08 दिसंबर 2009
मैजिक पेन से ठगी
वो खुबसूरत तो है ही.. लेकिन उसकी आवाज भी उतनी ही रसीली है कि किसी को भी अपने जाल में फंसा ले। वो एक फोन करती है शिकार खुद ब खुद उसके जाल में फंस जाता है। अगर आप के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है तो संभल जाए। हो सकता है हुस्न की मल्लिका के जाल में कहीं आप भी ना फंस जाए। चंद मिनटों में वो कर देगी आपकी जेब पर हाथ साफ। इस खूबसूरत चेहरे को ज़रा गौर से देखिये ! कई प्राइवेट बैंको के नाम पर इस महिला ने जो कुछ किया वो सुन कर शायद आपके पैरो तले की ज़मीन खिसक जाएगी ! ज़रा याद कीजिये कही कुछ दिन पहले आपको कोई फोन कॉल तो नहीं आई। किसी ने मिठी सी आवाज़ में आपसे लोन लेने के लिए कहा ! यही नहीं आपको लुभावने ऑफर भी दिए गए हो ! अगर ऐसा है तो ज़रूर याद कीजिये की कही उस आवाज़ के जाल में फंसकर आपने बैंक के एजेंट को कोई चेक तो नहीं दे डाला ! अगर ऐसा है तो ये आपकी सबसे बड़ी भूल हो सकती है ! इन दिनों लोन दिलाने के नाम पर कई गैंग सक्रिय है जिसने से एक गिरोह की मास्टरमाइंड है ये महिला। जो अपने गुर्गो की मदद से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रही है। लेकिन हैरानी की बात ये है की अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है ये महिला। गाज़ियाबाद पुलिस अभी तक महिला गिरोह के एक बदमाश विक्रमजीत को ही गिरफ्तार कर पाई है। हुस्न और आवाज की इस मल्लिका का नाम है डिम्पी। जीं हां यही नाम है इसका। लोगो को ठगी का शिकार बनाने का इसका तरीका बेहद शातिराना होता है। दरअसल डिम्पी पहले फोन कर लोगों का अच्छे ऑफर का झांसा देकर लोन दिलाने की बात कहती है। और फिर जब लोग इसकी बातों में फंसकर हामी भर देते है तो डिम्पी अपने गिरोह के सदस्यों को भेजकर लोन से संबंधित कागजात और एक चेक जिसपर लोन दिलावाने की फीस का अमाउंट भरा होता था मंगा लेती। लोन के चक्कर में लोग बेफिक्र होकर चेक दे भी देते। लेकिन कुछ दिन बाद जब बैंक एकांउट चेक करते तो एकाउंट मे पैसा होता ही नही। इस जालसाज के चक्कर में लोग अपना सब कुछ लुटा बैठते है। गाजियाबाद पुलिस को लगातार इस तरह की ठगी की शिकायते मिल रही थी। पुलिस को समझते देर नही लगी की इस तरह की वारदात को कोई शातिर गिरोह अंजाम दे रहा है। पुलिस ने छानबीन की तो गिरोह का एक बदमाश पुलिस के शिंकजे मे आ गया। पुलिस ने विक्रमजीत नाम के इस शातिर के पास से दर्जन भर लोन के फार्म और ग्राहकों के फोटो बरामद किए है। साथ ही इसके पास से फर्जी आईकार्ड भी बरामद हुए है। पुलिस अब ये पता लगाने में लगी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को चूना लगाया है।
झपटमार गिरफ्तार
नोएडा में लगातार हो रही लूटपाट और झपटमारी की घटनाओं ने पुलिस की नाक में दम कर रखा है। पुलिस ने इसी के मद्देनजर झपटमारों के गैंग का पर्दाफाश किया है नोएडा पुलिस ने इस मामले में आधा दर्जन बदमाशों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बदमाशों के पास से चार कार, तीन बाइक और लूट के तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए है। पुलिस गैंग की गिरफ्तारी को बडी कामयाबी मान रही है।