभेड़ हो गई .....जिसमें इड़ियन मुजाहीद्दीन के दो आतकवादी आतिफ.,और मौ साजिद मारे गए। इस मुठभेंड़ ने दिल्ली पुलिस ही बल्कि पूरे मुल्क ने एक वीर सपूत मोहन चंद शर्मा को खो दिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 22 मई 2008 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से हूजी के आंतकवादी अदुर रहमान को गिरफ्तार किया। जिससे पूछताछ के बाद पता चला कि उसने जनकपुरी की एक मजिस्द में तीन किलो आरडीएक्स ..5 डेटोनेटर..1 टाईमर छिपा कर रखा हुआ है।इसने बताया कि सरहद पार बैठे नाटा ने राकी नाम के व्यक्ति को 7 किलों आरडीएक्स के साथ दिल्ली में दखिल हो चुका है ।लेकिन आज तक ना तो राकी का पता चला और ना ही आरडीएक्स ।यानी दिल्ली अभी भी बारुद के ढेर पर बैठी है। शायद आज भी खुद को दिल्ली में महफूज महसुस करना खुद के साथ बेमानी होगी।

14 अगस्त 2009

तैयार है हम





स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए खुफिया तंत्र को मिली संभावित आतंकी हमलों की जानकारी के मद्देनजर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर दिया गया है।हजारों की संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों और अर्धसैनिक बलों को दिल्ली और दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है। खास कर लाल किले के इर्दगिर्द सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि आतंकियों के नापाक मंसूबो को कामयाब नहीं होने ।आतंकियों के नापाक मंसबो से निपटने के लिए 175 कम्पनियों की लगाया है। लालकिले के आस-पास 12,000हजार जवानों को तैनाती की गई है। किसी भी आतंकी वारदात पर नजर रखने के लिए लाल किले के अंदर और बाहर 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।शांति वन से लाल किले तक पहुंचने वाले रास्ते पर हाईटेक किस्म के कैमरे लगाए गए है...जो रात के अंधरे में भी काम करगें। लाल किले को आठ अगस्त से 15 अगस्त तक विदेशी पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। लाल किले के प्राचीर और उसके आस पास की बहुंमजिली इमांरतों के साथ नई दिल्ली के वीवीआईपी रुट पर शार्प शूटरों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है ।हवाई हमलों से निपटने के लिए 25 एटी क्राफट के साथ जवानों को लगया गया है। सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रही हैं। सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के आस पास की दुकानों को सील कर दिया है। आतंकियों की निशाना दिल्ली पर होता है इसके मद्धेनजर रखते हुए राजधानी को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। दिल्ली की सीमाओं को 14अगस्त की रात से ही सील कर दिया जाएगा।


10 अगस्त 2009

भरोसे का खून



गुडगांव के एक कॉल सैन्टर में काम करने वाली लडकी ने अपने एक सहकर्मी पर बलात्कार का आरोप लगाया है लडकी का आरोप है की उसके सहयोगी ने पहले तो कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला पिला दिया और बाद में बलात्कार किया। पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज कर आरोपी प्रशांत राणा को गिरफ्तार कर लिया है। एक बार फिर टुट गया भरोसा-- बिखर गए रिश्ते-- दोस्त ही बन गया हैवान-- अपनी ही दोस्त की अस्मत को कर दिया तार तार-- और उसने कर दिया उस भरोसे का खून -- पुलिस थाने में मौजूद इस शख्स पर इल्जाम है बलात्कार का-- बलात्कार उस लडकी का जो इस पर अपनो से ज्यादा भरोसा करती-- इसे अपना हमदर्द समझती--...प्रशांत राणा नाम का यह शख्स गुडगाँव के एक काँल सेटर मे काम करता है ..प्रशांत पर आरोप है कि उसने अपनी ही आफिस मे काम करने वाली एक लडकी के साथ बलात्कार किया .. वारदात की शिकार लडकी के मुताबिक कंपनी की कैब से प्रशांत राणा उसके घर ज्वाला हेड़ी इलाके में रात के करीब 8 बजे ड्राप किया। बुद्ध विहार का रहनेवाला प्रशांत भी वहीं उतर गया। इसके बाद उसने नशीली चीज मिली हुई कोल्ड ड्कि पिलाई...फिर उसे कहीं अनजान जगह ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। -लड़की किसी तरह वहां से ऑटो से घर लौटी। अगले दिन जब उसे होश आया तो पता चला की उसकी अस्मत लूट चुकी है-- बाद में इसने खुद थाने जाकर मामले की शिकायत पुलिस से की ..लडकी को मेडिकल के लिए अस्पताल भेजा गया जहाँ मेडिकल रिपोर्ट मे उसके साथ बलात्कार की पुष्टि हो गई...इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी प्रशात राणा को गिरफ्तार कर लिया-- पुलिस गिरफ्त में आने के बाद प्रशांत खुद को बेकसूर बता रहा है इसके मुताबिक ये दोनो की सहमति से हुआ था।बहरहाल आरोपी तो पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है मगर इस वारदात ने एक बार फिर महिलाओ की सुरक्षा का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस की कलई खोल दी है।

