20 जून 2009

मनचलों पर मुसीबत



सूरत में स्कूली छात्रा के साथ गैंग रेप के बाद पुलिस हरकत में आ गई है। पुलिस अब हर संदिग्ध गाड़ी पर नजर रख रही है।स्कूल कालेजो की आसपास सुरक्षा को कडा कर दिया गया है।इसके साथ ही पुलिस मनचलों से भी सख्ती के साथ निपट रही है। पुलिस ने इस कार्यवाही के तहत कुछ मनचलों को हिरासत में भी लिया है। -चलती कार में नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद सूरत पुलिस में हडकंप मचा है। पुलिस अब हर वो उपाय करना चाहती है जिससे फिर कोई ऐसी घटना ना हो। ऐसे ठिकानों पर पुलिस छापेमारी कर रही है जहां मनचले अश्लील हरकत करते है। पिछले दो दिनों से शुरू हुई इस कवायद में अश्लील हरकत करने के आरोप में पुलिस ने दो सौ से ज्यादा मनचलों को रंगेहाथ पकडा है... हर रोज सूरत पुलिस की कुछ टीमें ख़ास तौर पर स्कूल और कालेजो के छात्र- छात्राओं की सुरक्षा के लिए शहर में घूमा करेंगी। स्टूडेंट वैन पर तैनात पुलिसकर्मी स्कुल कालेजो के बाहर पेट्रोलिंग करेगें और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखेंगे, पुलिस ने लड़कियो के साथ छेडछाड को रोकने के लिए एक ख़ास सुरक्षा दस्ता भी बनाया है। इसके साथ ही शिक्षण संस्थानों तैनात पुलिसकर्मियो को भी खास प्रशिक्षण दी जा रही है। पुलिस के इस अभियान से लड़कियों को लेकर चितिंत रहने वाले अभिभावक राहत महसूस कर रहे है। हालांकि वो ये भी मान रहे है कि जो कदम पुलिस ने अब उठाया है वो पहले ही उठाने चाहिए थे। ..देर आए दुरूस्त आए की तर्ज पर सूरत पुलिस ने मनचलों के खिलाफ मुहिम तो शुरू कर दी है। मगर ये मुहिम कितनी कारगर साबित होती है ये देखने वाली बात होगी।

19 जून 2009

शर्मसार इंसानियत

उत्तारखंड पुलिस ने एक शख्स को मासूम बच्ची के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि युवक ने 13 साल की मासूम बच्ची को सहारा देने के नाम पर तीन साल तक बलात्कार करता रहा। बच्ची ने महिला संगठन की मदद से मामले की जानकारी पुलिस को दी जिसके बाद आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया। नाम मिलका सिहं -- उम्र 40 साल-- गुनाह--- मासूम बच्ची से बलात्कार-- खुद को पाक साफ बताने वाले इस शख्स पर आरोप है 13 साल की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार का--- उस बच्ची के साथ जिसे ये सहारा देने के नाम पर अपने घर लाया। और फिर लगातार तीन साल तक उसे अपनी हवस का शिकार बनाता रहा। एक दिन बच्ची मिलका सिहं के जुल्मों से तंग आकर महिला संगठन के पास पहुँची और अपने साथ हुए जुल्मों की जानकारी दी। जिसके बाद पूरा मामला पुलिस तक पहुँचा। पीलीभीत का रहने वाला मिलका सिहं शादीशुदा है।मिलका फौज में तैनात था हालांकि रिटायर से पहले ही उसने अपनी नौकरी छोड दी और व्यापार शुरू कर लिया। मासूम बच्ची मिलका सिहं के गांव की ही रहने वाली है। उसके माँ बाप बचपन में ही गुजर गए।मिलका सिहं सहारा देने के नाम पर घर ले आया लेकिन कुछ दिनों के बाद उसकी नियत खराब हो गई और फिर शुरू हो गया हवस का ये खेल । हालांकि पुलिस गिरफ्त में आने के बाद खुद को पाक साफ बता रहा है। घटना का पता चलते ही इलाके के लोगो का गुस्सा फुट पडा और लोगो ने थाने पर जमकर हंगामा किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस दर्ज कर जांच कर रही है। मासूम बच्ची जल्मों की कैद से तो छुट गई मगर अभी भी सहमी हुई है। मिलका सिहं ने ना केवल बच्ची का बलात्कार किया बल्कि भरोसे उस दिवार को भी तोड दिया है जिसकी बुनियाद पर इन्सानी रिश्ते खडे होते है।