लम्बे अर्से से बदमाशों के कारनामों से परेशान नोएडा पुलिस झपटमारों के गिरोह के छ बदमाशों की गिरफ्तारी से राहत महसुस कर रही है। पुलिस गिरफ्त में आए इन बदमाशों ने नोएडा पुलिस के पसीने छुडा रखे थे। पुलिस लम्बे अर्से से इनकी तलाश कर रही थी। दरअसल कुछ समय से नोएडा और आसपास में लूटपाट और झपटमारी की घटनाए आम हो चुकी है। बदमाश बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते है। पुलिस ने इसी के मद्देनजर टीम का गठन किया और एक के बाद एक घटनाओं के अंजाम दे रहे गैंग के आधा दर्जन बदमाशों को धर दबोचा। पुलिस के मुताबिक इनको उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब ये लोग नोएड़ा सेक्टर 63 में लूट की वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग नोएडा सेक्टर 63 में बैठे है और किसी वारदात को अंजाम देने की साजिश कर रहे है। पुलिस ने छापा मारा और सभी को धर दबोचा।. छापा मारी में पुलिस के हाथ चार ही बदमाश लग सके। लेकिन पुलिस ने जब इनसे पूछताछ की तो कुछ और लोगों के नाम भी सामने आए। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर दो और बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके पास से चार कार, तीन मोटर साईकिल, तीन मोबाइल फोन और वारदात में प्रयोग किया जाना वाला एक चाकु भी बरामद किया है। पुलिस को पूछताछ में पता चला की इस गैंग को अंकित आपरेट कर रहा था और बाकि लोग वारदात को अंजाम देने के लिए उसका साथ देते थे। अंकित सीआईएसएफ में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर का बेटा है। नोएडा पुलिस के मुताबिक ये गिरोह आन डिमांड गाडियों की चोरी करता था। यानि पहले गाडी का रंग, मॉडल और कीमत तय होती थी उसके बाद वारदात को अंजाम दिया जाता था। पकडे गए बदमाशों में से विपुल नाम के एक शख्स पर नोएडा पुलिस ने इनाम घोषित कर रखा था। गिरोह के छ बदमाश तो पुलिस के हत्थे चढ गए है लेकिन पुलिस अब इस गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश कर रही है।
27 नवंबर 2009
बेटे का फर्ज
मुझे मेरे पापा से मिलने दो.. ये बात कोई बच्चा कहे तो शायद आपको जरा भी अजीब नही लगेगा लेकिन ये बात कह रहा है एक चालीस साल का आदमी। जिसका हंसता खेलता परिवार है बीवी है बच्चे है वो बार बार यही कहता है कि मुझे पापा है पास जाना है मैं अपने पापा को एक बार देखना चाहता हूं। मुझे ये सब देखकर खुद का बचपन याद आ गया.. दरअसल ये वाक्या उस वक्त का है जब मैं एक न्यूज कवर करने के लिए गया था। जब कुलविंद्र नाम का एक शख्स अपने पिता से मिलने को इतना बेताब था जैसे एक छोटा बच्चा बीन दुध के मां को याद करता है। जब कुलविंद्र की वास्तविकता सामने आई तो कुछ पल के लिए मैं भी हैरान हो गया। दुख ये जानकार हुआ की कुलविंद्र के पिता अब इस दुनिया में नही रहे। और पिछले सात दिन से कुलविंद्र पिता से मिलने की कोशिश कर रहा है। दरअसल 15 साल पहले अपनी बीवी और बेटी के साथ अमेरिका में जा बसे त्रिलोचन की अमेरिका के वर्जिनाया में हुए एक सडक हादसे में मौत हो गई। पिता की लाश सात संमदर पार है और बेटा लगातार वहां जाने की जिद कर रहा है लेकिन वीजा नही मिल रहा है। अब बेटा करे तो क्या करें। ये हकीकत है दिल्ली के वसंत विहार के रहने वाले कुलविंद्र की। कुलविंद्र पिछले सात दिन से अमेरिकी दूतावास के चक्कर लगा रहा है आज कल कभी तो वीजा मिले... पिता की लाश सात दिनों से एक मुर्दा घर में पडी है मां ने जिद लगा रखी है बेटा नही आएगा तो अंतिम संस्कार भी नही होने देगी। बेटा ऐसे दोराहे पर खडा है जहां से