14 अगस्त 2009

तैयार है हम





स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए खुफिया तंत्र को मिली संभावित आतंकी हमलों की जानकारी के मद्देनजर दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर दिया गया है।हजारों की संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों और अर्धसैनिक बलों को दिल्ली और दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है। खास कर लाल किले के इर्दगिर्द सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस का दावा है कि आतंकियों के नापाक मंसूबो को कामयाब नहीं होने ।आतंकियों के नापाक मंसबो से निपटने के लिए 175 कम्पनियों की लगाया है। लालकिले के आस-पास 12,000हजार जवानों को तैनाती की गई है। किसी भी आतंकी वारदात पर नजर रखने के लिए लाल किले के अंदर और बाहर 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।शांति वन से लाल किले तक पहुंचने वाले रास्ते पर हाईटेक किस्म के कैमरे लगाए गए है...जो रात के अंधरे में भी काम करगें। लाल किले को आठ अगस्त से 15 अगस्त तक विदेशी पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। लाल किले के प्राचीर और उसके आस पास की बहुंमजिली इमांरतों के साथ नई दिल्ली के वीवीआईपी रुट पर शार्प शूटरों के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा गार्डों की तैनाती की गई है ।हवाई हमलों से निपटने के लिए 25 एटी क्राफट के साथ जवानों को लगया गया है। सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रही हैं। सुरक्षा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किले के आस पास की दुकानों को सील कर दिया है। आतंकियों की निशाना दिल्ली पर होता है इसके मद्धेनजर रखते हुए राजधानी को पूरी तरह से छावनी में तब्दील कर दिया गया है। दिल्ली की सीमाओं को 14अगस्त की रात से ही सील कर दिया जाएगा।


10 अगस्त 2009

भरोसे का खून



गुडगांव के एक कॉल सैन्टर में काम करने वाली लडकी ने अपने एक सहकर्मी पर बलात्कार का आरोप लगाया है लडकी का आरोप है की उसके सहयोगी ने पहले तो कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिला पिला दिया और बाद में बलात्कार किया। पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज कर आरोपी प्रशांत राणा को गिरफ्तार कर लिया है। एक बार फिर टुट गया भरोसा-- बिखर गए रिश्ते-- दोस्त ही बन गया हैवान-- अपनी ही दोस्त की अस्मत को कर दिया तार तार-- और उसने कर दिया उस भरोसे का खून -- पुलिस थाने में मौजूद इस शख्स पर इल्जाम है बलात्कार का-- बलात्कार उस लडकी का जो इस पर अपनो से ज्यादा भरोसा करती-- इसे अपना हमदर्द समझती--...प्रशांत राणा नाम का यह शख्स गुडगाँव के एक काँल सेटर मे काम करता है ..प्रशांत पर आरोप है कि उसने अपनी ही आफिस मे काम करने वाली एक लडकी के साथ बलात्कार किया .. वारदात की शिकार लडकी के मुताबिक कंपनी की कैब से प्रशांत राणा उसके घर ज्वाला हेड़ी इलाके में रात के करीब 8 बजे ड्राप किया। बुद्ध विहार का रहनेवाला प्रशांत भी वहीं उतर गया। इसके बाद उसने नशीली चीज मिली हुई कोल्ड ड्कि पिलाई...फिर उसे कहीं अनजान जगह ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। -लड़की किसी तरह वहां से ऑटो से घर लौटी। अगले दिन जब उसे होश आया तो पता चला की उसकी अस्मत लूट चुकी है-- बाद में इसने खुद थाने जाकर मामले की शिकायत पुलिस से की ..लडकी को मेडिकल के लिए अस्पताल भेजा गया जहाँ मेडिकल रिपोर्ट मे उसके साथ बलात्कार की पुष्टि हो गई...इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी प्रशात राणा को गिरफ्तार कर लिया-- पुलिस गिरफ्त में आने के बाद प्रशांत खुद को बेकसूर बता रहा है इसके मुताबिक ये दोनो की सहमति से हुआ था।बहरहाल आरोपी तो पुलिस की गिरफ्त में आ चुका है मगर इस वारदात ने एक बार फिर महिलाओ की सुरक्षा का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस की कलई खोल दी है।