09 अगस्त 2009

आतंक का साया

लश्कर ए तैयबा के बाद अब हिजबुल मुजाहिदीन ने दिल्ली में अपने आतंकी भेज कदम जमाने शुरू कर दिए हैं।इन आतंकवादियों को सीधे आदेश मिलता है हिजबुल चीफ हाफिज मोहम्मद सईद से।ये खुलासा किया है हिजबुल के दो आतंकवादियों ने जिन्हे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ६ अगस्त की रात गिरफ्तार किया।इन आतंकवादियों के निशाने पर दिल्ली में कौन कौन सी जगह थी इस बात की तफ्तीश पुलिस कर रही है।एक तरफ लश्कर का गुर्गा तो दूसरी तरफ हिजबुल मुजाहिदीन के दो एजेंट। दोनों का मकसद एक था ....दिल्ली में तबाही मचाना। भले ही खूंखार आतंकवादी मोहम्मद उमर मदनी सलाखों के पीछे है॥लेकिन उसके गुर्गे और दूसरे आतंकवादी संगठन दिल्ली में आतंक मचाने के लिए अपने नापाक मंसूबों में लगे हैं। दिल्ली मे मौत का खेल खेलने के लिए दो आतंकी तो पहले ही घुस चुके थे। अभी वो दिल्ली की सड़कों के चक्कर ही लगा रहे थे कि स्पेशल सेल ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। स्वतंत्रता दिवस के ठीक पहले ये लोग दिल्ली में भारी तबाही मचाने के मकसद से आए। तबाही कहां और कैसे मचानी है इसका सीधा आदेश इनका खूंखार आका सैयद सलाउद्दीन दे रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि दो आतंकी दिल्ली में घुस चुके है और स्वतंत्रता दिवस से पहले किसी बडी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। दिल्ली पुलिस के लिए इससे बडा झटका और क्या हो सकता था पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कि और फिर खौफनाक मंसुबो के साथ दिल्ली आए जावेद और आसिफ नाम के दोनो आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी मंशा दिल्ली के इलाकों से वाकिफ होने का था। लेकिन ये स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ गए। पुलिस ने आतंकियों के पास से दो एके 47, दो हैंड ग्रेनेड और कुछ नकली आई कार्ड भी बरामद किये। पुलिस की माने तो ये लोग पिछले कई सालों से ये युवाओं को धर्म के नाम पर भड़का रहे थे। गिरफ्तार किए गए दोनो आतंकियों को अदालत में पेश किया गया। जहां से इन्हे 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। पुलिस इस दौरान इनके नेटवर्क और पाकिस्तानी आकाओं के बारे में पूछताछ करेगी।