उसे कोई रास्ता दिखाई नही दे रहा। दरअसल अमेरिकी दूतावास भी अपने कुछ कायदे कानूनो पर अडा हुआ है। कुलविंद्र के मुताबिक दूतावास का कहना है कि अगर वो अमेरिका गया तो फिर भारत नही लौटेगा इसलिए उसे वीजा नही दिया जा रहा है। पिता के लिए बेटे की तडप और बेटे की तडप क्या होती है आज मैने एक बार फिर अपनी आंखो से देखी है। कौन कहता है कि रिश्तों का प्यार समय के साथ कमजोर हो जाता है कुलविंद्र की कहानी देखकर मुझे पल भर के लिए भी ऐसा अहसास नही हुआ। कुलविंद्र का दर्द उसकी आंखों से साफ झलक रहा था। मेरा बस एक ही सवाल है ऐसे में कुलविंद्र क्या करें मुझे तो इसका जवाब नही सुझ रहा है अगर आप को मिले तो जरूर बता देना।
आपका मित्र
आपका मित्र
08 नवंबर 2009
बेटी का गम
बेटे के लिए सब कुछ कर गुजरने वालो के बारे में आपने खूब सुना होगा, देखा भी होगा। बेटे की चाह में लोग क्या से क्या हो जाते है वो दुनिया की हर रस्म भूल जाते है। उन्हे होती है बस एक बेटे की अदद चाह। लेकिन क्या कभी सुना है एक पिता बेटी के लिए दर-दर भटकता रहे। अगर बेटी नही तो उस पिता को खुद की जिंदगी भी गवारा नही है। दिल दहला देने वाला ये वाक्या है संगरूर के मालेरकोटला इलाके का। मुझे मेरी बेटी लौटा दो-- तुम जो कहोगे मैं करूंगा। मैं हमेशा के लिए तुम्हारी दुनिया से चला जाउंगा। बस तुम मेरी बेटी लौटा दो। वो मेरी बेटी नही--- मेरी जान है। ये दर्दनाक गुहार थी एक पिता की जिसने बेटी के लिए मौत को गले लगा लिया। बेटी को पाने के लिए वो दर-दर भटकता रहा। और जब बेटी ना मिल सकी तो उस बेबस पिता ने जहरीला पदार्थ खाकर खुद को मौत के हवाले कर दिया। भवानीगढ के रहने वाले हैप्पी सिंह की शादी मालेरकोटला गांव की रहने वाली संदीप कौर से हुई थी। दोनो की चार साल की एक बेटी थी लेकिन गांव की पंचायत को संदीप के चरित्र पर शक होने की वजह से उसे गांव से निकाल दिया। संदीप गांव छोडने से पहले अपनी चार साल की बेटी हरमन कौर को भी अपने साथ ले गई। बेटी के जाने के बाद हैप्पी उदास रहने लगा, उसे दिन रात बेटी की याद सताती। एक दिन हैप्पी ने फैसला किया की वो खुद ससुराल जाकर बेटी को वापिस लेकर आएगा। ससुराल में जाने पर हैप्पी ने लाख कोशिश की मगर ससुराल वालों ने हरमन को देने से इनकार कर दिया। हताश हुए हैप्पी ने वहीं पर जहरीला पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली। हालांकि हैप्पी के परिजनों का कहना ही की उसकी हत्या की गई है।
फिलहाल पुलिस हैप्पी की मौत को खुदकुशी का मामला मानकर तफ्तीश कर रही है। पुलिस ने हैप्पी के ससुराल के पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से हैप्पी के ससुराल वाले उसकी बेटी हरमन कौर के साथ फरार है पुलिस उनकी तलाश कर रही है। हैप्पी ने बेटी की चाहत में जान दी या फिर उसकी हत्या कर दी गई। ये बात तो जांच के बाद ही साफ हो जाएगी। लेकिन समाज में जिस तरह से पति पत्नी के बीच तकरार की बाते सामने आ रही है उसका खामयाजा बच्चों को भुगतना पडता है। इस मामले में भी चार साल की मासूम बच्ची को पिता से महरूम होना पडा।