09 अगस्त 2009

आतंक का साया

लश्कर ए तैयबा के बाद अब हिजबुल मुजाहिदीन ने दिल्ली में अपने आतंकी भेज कदम जमाने शुरू कर दिए हैं।इन आतंकवादियों को सीधे आदेश मिलता है हिजबुल चीफ हाफिज मोहम्मद सईद से।ये खुलासा किया है हिजबुल के दो आतंकवादियों ने जिन्हे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ६ अगस्त की रात गिरफ्तार किया।इन आतंकवादियों के निशाने पर दिल्ली में कौन कौन सी जगह थी इस बात की तफ्तीश पुलिस कर रही है।एक तरफ लश्कर का गुर्गा तो दूसरी तरफ हिजबुल मुजाहिदीन के दो एजेंट। दोनों का मकसद एक था ....दिल्ली में तबाही मचाना। भले ही खूंखार आतंकवादी मोहम्मद उमर मदनी सलाखों के पीछे है॥लेकिन उसके गुर्गे और दूसरे आतंकवादी संगठन दिल्ली में आतंक मचाने के लिए अपने नापाक मंसूबों में लगे हैं। दिल्ली मे मौत का खेल खेलने के लिए दो आतंकी तो पहले ही घुस चुके थे। अभी वो दिल्ली की सड़कों के चक्कर ही लगा रहे थे कि स्पेशल सेल ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। स्वतंत्रता दिवस के ठीक पहले ये लोग दिल्ली में भारी तबाही मचाने के मकसद से आए। तबाही कहां और कैसे मचानी है इसका सीधा आदेश इनका खूंखार आका सैयद सलाउद्दीन दे रहा था। पुलिस को सूचना मिली थी कि दो आतंकी दिल्ली में घुस चुके है और स्वतंत्रता दिवस से पहले किसी बडी वारदात को अंजाम देने की फिराक में है। दिल्ली पुलिस के लिए इससे बडा झटका और क्या हो सकता था पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू कि और फिर खौफनाक मंसुबो के साथ दिल्ली आए जावेद और आसिफ नाम के दोनो आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी मंशा दिल्ली के इलाकों से वाकिफ होने का था। लेकिन ये स्पेशल सेल के हत्थे चढ़ गए। पुलिस ने आतंकियों के पास से दो एके 47, दो हैंड ग्रेनेड और कुछ नकली आई कार्ड भी बरामद किये। पुलिस की माने तो ये लोग पिछले कई सालों से ये युवाओं को धर्म के नाम पर भड़का रहे थे। गिरफ्तार किए गए दोनो आतंकियों को अदालत में पेश किया गया। जहां से इन्हे 10 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। पुलिस इस दौरान इनके नेटवर्क और पाकिस्तानी आकाओं के बारे में पूछताछ करेगी।

07 अगस्त 2009

आतंक की साजिश



राजधानी दिल्ली से गुरुवार की रात गिरफ्तार किए गये हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने आतंक की ट्रेनिंग पाकिस्तान से ली थी। पकडे गए दोनो आतंकियों का मकसद 15 अगस्त से ठीक पहले आंतकी वारदात को अंजाम देकर राजधानी में दहशत फैलाना था। 29 जुलाई को ये आतंकी गोरखपुर से होते हुए दिल्ली पहुंचे थे। पाकिस्तान में फिर रची गई आतंक की साजिश-- दिल्ली को बनाया गया निशाना-- लेकिन साजिश हो गई नाकाम और बच गई राजधानी। गिरफ्त में आ गए दहशतगर्द-। इन दहशतगर्दो ने जो कुछ ब्यां किया वो बेहद खतरनाक है। इनका मकसद दिल्ली को एक बार फिर दहला देना था। इसके लिए इन्होने बाकायदा आतंक की ट्रेनिंग भी ली थी। आतंक की ये ट्रेनिंग दी गई पाकिस्तान में-- वहीं रची गई दिल्ली को खून से रंगने की साजिश। पुलिस के मुताबिक इन्होने पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में आतंकी ट्रेनिंग ली थी जावेद और आसिफ इन दोनो को जेहाद के नाम पर आतंक फैलाने के लिए तैयार किया गया था। कुपवाडा का रहने वाला आसिफ 2003 में पाकिस्तान गया वहां उसकी मुलाकात सैय्यद सलाउद्दीन से हुई-- और फिर शुरू हो गई जेहाद के नाम पर आतंक की ट्रेनिंग। दूसरा आतंकी जावेद का भी आतंकी सफर इससे मिलता जुलता है। जावेद 1999 में पाक पहुंचा था जहां उसका भी संपर्क सैय्यद सलाउद्दिन से हुआ । सलाउद्धिन ने इसे भी आतंक फैलाने के लिए तैयार कर लिया। पिछले महिने की 29 तारीख को दोनो की मुलाकात उसने अपने आका सेर सलाउद्धिन से करायी। उसके बाद फर्जी पासपोर्ट के जरिए दोनो को दिल्ली दहलाने के लिए भेजा। दोनों कई बार नेपाल के रास्ते भारत आये । इस बार भी वो नेपाल होकर शाहिद नाम के शख्स से मिलने आए थे।हाल ही में स्पेशल सेल ने लश्कर के आतंकी मोहम्मद उमर मदनी को गिरफ्तार किया था। हिज्बुल के गुर्गो की गिरफ्तारी से साफ है कि राजधानी पर आतंकी साया किस कदर मडंरा रहा है।