दागदार होते रिश्ते

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में एक बार फिर रिश्ते दागदार हुए है।पुलिस ने एक महिला को उसके प्रेमी के साथ गिरफ्तार किया है। महिला पर आरोप है कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की कोशिश की थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। माम्मा पापा को मारना चाहती है-- मैने देखा है मौत से पहले का मंजर--- जी हाँ इस मासूम के सामने ही इसके पिता को मारने की साजिश रची गई। वो भी खुद इसकी माँ ने--- वजह नाजायज रिश्ते-- यही वजह थी राजेश के कत्ल करने की--- लेकिन ये साजिश नाकाम हो गई। क्षमा और प्रवीण चढ गए गाजियाबाद पुलिस के हत्थे-- क्षमा ने प्रवीण के साथ मिलकर राजेश को मारने की कोशिश की थी। जिस वक्त दोनो नाकाम वारदात को अंजाम दे रहे थे। मासूम अभिषेक ने इन्हे देख लिया। इतने में पडोसी भी मौके आ पहुँचे-- अभिषेक ने उन्हे जो कुछ बताया- सब हैरान रह गए। राजेश नगर निगम मे नौकरी करता-- हंसता खेलता परिवार-- प्रवीण राजेश का छोटा भाई है। सभी साथ रहते लेकिन एक दिन देवर भाभी का रिश्ता बदल गया-- प्रवीण क्षमा को चाहने लगा-- और देखते ही देखते बात नाजायज रिश्ते तक आ पहुँची। दोनो के बीच दिवार था राजेश तो दोनो ने मिलकर राजेश को ही रास्ते से हटाने की तैयारी कर ली। पहले तो राजेश को बेहोश किया और बाद में खुदकुशी का रूप देने के लिए उसे पंखे से लटकाने की कोशिश करने लगी। दोनो की ये साजिश नाकाम हो गई। हंसता खेलता परिवार अब टूट गया है-- क्षमा को ना तो प्रवीण ही मिला और ना ही वो एक आदर्श पत्नी ही बन सकी। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर दोनो को जेल भेजने की तैयारी कर ली है।

15 जून 2009

मां की मुजरिम

राजधानी में फिर एक बार माँ बेटी के रिश्ते पर सवाल उठे है। एक बेटी ने जन्म देने वाली माँ को ऐसे जख्म दिए जिसके बारे मे किसी ने सोचा भी नही होगा। उस बेटी ने अपनी माँ को पूरे दो साल तक घर में बंधक बनाकर रखा-- वो भी दौलत की खातिर---वो दौलत की खातिर माँ के मायने ही भूल बैठी। माँ तुम सबसे प्यारी हो -- तुमने मुझे जन्म दिया--- मेरा ख्याल रखा -- मुझे अपने आंचल की छांव दी --एक बेटी के लिए माँ के मायने क्या होते है उससे ज्यादा कोई नही जानता--- मगर राजधानी दिल्ली में तो....एक और बेटी ने इस रिश्ते के मायने बदल दिए। दरअसल दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके मे रहने वाली संतोष के साथ जो कुछ हुआ वो दिल दहला देने वाला है--- संतोष की बेटी नीलम पहले तो अपनी माँ को साथ रखने के बहाने ले गई और बाद में उसे प्रताडित करने लगी। वजह थी पैसो की चाह-- संतोष के नाम पश्चिम विहार में एक कोठी थी। नीलम ने धोखे से कुछ कागजात पर साईन करा लिए-करीब दो साल पहले नीलम.... अपनी माँ को, अपने ससुराल पंजाब के भटिंडा शहर ले गई। बाद में नीलम की पति की मौत हो जाती है। पति को खोने के बाद नीलम की दोस्ती राजीव नाम के एक युवक से हो जाती है। फिर शुरु होता है लालच का खेल...और दोनो मिलकर दे देते है संतोष को काली कोठरी की कैद। दो साल बीतने को हुआ तो उन्हें दिल्ली ले आए----- लेकिन इस बार इनकी किस्मत साथ ना दे पाई
संतोष को जब दिल्ली लाया गया तो इसका पता उसके बेटे को चल गया --- सितेन्दर ने मामले की जानकारी पश्चिम विहार थाना को दी--- और पुलिस की मदद से अपनी मां को इस कोठी से छुडाया। पुलिस ने बुजुर्ग संतोष की शिकायत दर्ज कर ली है। बुजुर्ग इतनी सहमी हुई है कि.....अभी भी बेटी के दिए दर्द को, भूल नही पाई है।
आखिर क्या हो गया है हमारे समाज को.....क्यों बदलने लगे हैं रिश्तें...ये कुछ ऐसा सवाल है जिनका जबाब हमीं को ढूंढना है। जिन्दगी के आखिरी पडाव पर पहुँची संतोष को अपनी ही संतान से ऐसा दर्द मिलेगा--- सुनकर ही दिल सहम जाता है।