फिलहाल पुलिस हैप्पी की मौत को खुदकुशी का मामला मानकर तफ्तीश कर रही है। पुलिस ने हैप्पी के ससुराल के पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से हैप्पी के ससुराल वाले उसकी बेटी हरमन कौर के साथ फरार है पुलिस उनकी तलाश कर रही है। हैप्पी ने बेटी की चाहत में जान दी या फिर उसकी हत्या कर दी गई। ये बात तो जांच के बाद ही साफ हो जाएगी। लेकिन समाज में जिस तरह से पति पत्नी के बीच तकरार की बाते सामने आ रही है उसका खामयाजा बच्चों को भुगतना पडता है। इस मामले में भी चार साल की मासूम बच्ची को पिता से महरूम होना पडा।
रिश्तों का खून
ग्रेटर नोएडा में रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां सगे भाई ने ही अपने बडे भाई की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि मामला अवैध सम्बंधों का है जिसके चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया। घटना में मृतक की पत्नी भी घायल हो गई। घटना के बाद से आरोपी शख्स फरार है। फिलहाल पुलिस उसकी तलाश कर रही है। एक शक और फिर सामने थी लाश--वो लाश थी एक भाई कि-- जिसे अपने छोटे भाई पर शक करने की सजा मिली मौत। खुद सगे भाई ने कर दिया चंद पलों में रिश्तों का खून। सगा भाई ही बन गया भाई का कातिल। रिश्तों को शर्मसार करने वाली ये घटना है ग्रेटर नोएडा के धममानिकपुर गांव की। दरअसल धममानिकपुर गांव में मनोज रावल और उसका बडा भाई अमित रावल रहते। साल भर पहले अमित ने शादी कर ली। भाभी घर में आई तो मनोज की खुशी का ठिकाना नही रहा। वो भाई और भाभी की हर बात मानता जो कुछ वो कहते खुशी-खुशी करता। और फिर धीरे-धीरे मनोज की नजदीकियां अपनी भाभी से बढने लगी। वो भाभी के लिए कुछ भी करने को तैयार होता। अमित हर दिन काम पर निकल जाता वहीं मनोज घर पर ही रहकर भाभी की खिदमत में हाजिर रहता, दिन बीतते गए। अमित जब भी घर लौटता मनोज को अपनी पत्नी के साथ ही पाता। अमित को ये बाते अखरने लगी थी। उसे पसन्द नही था कि मनोज घर पर ही रहे। धीरे-धीरे अमित को शक होने लगा कि मनोज के उसकी पत्नी के साथ अवैध संबंध है इस बात को लेकर उसने मनोज को समझाया भी लेकिन मनोज पर कोई फर्क नही पडा। वहीं दोनों भाईयों के रिश्तों में खटास आ गई। मंगलवार की रात दोनों भाई घर पर बैठकर शराब पी रहे थे। इसी दौरान दोनो भाईयों में कहासुनी हो गई, मनोज अमित से मारपीट करने लगा। आवाज सुनरकर अमित की पत्नी बीच बचाव करने पहुंची तो मनोज ने उसपर गोली चला दी, इसी दौरान मनोज ने तैश में आकर अमित पर भी गोली दाग दी। खून में लथपथ पडे अमित को अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। जबकि उसकी पत्नी संतोष को गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना में संतोष के गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई। भाई को गोली मारने के बाद मनोज मौके से फरार हो गया। फिलहाल पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और फरार मनोज की तलाश कर रही है पुलिस को उम्मीद है कि मनोज को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि पुलिस भी मान रही है कि मामला अवैध संबंधों का है। अब पुलिस भले ही सगे भाई के हत्यारे मनोज को गिरफ्तार कर ले। लेकिन रिश्तों को शर्मसार करने वाली इस घटना ने जाहिर कर दिया है कि आज समाज में खून के रिश्ते किस कदर टूटते जा रहे है।
22 अक्टूबर 2009
लो तेंदुआ आ गया----
लो तेंदुआ आ गया----