02 अगस्त 2009

खौफजदा राजधानी

राजधानी के लोग इन दिनो खौफ के साए में जी रहे है हर वक्त अनहोनी का डर लोगो की परेशानी का सबब बना हुआ है। पिछले 15 दिनो में हुई दर्जन भर से ज्यादा लूट की वारदातो ने दिल्ली पुलिस की नींद हराम कर रखी है। तो व्यापारीयों को खुद की चिंता सताने लगी है बदमाश इस कदर बेखौफ है की जब चाहे किसी भी वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते है पुलिस है कि हाथ ही मलती रह जाती है। 27 जुलाई की बात करें तो राजधानी में बेखौफ बदमाशो ने सरेआम दिन दहाडे बैंक कर्मी से साढे नो लाख की लूट की वारदात को अंजाम दिया। और बैंक कर्मी को गोली मार कर भाग गए। पुलिस ने पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की बात कही-- हालांकि पुलिस की कार्यवाही रंग लाई और दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने चार दिन बाद ही बदमाशो को दिल्ली के अलग अलग इलाको से गिफ्तार कर लिया गया साथ ही लूट के पैसे भी बरामद हो गये । पुलिस ने खूब वाहवाही लूटी-- मगर उसके कबाद जो कुछ हुआ उसने पुलिस के सामने एक बार फिर से मुश्बिते ख़डी कर दी। लूट की इस वारदात को सुलझे महज एक दिन ही हुआ था की बेखौफ बदमाशो ने एक ही रात में दिल्ली के दो अलग अलग इलाको में लूट की वारदात को अंजाम दे दिया।हर बार की तरह फिर पुलिस की जांच शुरू हुई-- लेकिन लूटेरो का कोई सुराग हाथ नही लग सका। तभी दिन के वक्त यानि 1 जुलाई को फिर लूटेरो ने बत्रा अस्पताल के कैशियर से साढे बारह लाख रूपये लूट लिए-- लेकिन बदमाशो का कोई सुराग नही मिला। आखिरकार सवाल ये है कि दिन ब दिन बढ रही वारदात के लिए जिम्मेदार है कौन

22 जून 2009

राजधानी में कत्ल

दिल्ली के ईस्ट आँफ कैलाश में 70 साल की बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी गई। महिला की दो दिन पुरानी लाश उसी के घर से बरामद हुई। घर में अकेली रहने वाली महिला का नाम बसन्ती था। ये लाश 70 साल की बसन्ती की है जो दिल्ली के सबसे पाश माने जाने वाले इलाके ईस्ट आफ कैलाश में अकेली रहती। लेकिन किसी ने उसकी हत्या कर दी। बसन्ती की लाश उसी के घर से रविवार की रात करीब आठ बजे बरामद हुई। घर से कुछ कीमती सामान भी गायब मिला-- बसन्ती के चार बेटे है फिर भी वो अकेली रहती। घटना का पता उस वक्त चला जब बुजुर्ग का पौता दादी से मिलने पहुँचा तो दरवाजा बन्द था। हेमन्त ने दरवाजा खोलकर देखा तो उसकी दादी की लाश नीचे पडी थी और उसके शरीर पर चोट के निशान थे। बसन्ती को अन्तिम बार दो दिन पहले देखा गया था शव हालत देखकर लगता है किसी ने बसन्ती की दो दिन पहले ही कत्ल कर दिया गया हो।दो दिन तक बसन्ती की लाश घर में पडी रही और किसी को पता नही चला। बसन्ती के चार बेटे है लेकिन उसके पास किसी का भी आना जाना नही रहता था। परिजनों की माने तो बसन्ती के पास काफी पैसा और प्रोपर्टी थी हो सकता है लूट के इरादे से किसी ने कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया हो। जिस तरह से कत्ल की इस वारदात को अंजाम दिया गया है उससे साफ है कि कातिल कोई जानकार रहा होगा। जो भी हो राजधानी में हुई बुजुर्ग की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खडे कर दिए है।