कातिल बेटा

बाहरी दिल्ली के अलीपुर इलाके में हुई 65 साल के बुजुर्ग की हत्या की गुत्थी को दिल्ली पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में बुजुर्ग के बेटे को उसके एक साथी के साथ गिरफ्तार किया है। 13 जून की सुबह रघुबीर की लाश घर से बरामद हुई थी।
सतीश दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में है। आरोप है पिता के कत्ल का --- उस पिता के कत्ल का जिसने इसे उंगली पकड चलना सिखाया --- जिंदगी के हर मोड पर बेटे का साथ दिया --- नई राह दिखाई --- मगर य़े भूल गया ---सारे रिश्तो को -- कर दिया बेरहमी से अपने ही पिता का---- कत्ल रंग लिए पिता के खून से हाथ --- बन गया पिता का मुजरिम ---- दरअसल 13 जून को दिल्ली के अलीपुर मे ऱघुवीर की लाश उसी के घर से बरामद हुई थी। किसी ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। रघुबीर के शरीर पर कुछ चोट के निशान भी थे।पहली नजर में साफ था कि किसी ने ऱघुवीर का कत्ल कर दिया है। कमरे मे सारा सामान ठीक ठाक था यानि कत्ल का मकसद लूट-पाट नही था--- पुलिस को शक हो गया की हत्या में किसी जानकार का ही हाथ है। मगर कई सवाल भी थे आखिर रघुवीर के मौत से किसे फायदा होने वाला है।रघुवीर की पत्नी भी खुद हैरान थी।
पुलिस ने मामले की तफ्तीश तेजी से शुरू कर दी। पुलिस की जांच कुछ परिचित लोगो के इर्द गिर्द ही घुम रही थी। मगर सवाल अब भी बरकरार था -- कत्ल के मकसद का --- जैसे ही मकसद साफ हुआ तो कातिल भी बेनकाब हो गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक खुद रघुवीर के बेटे ने ही अपने पिता की हत्या की है। पुलिस का शक उस वक्त और गहरा हो गया हो गया जब रघुवीर की डायरी में कई बार बेटे के साफ झगडे का जिक्र था। सतीश ने वारदात को अंजाम देने के लिए अपने दो साथियों की मदद भी ली। जिनमें से पुलिस ने एक को गिरफ्तार कर लिया है जबकि दूसरा अभी फरार है।
पुलिस के मुताबिक 13 जून की रात सतीश ने अपने दो साथी के साथ मिलकर ऱघुवीर की गला दबाकर हत्या की थी।वजह थी पिता की अय्याशी --- दरअसल रघुवीर पिछले दो दशको से अपनी पत्नी से अलग रहता था। इसी दौरान उसके संबंध किसी और महिला से हो गए -- रघुवीर उसपर खुब पैसा लुटाता-- ये बात सतीश को नागवार गुजरी-- वो पिता की जिंदगी मे दखल देने लगा मगर रघुवीर नही माना तो सतीश ने पिता को खत्म करने की ठान ली -- उसने अपने साथियों को पैसा और शराब पिलाने की बात कहकर इस वारदात में शामिल होने के लिए तैयार कर लिया। फिर तीनो ने मिलकर रघुवीर की हत्या कर दी। सतीश ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की मगर वो खुद ही बयानों में उलझ गया और आखिरकार पुलिस के सामने टुट गया।
सतीश ने पिता को सही रास्ते पर लाने की लाख कोशिश की मगर अंत मे उसने जो रास्ता अख्तियार किया-- वो रास्ता अय्याश पिता को सही रास्ता तो नही दिखा सका--- बल्कि बेटे को ही सलाखों के पिछे लाकर खडा कर दिया।