बाहरी दिल्ली के जिंदपुर गांव में कुछ दिन पहले अचानक एक तेंदुआ दिखने से इलाके में हडकंप मच गया। जैसे ही लोगो को तेंदुए के मिलने का पता चला हर कोई जंगल के इलाके में दौड पडा। दरअसल अलीपुर इलाके के जिंदपुर गांव के एक फार्म हाउस दुआ दिखा तो फार्म हाउस के मालिक ने खुद ही उसकी वीडियों फिल्म बना ली और फिर मामले की जानकारी तुरंत पुलिस को भी दे दी। हमेशा लेट लतीफी का आरोप झेलने वाली दिल्ली पुलिस ने भी पूरे मामले को पूरी गंभीरता से लिया। सूचना मिलने के चंद मिनटों बाद ही पुलिस मौके पर पहुंच गई माने तेंदुए को चुटकियों में पकड कर उसे सलाखों के पीछे पहुंचा देगी। पुलिस के पहुंचने पर हालांकि फार्म हाउस के मालिक ने राहत की सांस ली। लेकिन फार्म हाउस में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर वो भी हैरान परेशान थे। चलो फिर क्या था हर कोई तेंदुए की वीडियों को देखने के लिए इतना बेताब मानो कभी तेंदुए को देखा ही नही हो। तेंदुए को देखने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक तो खुद पुलिस के जवान ही थे। वीडियों देखने के बाद साफ हो गया कि जिस जानवर पर इतना घमासान मचा है वो सही में तेंदुआ है इस बात की तस्दीक वाइलड लाईफ विभाग ने भी कर दी। लेकिन अब जितना अहम तेंदुए को गिरफ्तार करना था उतना ही ये पता लगाना भी की आखिर इस इलाके में तेंदुआ आया तो आया कैसे। चलिए इस पर बात करने से पहले उस घमासान पर बात कर लेते है जब तेंदुए को लेकर मारामारी रही। राजधानी में तेंदुआ आ जाए और मीडिया को खबर ना हो ऐसा कैसे हो सकता है चंद घंटो में ही तेंदुए के मिलने की खबर मीडिया जगत में भी जंगल की आग की तरह फैल गई। दरअसल उस दिन मुझे दोपहर की शिफ्ट में आफिस पहुंचना था लेकिन बाइक पंचर हो जाने की वजह से मैं आफिस लेट हो रहा था इस दौरान में मित्र का फोन भी आ गया कि अलीपुर के जिंदपुर इलाके में एक तेंदुए को देखा गया है मैं ये सुनकर हैरान रह गया फिर भी खबरी खबर कनफर्म कर रहा था तो मामले को हल्के में लेना सही भी नही था। मैंने खबर को आफिस में बताने के बाद खुद बाइक से ही मौके पर पहुंच गया। कुछ देर बाद ही आफिस से गाडी और कैमरामैन भी पहुंच गया। तबतक दिल्ली पुलिस के करीब 50 जवान हथियारों से लैस होकर फार्म हाउस पर पहुंच गए मानो तेंदुए को यूं पकडा। खैर वन विभाग का इन्तजार किया गया और इस तरह दिन के तीन बज चुके थे। फिर शुरू हुआ तेंदुए का तालाशी अभियान वन विभाग, वाइलड लाइफ और दिल्ली पुलिस तीखी नजरों से तेंदुए को तालाश रहे थे। कोई दूर से कोई पास से अचानक तालाश रूकी कुछ पंजों के निशान पर आकर। आखिरकार अंधेरा हो गया तो सर्च आपरेशन को भी रोकना पडा। अगले दिन दोबारा से तालाश शुरू हुई लेकिन पंजो के अलावा नतीजा कुछ नही निकला। अधिकारी तो तालाश में लगे थे ही उनसे कहीं ज्यादा मौके पर मौजूद पत्रकारों की नजरे तेंदुए को तालाश रही थी भला चौबीस घंटे से एक ही तो विजुअल पर चैनल खबर को ठोक बजाकर चला रहे थे। अब कुछ नया भी तो चाहिए था भई आफिस भी तेंदुआ पकडे जाने की बाट जोह रहा था। हर घंटे बाद एक ही सवाल तेंदुआ मिला क्या। लगातार 48 घंटे तक पुलिस प्रशासन के साथ साथ पत्रकार महोदय भी तेंदुए की तालाश करते रहे लेकिन आखिरकार हाथ कुछ नही लगा। तो पत्रकारों को भी अपना बोरिया बिस्तरा समेटना पडा। अब तेंदुआ जितना बिकना था बिक चुका। अधिकतर न्यूज चैनलस् ने लाल गोला लगाकार दर्शको को दिखा ही दिया की देख लो यही है तेंदुआ। आखिरकार 48 घंटे तक चला तेंदुए और प्रशासन का ड्रामा था खूब मजेदार।