07 अगस्त 2009

आतंक की साजिश



राजधानी दिल्ली से गुरुवार की रात गिरफ्तार किए गये हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने आतंक की ट्रेनिंग पाकिस्तान से ली थी। पकडे गए दोनो आतंकियों का मकसद 15 अगस्त से ठीक पहले आंतकी वारदात को अंजाम देकर राजधानी में दहशत फैलाना था। 29 जुलाई को ये आतंकी गोरखपुर से होते हुए दिल्ली पहुंचे थे। पाकिस्तान में फिर रची गई आतंक की साजिश-- दिल्ली को बनाया गया निशाना-- लेकिन साजिश हो गई नाकाम और बच गई राजधानी। गिरफ्त में आ गए दहशतगर्द-। इन दहशतगर्दो ने जो कुछ ब्यां किया वो बेहद खतरनाक है। इनका मकसद दिल्ली को एक बार फिर दहला देना था। इसके लिए इन्होने बाकायदा आतंक की ट्रेनिंग भी ली थी। आतंक की ये ट्रेनिंग दी गई पाकिस्तान में-- वहीं रची गई दिल्ली को खून से रंगने की साजिश। पुलिस के मुताबिक इन्होने पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में आतंकी ट्रेनिंग ली थी जावेद और आसिफ इन दोनो को जेहाद के नाम पर आतंक फैलाने के लिए तैयार किया गया था। कुपवाडा का रहने वाला आसिफ 2003 में पाकिस्तान गया वहां उसकी मुलाकात सैय्यद सलाउद्दीन से हुई-- और फिर शुरू हो गई जेहाद के नाम पर आतंक की ट्रेनिंग। दूसरा आतंकी जावेद का भी आतंकी सफर इससे मिलता जुलता है। जावेद 1999 में पाक पहुंचा था जहां उसका भी संपर्क सैय्यद सलाउद्दिन से हुआ । सलाउद्धिन ने इसे भी आतंक फैलाने के लिए तैयार कर लिया। पिछले महिने की 29 तारीख को दोनो की मुलाकात उसने अपने आका सेर सलाउद्धिन से करायी। उसके बाद फर्जी पासपोर्ट के जरिए दोनो को दिल्ली दहलाने के लिए भेजा। दोनों कई बार नेपाल के रास्ते भारत आये । इस बार भी वो नेपाल होकर शाहिद नाम के शख्स से मिलने आए थे।हाल ही में स्पेशल सेल ने लश्कर के आतंकी मोहम्मद उमर मदनी को गिरफ्तार किया था। हिज्बुल के गुर्गो की गिरफ्तारी से साफ है कि राजधानी पर आतंकी साया किस कदर मडंरा रहा है।

02 अगस्त 2009

खौफजदा राजधानी

राजधानी के लोग इन दिनो खौफ के साए में जी रहे है हर वक्त अनहोनी का डर लोगो की परेशानी का सबब बना हुआ है। पिछले 15 दिनो में हुई दर्जन भर से ज्यादा लूट की वारदातो ने दिल्ली पुलिस की नींद हराम कर रखी है। तो व्यापारीयों को खुद की चिंता सताने लगी है बदमाश इस कदर बेखौफ है की जब चाहे किसी भी वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते है पुलिस है कि हाथ ही मलती रह जाती है। 27 जुलाई की बात करें तो राजधानी में बेखौफ बदमाशो ने सरेआम दिन दहाडे बैंक कर्मी से साढे नो लाख की लूट की वारदात को अंजाम दिया। और बैंक कर्मी को गोली मार कर भाग गए। पुलिस ने पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कही-- हालांकि पुलिस की कार्यवाही रंग लाई और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चार दिन बाद ही बदमाशो को दिल्ली के अलग अलग इलाको से गिफ्तार कर लिया गया साथ ही लूट के पैसे भी बरामद हो गये । पुलिस ने खूब वाहवाही लूटी-- मगर उसके कबाद जो कुछ हुआ उसने पुलिस के सामने एक बार फिर से मुश्बिते ख़डी कर दी। लूट की इस वारदात को सुलझे महज एक दिन ही हुआ था की बेखौफ बदमाशो ने एक ही रात में दिल्ली के दो अलग अलग इलाको में लूट की वारदात को अंजाम दे दिया।हर बार की तरह फिर पुलिस की जांच शुरू हुई-- लेकिन लूटेरो का कोई सुराग हाथ नही लग सका। तभी दिन के वक्त यानि 1 जुलाई को फिर लूटेरो ने बत्रा अस्पताल के कैशियर से साढे बारह लाख रूपये लूट लिए-- लेकिन बदमाशो का कोई सुराग नही मिला। आखिरकार सवाल ये है कि दिन ब दिन बढ रही वारदात के लिए जिम्मेदार है कौन