03 अप्रैल 2009

अपनों की याद

कृष्ण सिंह का परिवार जवान बेटे की मौत को आज भी भूल नहीं पाया है उसे याद कर आज भी इनकी आँखे भर जाती है ..जवान बेटे की याद कृष्ण को रोज उस पेड़ की तरफ खीच ले जाती है जंहा बुध सिंह की लाश मिली थी ...बेटे की मौत के बाद तो उनकी दुनिया ही बदल गई है
कृष्ण सिंह 55 साल का वो इंसान जो पिछले दो साल से न्याय की उम्मीद में पुलिस के आला अधिकारियो के चक्कर लगा रहा है ...इसे उम्मीद है आज नहीं तो कल न्याय मिलेगा...जवान बेटे की याद कृष्ण को खुद बे खुद उस पेड़ की तरफ ले जाते है जो बुध सिंह की मौत का गवाह है .. भले ही बुध सिंह की मौत को दो साल हो गए हो लेकिन बेटे की मौत का दुःख इस परिवार में कम नहीं हुआ है अब यहाँ न खुशियाँ है न ही हंसी की गूंज ...भले की बुध सिंह की मौत को आज दो साल हो गए हो लेकिन जख्म अभी हरे है ..दो साल के अभिषेक को ये मालूम भी नहीं है........कि इसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है.....इस बात से बेखबर इस मासूम की आंखे रह-रहकर अपने पिता को ढूंढती है.......और जब इसे उसके पिता कहीं नही दिखते तो ये उनकी तस्वीर उठा लेता है.....उन्हें प्यार करता है शायद इस उम्मीद में के आज नहीं तो कल आयंगे और इसे गोद में उठा लेंगे ...बुध सिंह हमेशा खुश रहता था परेशानी कभी उसके चहरे पर नहीं दिखी..बुद्ध सिंह की मां की मानें तो उनकी बेटा एक ज़िंदादिल इंसान था..और वो कभी आत्महत्या नहीं कर सकता इसकी मानें तो इनके बेटे को किसी से पैसे भी लेने थे...
कहते है उम्मीद पर दुनिया कायम है शायद इसी उम्मीद के सहारे क्रिशन सिंह न्याय की आस में है लेकिन सवाल ये भी है ..दो साल की तफ्तीश का नतीजा सिफर देने वाली दिल्ली पुलिस कभी इस परिवार को न्याय दिला पायेगी या फिर बुध सिंह की मौत बस एक राज की रह जायगी ?