बाहरी दिल्ली के जिंदपुर गांव में कुछ दिन पहले अचानक एक तेंदुआ दिखने से इलाके में हडकंप मच गया। जैसे ही लोगो को तेंदुए के मिलने का पता चला हर कोई जंगल के इलाके में दौड पडा। दरअसल अलीपुर इलाके के जिंदपुर गांव के एक फार्म हाउस दुआ दिखा तो फार्म हाउस के मालिक ने खुद ही उसकी वीडियों फिल्म बना ली और फिर मामले की जानकारी तुरंत पुलिस को भी दे दी। हमेशा लेट लतीफी का आरोप झेलने वाली दिल्ली पुलिस ने भी पूरे मामले को पूरी गंभीरता से लिया। सूचना मिलने के चंद मिनटों बाद ही पुलिस मौके पर पहुंच गई माने तेंदुए को चुटकियों में पकड कर उसे सलाखों के पीछे पहुंचा देगी। पुलिस के पहुंचने पर हालांकि फार्म हाउस के मालिक ने राहत की सांस ली। लेकिन फार्म हाउस में तेंदुए की मौजूदगी को लेकर वो भी हैरान परेशान थे। चलो फिर क्या था हर कोई तेंदुए की वीडियों को देखने के लिए इतना बेताब मानो कभी तेंदुए को देखा ही नही हो। तेंदुए को देखने के लिए सबसे ज्यादा उत्सुक तो खुद पुलिस के जवान ही थे। वीडियों देखने के बाद साफ हो गया कि जिस जानवर पर इतना घमासान मचा है वो सही में तेंदुआ है इस बात की तस्दीक वाइलड लाईफ विभाग ने भी कर दी। लेकिन अब जितना अहम तेंदुए को गिरफ्तार करना था उतना ही ये पता लगाना भी की आखिर इस इलाके में तेंदुआ आया तो आया कैसे। चलिए इस पर बात करने से पहले उस घमासान पर बात कर लेते है जब तेंदुए को लेकर मारामारी रही। राजधानी में तेंदुआ आ जाए और मीडिया को खबर ना हो ऐसा कैसे हो सकता है चंद घंटो में ही तेंदुए के मिलने की खबर मीडिया जगत में भी जंगल की आग की तरह फैल गई। दरअसल उस दिन मुझे दोपहर की शिफ्ट में आफिस पहुंचना था लेकिन बाइक पंचर हो जाने की वजह से मैं आफिस लेट हो रहा था इस दौरान में मित्र का फोन भी आ गया कि अलीपुर के जिंदपुर इलाके में एक तेंदुए को देखा गया है मैं ये सुनकर हैरान रह गया फिर भी खबरी खबर कनफर्म कर रहा था तो मामले को हल्के में लेना सही भी नही था। मैंने खबर को आफिस में बताने के बाद खुद बाइक से ही मौके पर पहुंच गया। कुछ देर बाद ही आफिस से गाडी और कैमरामैन भी पहुंच गया। तबतक दिल्ली पुलिस के करीब 50 जवान हथियारों से लैस होकर फार्म हाउस पर पहुंच गए मानो तेंदुए को यूं पकडा। खैर वन विभाग का इन्तजार किया गया और इस तरह दिन के तीन बज चुके थे। फिर शुरू हुआ तेंदुए का तालाशी अभियान वन विभाग, वाइलड लाइफ और दिल्ली पुलिस तीखी नजरों से तेंदुए को तालाश रहे थे। कोई दूर से कोई पास से अचानक तालाश रूकी कुछ पंजों के निशान पर आकर। आखिरकार अंधेरा हो गया तो सर्च आपरेशन को भी रोकना पडा। अगले दिन दोबारा से तालाश शुरू हुई लेकिन पंजो के अलावा नतीजा कुछ नही निकला। अधिकारी तो तालाश में लगे थे ही उनसे कहीं ज्यादा मौके पर मौजूद पत्रकारों की नजरे तेंदुए को तालाश रही थी भला चौबीस घंटे से एक ही तो विजुअल पर चैनल खबर को ठोक बजाकर चला रहे थे। अब कुछ नया भी तो चाहिए था भई आफिस भी तेंदुआ पकडे जाने की बाट जोह रहा था। हर घंटे बाद एक ही सवाल तेंदुआ मिला क्या। लगातार 48 घंटे तक पुलिस प्रशासन के साथ साथ पत्रकार महोदय भी तेंदुए की तालाश करते रहे लेकिन आखिरकार हाथ कुछ नही लगा। तो पत्रकारों को भी अपना बोरिया बिस्तरा समेटना पडा। अब तेंदुआ जितना बिकना था बिक चुका। अधिकतर न्यूज चैनलस् ने लाल गोला लगाकार दर्शको को दिखा ही दिया की देख लो यही है तेंदुआ। आखिरकार 48 घंटे तक चला तेंदुए और प्रशासन का ड्रामा था खूब मजेदार।