21 जून 2009

ख़ुद के जाल में शिकारी

वो अपनी बीवी से नफरत करता-- वो नही चाहता कि उसकी बीवी उसके सामने आए--- उसपर नफरत का रंग कुछ इस कदर चढा कि उसनें अपनी पत्नी को हमेशा के लिए दूर करने की ठान ली। 50 हजार में बीवी के कत्ल का सौदा भी कर लिया।मगर नफरत की इस जंग में शिकारी खुद शिकार हो गया। हरिद्वार का बाबूलाल अपने ही बिछाए जाल में फंसकर अपनी जान गंवा बैठा। बाबूलाल का शव 15 जून को हरिद्वार के एक होटल से बरामद हुआ। पुलिस ने प्रवीण और बिट्टू नाम के इन दो लोगों को बाबूलाल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। जिस होटल से बाबूलाल का शव मिला वहां उस रात ये तीनों गए थे। होटल के कमरे में तीनों ने खूब शऱाब पी। इसी दौरान उनके बीच कुछ कहासुनी हो गई जिसके बाद प्रवीण और बिट्टू ने बाबूलाल को मारना शुरु कर दिया। शराब के नशे में इन दोनों ने उसे इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। इसके बाद ये दोनों भाग गए। अगल दिन जब होटल का वेटर कमरे में आया तो उसने बाबूलाल की ळाश देखी जिसके बाद पुलिस को बुलाया गया। यहां तक ये कहानी शराब के नशे में हुई मारपीट की लगती है लेकिन असल में मामला कुछ और है। पुलिस के मुताबिक बाबूलाल का अपनी बीवी से झगड़ा चल रहा था। इस झगड़े के कारण वो अपनी बीवी को देखना भी पसंद नहीं करता था। एक दिन बाबूलाल ने अपनी पत्नी विनिता को अपने रास्ते से हमेशा के लिए हटाने का फैसला किया। बाबूलाल ने प्रवीण और बिट्टू को 50 हज़ार रुपये में अपनी बीवी के क़त्ल की सुपारी दे दी। बाबूलाल ने एडवांस के रुप में इन दोनों को 20 हज़ार रुपये दिए और काम जल्दी करने को कहा। कर्जदारों के रोज रोज के ताने से परेशान प्रवीण और बिट्टू ने बाबूलाल से पैसे तो ले लिए लेकिन हत्या करने से टालमटोल कर ने लगे। बाबूलाल ने दबाव बढ़ाया तो दोने एक दिन उसके घर विनीता का क़त्ल करने पहुंच तो गए लेकिन उसे देखकर इनका इरादा बदल गया। न जाने क्यों ये दोनों उसकी हत्या नहीं कर पाए और वापस लौट गए। इधऱ बाबूलाल का गुस्सा बढ़ता जा रहा था। इन पर दबाव बनाने के लिए ही प्रवीण और बिट्टू को बाबूलाल ने होटल में बुलवाया। शराब के नशे में जब दोनों बाबूलाल इनपर गुस्सा दिखाने लगा तो दोनों ने उसी की पिटाई शुरु कर दी जिसमें उसकी जान चली गई। बाबूलाल ने अपनी बीवी के लिए जो गड्ढा खोदा था उसमें वो खुद ही गिर गया। पुलिस ने जब जब सख्ती से पूछताछ की तो प्रवीण और बिट्टू ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।बाबूलाल की बीवी के लिए उसकी नफरत ही उसकी मौत की वजह बन गई।