31 मार्च 2009

उम्मीद के दो साल


उम्मीद के दो साल
ये दांस्ता है उस माँ बाप की जो पिछले दो साल से एक उम्मीद के सहारे जिए जा रहे है की उनका बेटा तो अब नहीं लौट सकता मगर उन्हें न्याय तो मिलेगा ...लेकिन अब तो उन्हें वो उम्मीद की किरण भी ख़त्म होती दिख रही है ये आप बीती किसी दूर दराज के इलाके की नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली की है जंहा एक माँ बाप को इन्तजार है बस इस बात का की कोई उन्हें बता दे की उनके जवान बेटे की हत्या हुई या फिर उसने खुदकुशी की ....दरअसल एक नोजवान की मौत की ये गुत्थी हत्या और खुदकुशी के बीच पिछले दो सालो से यूंही झूल रही है ... बुध सिंह एक २४ साल का नोजवान ....दिल्ली के एक छोटे से गाँव में रहने वाला बुध सिंह ... हमेशा खुशमिजाज रहने वाला बुध सिंह इस नाम से दिल्ली के लोग भले ही अच्छी तरह वाकिफ न हो मगर पिछले दो साल से ये नाम दिल्ली पुलिस के लिए सरदर्द बना हुआ है ....बुध सिंह न तो कोई पेशेवर गुन्हेगार है न ही किसी का कातिल लेकिन फिर भी ये नाम दिल्ली पुलिस के लिए सरदर्द बना हुआ है ....बुध सिंह २४ साल का बुध सिंह तो वो इंसान है जो आज से दो साल पहले ही इस दुनिया से रुखसत हो चुका है .... एक अप्रेल
२००७ की सुबह कृष्ण सिंह के लिए गम के वो लम्हे लेकर आई जो दो साल बीतने के बाद भी ज्यों के त्यों है दरअसल उस दिन कृष्ण सिंह को खबर मिली की उनके बेटे ने खेत में एक पेड़ के सहारे फांसी लगा खुदकुशी कर ली है ...जब मौके पर जाकर देखा तो बुध सिंह की लाश पेड़ पर लटकी थी उसके सिने में एक गोली भी लगी थी ...पहली नजर में साफ़ था की ये खुदकुशी नहीं हत्या है ...पुलिस को मौका अ वारदात से कुछ सबूत भी मिले ..साफ था की किसी ने बुध सिंह की गोली मार हत्या कर उसके शव को पेड़ से लटका दिया है ...पुलिस ने भी मामले को जल्द सुलझने का आश्वासन दिया .....
पुलिस की जाँच इस मामले की तफ्तीश में लगी थी हर किसी को विशवास था की बुध सिंह के कातिलो से पर्दा जल्द की उठने वाला है मगर नो दिन बाद पुलिस का वो ब्यान आया जिस को सुनकर हर किसी के होश फाकता हो गये ...बुध सिंह की हत्या नहीं हुई थी बल्कि उसने खुदकुशी की है...इस बात पर किसी को यंकिन नहीं हो रहा था आखिर एक इंसान कैसे खुद को गोली मार पेड़ पर लटका सकता है या खुद को फांसी पर लटका गोली कैसे मार सकता है ...परिवार वालो और ताजपुर गाँव के लोगो ने इस बात को लेकर थाने पर हंगामा भी किया ..लेकिन जैसे जैसे दिन निकलते गए मौत की ये गुत्थी उतनी की उलझती चली गई ...
आखिरकार पुरे मामले की जाँच थाना पुलिस के बजाए क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई ...आज इस घटना को पुरे दो साल हो गए है ...साथ की पुलिस की तफ्तीश को भी.... मगर दो साल की इस तफ्तीश के बारे में आप सुनेगे तो चौंक जांयगे क्योंकि तफ्तीश का नतीजा सिफर है ...बुध सिंह की मौत की गुत्थी आज भी उसी मोड़ पर है जंहा से वो शुरू हुई थी बुध सिंह की मौत का राज जानने को उसका परिवार ही नहीं बल्कि ताजपुर कलां गाँव का हर बाशिंदा बेताब है... हर कोई जानना चाहता है की उस रोज क्या हुआ था कैसे हुई थी बुध सिंह की मौत ....
दो साल की तफ्तीश के बारे में जब आला अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने न केवल दो साल बीतने के बाद खुद को इस मामले से अन्भिझ बताया बल्कि इस मामले पर सटीक जवाब देने के बजाये ...उलटा सवाल मिडिया पर की दाग दिया ...आप क्यों इस केस में इतनी दिलचश्पी ले रहे है ...
दिल्ली पुलिस के लिए भले की ये केस अहम् न हो लेकिन पिछले दो साल से न्याय की बाट जोह रहे उस माँ बाप को आज इन्तजार है की.कोई तो उन्हें बता दे के आखिर उनके जवान बेटे के साथ हुआ क्या था ...