12 सितंबर 2009
बम धमाके और आंसू

एक साल बीत गया-- आंखो के आंसू सूख गए-- फिर भी ना जाने क्यू जवां बेटे की याद नही जाती। ना जाने हर बार क्यूं जिंदा होती है उसकी यादें ये हाल उस बुजुर्ग का है जिसने 13 सिंतम्बर सन 2008 की उस खौफनाक शाम को अपने जवान बेटे को गंवा दिया। दिन शानिवार. समय शाम के 5.30 मिनट ,और 24 मिनट में दिल्ली में पांच धमाके ।थर्रा गई दिल्ली,.... रुक गई सासें,....थम गया आसमा।27लोग हमेशा के लिए –हमेशा के लिए मौत के आगोश में चले गए। 127 घायल हुए.....इन धमाकों में किसी के सिर से बड़ो का साया हटा ....तो किसी के भाई की कलाई सूनी हुई.......किसी को कोख उजड़ी......हादसे के एक साल बीत जाने के बाद भी लोग उस काले दिन को याद कर आज सिहर उठते है।......जिस दिन उनकी दुनिया उजड़ी थी।पहला धमाका करोलबाग की गफ्फार मार्किट में हुआ। यहां बम एक आटों में रखा था। जिसमे एक के बाद एक दो धमाके हुए।दूसरा धमाका दिल्ली का दिल कहे जाने वाले क्नॉट प्लेस में बाराखम्बा मैट्रों स्टेशन के बाहर रखे कूड़ेदान में हुआ।और तीसरा धमाका दिल्ली सबसे पाश इलाका कहे जाने वाले ग्रैटर कैलाश की मार्किट में हुआ। यहां पर बम एक साइकिल के हैंडल में लटके लंच बाक्स में रखा था। दहशत गर्दों ने धमाका करने से पहले मीड़िया को एक मेल भी किया था। जिसमे धमाका करने की बात कि गई थी। लेकिन जब तक पुलिस उस मेल को समझ पाती । तब तक नापाक इरादे लिए आए आतकियों ने वारदात को अंजाम दे दिया था। देखते देखते चारों और काला धुआ....सिर्फ चीख पुकार सुनाई पड़ी रही थी।लोगों अपनी जान बचा कर भाग रहे थे।कुछ लोगों की आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई ...और जो इस धमाके में बच गये ....उन्हें मानों नई जिदंगी मिल गई।इस बम धमाके की जिम्मेदारी इड़ियन मुजाहिद्दीन ने ली।धमाकों की साजिश सरहद पार रची गई थी। साजिश रचने वालों में रियाज बट्टल,...आमिर रजा खान.......अबू अलकामा जैसे आतंकी शामिल थे। इनके 16 साथी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।हालाकि पुलिस ने इनको पकड़ने के लिए रखे इनाम को एक लाख से पांच लाख कर दिया है।पुलिस इन को पकड़ने के लिए छापेमारी करती रही। लेकिन उसके हाथ कुछ नही लगा।पुलिस को 19 सितम्बर सन 2008 को.............खुफिया जानकारी मिली की दिल्ली के जामिया इलाके के एक घर में कुछ आतकंवादी छिपे हुए है।मौके पर पहुची पुलिस से उनकी मुठभेड़ हो गई .....जिसमें इड़ियन मुजाहीद्दीन के दो आतकवादी आतिफ.,और मौ साजिद मारे गए। इस मुठभेंड़ ने दिल्ली पुलिस ही बल्कि पूरे मुल्क ने एक वीर सपूत मोहन चंद शर्मा को खो दिया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 22 मई 2008 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से हूजी के आंतकवादी अदुर रहमान को गिरफ्तार किया। जिससे पूछताछ के बाद पता चला कि उसने जनकपुरी की एक मजिस्द में तीन किलो आरडीएक्स ..5 डेटोनेटर..1 टाईमर छिपा कर रखा हुआ है।इसने बताया कि सरहद पार बैठे नाटा ने राकी नाम के व्यक्ति को 7 किलों आरडीएक्स के साथ दिल्ली में दखिल हो चुका है ।लेकिन आज तक ना तो राकी का पता चला और ना ही आरडीएक्स ।यानी दिल्ली अभी भी बारुद के ढेर पर बैठी है। शायद आज भी खुद को दिल्ली में महफूज महसुस करना खुद के साथ बेमानी होगी।
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